केंद्रीय शिक्षामंत्री प्रधान का इस्तीफा छात्र एकजुटता व लोकतंत्र की जीत
विपक्षी नेताओं ने इस्तीफे की खबर पर जताई खुशी

अमरावती/दि.25 – देश की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व तले नीट पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के चलते आखिरकार केेंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने मंत्रीपद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया. जिसकी खबर सामने आते ही अमरावती में छात्रों के लिए आवाज उठानेवाले नेताओं व पदाधिकारियों में भी खुशी की लहर व्याप्त हो गई. जिन्होंने शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों की एकजुटता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की बडी जीत बताया. साथ ही कहा कि, दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन में कहीं न कहीं केंद्र सरकार की मनमानी पर अंकुश लगाने का काम किया है तथा यह स्पष्ट हो गया है कि, देश की जनता अब तानाशाही को बर्दाश्त करने के मुड में नहीं है.

* देर आए, दुरूस्त आए
कांग्रेस सांसद बलवंत वानखडे ने इस संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, धर्मेंद्र प्रधान ने काफी पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था. यदि वे ऐसा करते तो छात्र आंदोलन इतना ज्यादा लंबा नहीं चलता और छात्रों को इतने दिनों तक नाहक तकलिफों का सामना भी नहीं करना पडता. सांसद वानखडे ने यह भी कहा कि, कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए छात्रों का साथ दिया तथा कांग्रेस नेता राहुल गांधी व प्रियंका गांधी ने संसद से लेकर सडक तक छात्रों के लिए संघर्ष किया. जिसका सार्थक परिणाम आज धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तौर पर सामने आया है.

* यह लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण आंदोलन की जीत
कांग्रेस नेत्री व पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, देश के युवा छात्रों ने बडे धीरज व धैर्य के साथ पिछले 20-25 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन किया. इस दौरान दिल्ली सरकार सहित केंद्र सरकार में अपनी दमनकारी प्रवृत्ति का प्रदर्शन करते हुए छात्रों के आंदोलन को दबाने व कुचलने का पूरा प्रयास किया. लेकिन सभी युवा अपनी मांगों के लिए पूरी ताकत के साथ डटे रहे. जिसके चलते आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना ही पडा. यह लोकतांत्रिक तरीके से किए गए छात्र आंदोलन की सबसे बडी जीत है.

* इस्तीफा देना ही सही निर्णय था
कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, किसानों, छात्रों व महिलाओं सहित आम नागरिकों के साथ जुडे मुद्दों को लेकर सरकारों ने संवेदनशील ही रहना चाहिए. ऐसे में छात्रों की भावनाओं को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा इस्तीफा देने के संदर्भ में एक अच्छा निर्णय लिया गया. इसका पूरा श्रेय छात्रों की जीवटता और विपक्ष की एकजुटता को दिया जा सकता है. विपक्ष ने विगत कुछ वर्षों के दौरान पहली बार जबरदस्त एकजुटता दिखाई है. यह मजबूत लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है. शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब सरकार ने परीक्षा पध्दती को पारदशर्र्क बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए.

* युवा शक्ति के डर से मजबुरी में दिया इस्तीफा
कांग्रेस शहराध्यक्ष व मनपा पार्षद बबलू शेखावत ने इस संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, पहले तो केंद्र सरकार छात्रों की बात को सुनने के लिए भी तैयार नहीं थी. लेकिन छात्रों ने आखिरकार केंद्र सरकार को घुटने पर ला दिया है. 20 दिनों तक केंंद्र व दिल्ली सरकार द्वारा पुलिस के जरीए छात्रों पर जमकर अत्याचार किए गए और अब युवा शक्ति के डर की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोडकर जाना पडा. यह युवाओं की बडी जीत है.

* युवाओं ने देश को दिखाई नई राह
अमरावती मनपा के नेता प्रतिपक्ष व पूर्व महापौर विलास इंगोले ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, देश पिछले करीब 12 वर्षों से भाजपा की मनमानी सहित कई गलत बातों को बर्दाश्त करता चला आ रहा है. लेकिन अब छात्र आंदोलन के जरीए युवाओं ने देश को एक नई राह दिखा दी है. इसका पूरा श्रेय छात्रों सहित विपक्षी दलों की एकजुटता को दिया जा सकता है. आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की वजह से युवा शक्ति की जीत हुई है.

