शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

मोदी सरकार में पहला इस्तीफा, सडक के आंदोलन से हल गई केंद्र सरकार

नई दिल्ली/दि. 25 – विद्यार्थियों के जंतर-मंतर सहित देशव्यापी आंदोलन के कारण आखिरकार आज केंद्र की मोदी सरकार पहली बार बैक फुट पर नजर आई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पडा. स्वाभाविक रुप से प्रधान के त्यागपत्र की घोषणा के फौरन बाद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख सहित विद्यार्थियों ने झूमकर आनंद व्यक्त किया. उधर एक बडे घटनाक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिल्ली हेतु प्रस्थान कर चुके हैं. इस बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने प्रधान के त्यागपत्र को देश के युवाओं की बडी विजय निरुपित कर लोकतंत्र की भी जीत कहा है. चर्चा है कि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के कडे बयान के कुछ घंटों बाद आया. जिससे संघ की राय से ही आखिर मोदी सरकार को अपने एक मंत्री को हटाना पडा है. आंदोलन के बाद मंत्री के इस्तीफे की मोदी के 12 वर्षों की कार्यकाल में यह पहली घटना बताई जा रही है.
* इस्तीफे की चिठ्ठी सोशल मीडिया पर
प्रधान ने इस्तीफे को लेकर चिट्ठी पोस्ट की. दो पेज और 575 शब्दों में लिखी इस चिट्ठी में प्रधान ने बाकी बातों के साथ दो जगह युवाओं को भ्रमित करने की बात भी लिखी. चिट्ठी का यह हिस्सा नीचे हाइलाइट किया गया है.
* भागवत के बयान के 4 घंटे बाद इस्तीफा
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार सुबह दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता.’ भागवत ने कहा था- आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है. हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए. उन्हें हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए, न कि आदेश देना चाहिए. संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है.
* दीपके अडे, दो डिमांड अभी बाकी
जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा – मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं. हम ऐसे नहीं जाएंगे. कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं. जिन बच्चों ने सुसाइड किया, उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले. पुलिसवालों पर एक्शन हो. दिल्ली पुलिस अधिकारी याद रखें कि उन्होंने कॉकरोच से पंगा लिया है. हमने तो एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया, तो तुम लोग क्या चीज हो. छात्रों पर केस वापस होने चाहिए. भैया, ये लोकतंत्र है. मुझे एक महीने से लोग कहते थे- क्या कर रहे हो, कब तक बैठोगे, ये इस्तीफा नहीं देंगे. ये मनमानी सरकार है, लेकिन हमने कर दिखाया. जैसे ही अभिजीत दीपके के पास फोन आया कि प्रधान का इस्तीफा हो गया, वह घुटनों के बल बैठ गए और खुशी मनाने लगे.
* वांगचुक बोले- ये लोकतंत्र की जीत
सोनम वांगचुक ने अस्पताल से किए पोस्ट में लिखा- यह लोकतंत्र की जीत है, प्रत्यक्ष लोकतंत्र… सड़कों से मिली जीत. यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है. सीजेपी और झेनझेड को बधाई. देश के हर कोने से उठ खड़े होने के लिए सभी नागरिकों को धन्यवाद.
* प्रियंका गांधी ने कहा- जनता की सुननी होगी
प्रियंका गांधी ने कहा- बच्चों को लाठी से पीटा गया. आज के बाद इस देश का हर शासक याद रखेगा की आपको जनता की सुननी होगी. पूरे देश में छात्रों ने प्रदर्शन किया. ये उनकी जीत है. कांग्रेस पार्टी ने भी अपनी पूरी क्षमता से छात्रों का समर्थन किया. राहुल गांधी भी लगातार पिछले 2-3 सालों से छात्रों से मुद्दे पर डटे हुए हैं. आज आरएसएस ने भारत की पूरी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है.
* केजरीवाल बोले- कभी पेपर लीक न हो
अरविंद केजरीवाल ने कहा, ’सब कहते हैं कि सरकार कभी झुकती नहीं है, पर इस सरकार को झुकना पड़ा. सरकार की यह जिम्मेदारी है ही कि वह प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांग सुने. मैं उन्हें बधाई देता हूं. सरकारें अब यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में कभी पेपर लीक न हो.
* 29 साल पहले किया था प्रदर्शन
29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था. प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था. इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था. धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था. उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था.
* मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट
जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था. धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था. इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं. कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया. उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया. ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है. पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है. दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है.
* फास्ट-ट्रैक कोर्ट की जज अनु ग्रोवर ने कार्यभार संभाला
दिल्ली की स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने छएएढ पेपर लीक मामले की सुनवाई शुरू कर दी है. इस कोर्ट की स्पेशल जज अनु ग्रोवर बलिगा ने शनिवार को कार्यभार संभाल लिया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में इस विशेष अदालत का गठन किया था, जो पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी. साथ ही, सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज लंबित मामलों को भी इसी अदालत में ट्रांसफर किया जाएगा, ताकि उनकी जल्द सुनवाई हो सके.

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