अमरावती मनपा में जन्म-मृत्यु पंजीकरण घोटाला उजागर
दो वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप

* एसआईटी जांच के संकेत
अमरावती/दि.17– अमरावती मनपा के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण शाखा में पिछले डेढ़ वर्ष से चल रहे कथित फर्जीवाड़े का मामला अब खुलकर सामने आ गया है. अतिरिक्त आयुक्त शिल्पा नाइक की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य निबंधक डॉ. विशाल काले और उप निबंधक डॉ. प्रतिभा अतराम पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं. दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल से जांच कराने पर भी विचार कर रही है.
* सांसद के पत्र के बाद शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत सांसद बलवंत वानखड़े द्वारा 4 नवंबर 2025 को मनपा आयुक्त को भेजे गए पत्र से हुई, जिसमें फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाने की शिकायत की गई थी. शिकायत के आधार पर 7 नवंबर 2025 को आयुक्त ने अतिरिक्त आयुक्त शिल्पा नाइक, मुख्य लेखा परीक्षक श्यामसुंदर देव और विधि अधिकारी श्रीकांत चव्हाण की तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की.
* जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
– समिति ने 2 दिसंबर 2025 को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की. रिपोर्ट के अनुसार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण से जुड़े 1,709 प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए.
– 1,480 मामलों में मूल दस्तावेज जानबूझकर प्रस्तुत नहीं किए गए.
– 112 मामलों में मूल रिकॉर्ड और दस्तावेज पूरी तरह गायब पाए गए.
– जांच में रजिस्ट्रार, उप पंजीयक और संबंधित कर्मचारियों पर नियमों का पालन किए बिना प्रमाणपत्र जारी करने तथा अपने कर्तव्यों में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं.
* निजी व्यक्ति को डिजिटल हस्ताक्षर का अधिकार देने पर सवाल
जांच रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्रों पर डिजिटल हस्ताक्षर करने का अधिकार किसी निजी व्यक्ति को किस आधार पर दिया गया. साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि अब तक कितने फर्जी जन्म एवं मृत्यु रिकॉर्ड निरस्त किए गए हैं. राज्य सरकार ने भी इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.
* महापौर ने दिए विभागीय जांच के आदेश
बुधवार को हुई नगर निगम की सामान्य सभा में महापौर श्रीचंद तेजवानी ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कर निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. दोनों अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है.
* पहले भी उठ चुका था मामला
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 12 से 15 हजार रुपये तक वसूले जाते थे. इस संबंध में मीडिया में भी पहले कई खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मनपा प्रशासन में हड़कंप मच गया है.
* एफआईआर के बाद बढ़ी कार्रवाई
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर 504 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. अब पूरे मामले में दोषियों की भूमिका तय करने और आगे की कार्रवाई को लेकर प्रशासन सक्रिय हो गया है. मनपा के इस कथित घोटाले की जांच आगे और तेज होने की संभावना है.