सोयाबीन को 6800 का दाम

वैश्विक कारणों से 10 दिनों में बढे 2800 रुपए

* मार्केट में रोज ढाई हजार बोरे की आवक
अमरावती/दि.11 – अब इसे खाडी युद्ध का असर कहे या अन्य घटनाक्रम. अमरावती मंडी में सोयाबीन के प्रति क्विंटल दाम में बेतहाशा तेजी आ गई है. पिछले 8-10 दिनों में सोयाबीन के रेट सोने समान बढते हुए 6800-7000 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच जाने की खबर है. मार्केट के व्यापारियों ने दाम बढने की पुष्टि करते हुए बताया कि, अभी भी रोज दो से ढाई हजार बोरे की आवक सोयाबीन की हो रही है. उन्होंने अमरावती मंडल से चर्चा में स्पष्ट कर दिया कि, दाम बढने का कारण वैश्विक तेजी और डिमांड है.
* सॉलवेंट प्लांट से डिमांड
‘अमरावती मंडल’ ने व्यापारियों से चर्चा की तो बताया गया कि, आसपास के सभी सॉलवेंट प्लांट से सोयाबीन मांगा जा रहा है. जिसके कारण अमरावती में रेट बढते-बढते 7 हजार तक जा पहुंचा. हाल के वर्षों में पहली बार सोयाबीन को प्रति क्विंटल 6800-7000 रेट मिले है. जबकि प्लांट डिलेवरी के रेट 7200 रुपए हो जाने की जानकारी देते हुए फसल मंडी व्यापारियों ने बताया कि, बारदाना, सेस, ट्रांसपोर्ट और सभी खर्च इसमें जुडे है.
* 4400 रुपए थे रेट
खाडी युद्ध से पहले यहां मंडी में सोयाबीन को 4400 रुपए प्रति क्विंटल दाम मिल रहे थे. भाव बढकर 5000 के पार हुए. पिछले 8-10 दिनों में इतनी तेजी आई कि, व्यापारियों को भी रेट बढने का एहसास नहीं हुआ. भाव बढने से घर और गोदाम में रखा गया सोयाबीन मंडी में लाना शुरु है. जिससे हजारो बोरे की रोज आवक हो रही है. रेट ने ऐतिहासिक तेजी प्राप्त की है. इसकी वजहें भी बताई जा रही है. जिसके अनुसार सरकार का स्टॉक मात्र तीन लाख टन रह गया है.
* तेल में तेजी
सोयाबीन के रेट बढने की एक वजह खाद्य तेलों के रेट बढना भी बताया जा रहा है. सोयाबीन के तेल के दाम खाडी युद्ध के बाद से प्रति किलो 30 रुपए चढ गए हैं. जिसके कारण प्लांट में माल की डिमांड बनी हुई है. इसी वजह से सोयाबीन के रेट काफी बढ गए है. तथापि सीजन समाप्ति पर होने से किसानों के पास माल नहीं समान बचा है. किसान पहले ही अपना माल व्यापारियों को बेच चुके हैं. यह भी बताया जाता है कि, इस बार बारिश घट-बढ होने से प्रति एकड एवरेज कम आया था.
* कपास, तुअर भी तेज
मंडी सूत्रों ने अमरावती मंडल को बताया कि, तुअर, कपास, चना सभी के रेट लगातार बढ रहे हैं. तुअर 7200-8000 रुपए बिक रही है. चना 5600 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है. दोनों ही तुअर तथा चना की हजारों बोरे की आवक बनी हुई है. मंडी से बाहर निजी व्यापारी कपास भी चढे हुए रेट में ले रहे हैं. कपास के दाम तीन वर्षों में सर्वाधिक होकर 9 हजार की रेंज में जा पहुंचे हैं.

Back to top button