* छात्रों एवं विपक्षी दलों की एकजुटता जीती
कांग्रेस पार्टी के ग्रामीण जिलाध्यक्ष अनिरूध्द उर्फ बबलु देशमुख ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, आज देश में विपक्षी दलों सहित छात्रों की एकजुटता की जीत हुई है और इसका पूरा श्रेय छात्रों के आंदोलन को दिया जाना चाहिए. सरकार ने पूरे 20 से 25 दिनों के दौरान दिल्ली में छात्रों पर कई तरह के अत्याचार किए. जिनका जवाब अब सरकार को देश की जनता के सामने देना होगा.

* ‘जेन-जी’ नहीं बल्कि ‘जेन-जलजला’
युनायटेड रिपब्लिकन फोरम के संयोजक व पूर्व लेप्टिनेंट कमांडर डॉ. अलिम पटेल ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, जिस युवा पीढी को पूरे देश द्वारा ‘जेन-जी’ कहा जा रहा था, उसने अपने आपको ‘जेन-जलजला’ साबित करते हुए पूरे देश में मानो उबाल ला दिया है. करीब 20 दिनों तक युवाओं को दिल्ली की सडकों पर प्रताडना व दुर्व्यवहार का सामना करना पडा. लेकिन वे पीछे नहीं हटे, आखिरकार सरकार को ही झूकना पडा. इसके साथ ही अब यह साबित हो गया है कि, इस देश में तानाशाही और मनमानी नहीं चलेगी. बल्कि हमारे युवाओं के हाथ में देश का भविष्य पूरी तरह से सुरक्षित है.

* सरकार ने बच्चों की कडी परीक्षा ली, बच्चे पास व सरकार फेल
वंचित बहुजन युवा आघाडी के प्रदेशाध्यक्ष व चांदूर रेल्वे न.प. के स्वीकृत पार्षद डॉ. निलेश विश्वकर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, नीट परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के धैर्य और साहस की केंद्र सरकार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बेहद कडी परीक्षा ली. जिसमें विद्यार्थी तो उत्तीर्ण हो गए, लेकिन सरकार इस परीक्षा में फेल हो गई. क्योंकि छात्र आंदोलन को संभालने में सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हुई. जो इस्तीफा आज लिया गया, वह पहले ही लिया जा सकता था. लेकिन ऐसा करने की बजाए सरकार ने अडियल नीति अपनाई और बच्चों को नाहक ही 20 दिनों तक पुलिस के लाठी-डंडे खाने पडे. साथ ही कई छात्रों को दुर्व्यवहार का सामना करना पडा.

* सच्चाई और नेक इरादों की जीत हुई है
वंचित बहुजन आघाडी के जिलाध्यक्ष राहुल मेश्राम ने छात्र आंदोलन को मिली सफलता पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, यह नेक इरादों के साथ किए गए आंदोलन और सच्चाई की जीत है. इस आंदोलन ने देश में एक बार फिर लोकतंत्र को मजबूत करने काम किया है. साथ ही संवैधानिक मूल्यों को लेकर उम्मीद जताई है. यदि देश में सभी वर्गों के लोगों द्वारा आगे भी इसी तरह की एकजुटता दिखाई जाती है तो सरकार के मनमाने कामकाज पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है.

* केंद्र सरकार को अपनी असलियत समझ में आ गई होगी
शिवसेना उबाठा के जिला प्रमुख पराग गुडधे ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, छात्र आंदोलन को देशभर में मिले व्यापक जनसमर्थन को देखते हुए केंद्र सरकार को आखिरकार अपनी असलियत समझ में आ गई होगी. जिसके चलते सरकार ने आनन-फानन में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का फैसला लिया है. ताकि छात्र आंदोलन को खत्म किया जा सके. क्योंकि अब इस आंदोलन के चलते देश भर में केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनने लगा था. परंतु धर्मेंद्र
परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लानी चाहिए, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए तथा विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस सुधारों को तत्काल लागू करना चाहिए. अब सरकार शिक्षा व्यवस्था पर जनता का विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए शीघ्र और प्रभावी निर्णय ले, यही हमारी अपेक्षा है.

* युवा पीढी ने देश को दिखाई अपनी ताकत
भीम ब्रिगेड महाराष्ट्र राज्य के संस्थापक अध्यक्ष राजेश वानखडे ने इस संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, आखिरकार देश को युवाओं ने अपनी ताकत दिखा दी है और साबित कर दिया है कि, खुद को मजबूत समझनेवाली मोदी सरकार को भी झुकाया जा सकता है. छात्र आंदोलन को आज मिली सफलता के आगे चलकर बेहद दुरगामी परिणाम दिखाई देंगे.





