पंचमहाभूत में विलीन हुए संत साई साधराम साहिब

रहरकी में हुई पार्थिव शरीर पर दिव्य अंतिमक्रिया

* सतरामधाम में अंतिम दर्शन हेतु उमडे हजारों श्रध्दालू
* अंतिम यात्रा में भी लाखों श्रध्दालूओं की रही उपस्थिति
अमरावती/कराची/दि.21- समूचे विश्व में बसे सिंधी समुदाय हेतु आराध्य रहनेवाले स्वामी सतरामदास से शुरू हुई संत परंपरा को आगे बढानेवाले हुजूरी स्वरूप संत साई साधराम साहिब के विगत 19 मई को सिंगापुर में इलाज के दौरान ब्रम्हलीन होने के उपरांत कल 20 मई को उनका पार्थिव शरीर पाकिस्तान के सिंध प्रांत स्थित रहरकी धाम में लाया गया. जहां पर कल शाम 5 बजे से आज सुबह 10 बजे तक हजारों शोक संतप्त श्रध्दालूओं ने संतश्री के अंतिम दर्शन किए. पश्चात आज सुबह रहरकी स्थित सतरामधाम से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई. जिसमें देश विदेश से आए लाखों श्रध्दालुओं की उपस्थिति रही. यह अंतिम यात्रा अपने गंतव्य पर करिब दो घंटे का सफर तय करने के उपरांत पहुंची. इसके पश्चात संतश्री के पार्थिव देह को पंचमहाभुत में विलीन करने हेतु दिव्य अंतिमक्रिया का प्रारंभ किया गया. जिसके उपरांत संत साई साधराम साहिब अनंत में विलीन हो गए.
विशेष उल्लेखनीय है कि इस पूरी प्रक्रिया का सिधा प्रसारण विभिन्न न्यूज चैनलों सहित कई युट्यूब चैनलों पर किया गया. जिसे भारत व पाकिस्तान सहित दुनिया के अलग-अलग देशो में बसे सिंधी समाज बधूओं ने देखा तथा भारी अंतकरण एवं नम आखों के साथ संत साई साधराम साहिब को अंतिम बिदाई दी. इसके तहत अमरावती में भी सिंधी समुदाय द्बारा अलग अलग स्थानों पर संतश्री की अंतिमयात्रा एवं उनके अंतिम संस्कार के सीधे प्रसारण को सामुहिक रूप से दिखाने की व्यवस्था की गई थी. वहां पर पंचायतों के पदाधिकारियों सहित सिंधी समाज बंधुओं ने एकसाथ बैठकर अंतिम यात्रा व अंतिम संस्कार के दृष्यों को देखने के साथ ही संतश्री की स्मृतियों का अभिवादन करते हुए उनके प्रति श्रध्दांजलि भी अर्पित की.

* एसएसडी धाम में 70 लोगों ने शोक जताने किए केश अर्पण
स्थानीय देशना नगर परिसर स्थित एसएसडी में आज सुबह 7 बजे से ही संतश्री के प्रति आस्था रखनेवाले सिंधी समाजबंधुओ का जमावडा लगना शुरू हो गया था. जहां पर टीवी के जरिए रहरकी में चल रहे अंतिम दर्शन, अंतिम यात्रा व दिव्य अंतिमक्रिया के दृष्यों के सिधे प्रसारण को देखने की व्यवस्था भी की गई थी. उन दृष्यों को देखते हुए कई सिंधी समाज बंधू अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और संतश्री को याद करते हुए रो भी पडे. जिस समय करीब 70 सिंधी समाजबंधूओं ने संतश्री के प्रति अपनी शोक संतप्त भावनाओं का इजहार करने हेतु अपने केश भी अर्पित किए. केश अर्पण करनेवालों में संजय केशवानी, गोविंद मंधान, जगदीश दौलतानी, रोशन गिडवानी, महेश बजाज, शंकरलाल बत्रा, संतोष सबलानी, किशोर गगलानी (मुखी), राकेश रहेजा, सुभाष सोजरानी, अजीत साधवानी, शंकर मकवानी, पप्पूराम किगरानी, मुकेश मंधान, अनिल भारानी, गिरीष अरोरा, राजेश किंगर, कैलाश गावडा, देव मकवानी, सुधीर तलरेजा, भावेश आखर, आकाश हरवानी, विजय डेबला, काली तलरेजा, सुमित कुकरेजा, शामलाल बत्रा, विजय रहेजा, गौतम मकवानी, पुनीलाल कुकरेजा, पुरण बत्रा, हरप्रीत तनोजा, पंकज खत्री, राम सबलानी, जोधाराम, राजकुमार पोपली, अमित मतानी, गोपाल आर्य, अशोक बत्रा, नानकराम बत्रा, भजनलाल गेही, शिवम हेमनानी, अनिल किगरानी, चेलाराम मोरवानी, सुमित गगलानी, गोपाल मंधानी, नितीन सेवानी, सतिश झांबानी, वीरल केशवानी, दिपेश झंबानी, सुरेश तलरेजा, गुड्डू कपुर, कपील नानवानी, विशाल सबलानी, सुमीत तरडेजा, संदीप शेरवानी, सुनिल बत्रा, सुमित गगलानी, कपील ददलानी, संजय पंजवानी, तुलसीदास, संजय गगलानी, विकास खत्री, राज किंगर, जगदिश तलरेजा, शंकरलाल सेवानी आदि का समावेश रहा.


* बिजीलैंड, सिटीलैंड व ड्रिम्सलैंड सहित शहर के बाजार रहे आधे दिन के लिए बंद
सिंध-हिंद के सरताज कहे जाते संत साई साधराम साहिब के आकस्मिक अवसान तथा आज 21 मई को सुबह 11 बजे पाकिस्तान के रहरकी धाम में उनके पार्थीव शरीर पर होनेवाले अंतिम संस्कार को ध्यान में रखते हुए अमरावती शहर में रहनेवाले सिंधी समाज के सभी उद्योजकों व व्यापारियों ने आज आधे दिन के लिए अपने-अपने प्रतिष्ठानों को बंद रखने का निर्णय लिया था. जिसके चलते आज सुबह से ही नागपुर महामार्ग स्थित बिजीलैंड, सिटीलैंड व ड्रिम्सलैंड जैसे तीनों प्रमुख व्यापारिक संकूलो के साथ-साथ शहर के प्रमुख व्यापारी क्षेत्रों में काफी हद तक सन्नाटा पसरा रहा तथा दोपहर बाद तक सिंधी समुदाय के व्यापारियों की दुकाने पूरी तरह से बंद रही.

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