मैं और वीरेंद्र जगताप नहीं लड रहे चुनाव
कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख ने स्थिति की स्पष्ट

* विधान परिषद हेतु किसी अन्य के लिए नामांकन उठाने की बात कही
* कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर अब और भी जबरदस्त सस्पेंस
* नागपुर के हर्षजीत देशमुख के नामों की चर्चा, देशमुख ने कांग्रेस के सभी बडे नेताओं से फोन पर की चर्चा
* एक बार अमरावती भी आकर गए, ‘हल्दीराम’ की मिठाई भी बांटी
* मतदाता सदस्यों से अब तक सीधा व प्रत्यक्ष संपर्क नहीं
अमरावती/दि.26- विधान परिषद की सीट के लिए अमरावती स्थनीय स्वायत्त निकाय क्षेत्र में कल से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है. जो आगामी 1 जून तक चलेगी. कल नामांकन प्रक्रिया के पहले ही दिन कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख व पूर्व विधायक प्रा. वीरेंद्र जगताप द्बारा नामांकन उठाए गए. जिसके चलते यह धारणा बनती दिखी कि बबलू देशमुख अथवा वीरेंद्र जगताप में से किसी एक के द्बारा कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडा जा सकता हैं. लेकिन आज खुद कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख ने स्पष्ट किया कि वे खुद और पूर्व विधायक वीरेंद्र जगताप विधान परिषद का चुनाव लडने के बिल्कुल भी इच्छूक नहीं हैं. बल्कि उन्होंने पार्टी द्बारा तय किए जानेवाले प्रत्याशी के लिए नामांकन पत्र उठाया है, क्योंकि नामांकन के लिए समय काफी कम बचा हुआ है.
कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख द्बारा दैनिक अमरावती मंडल को दी गई इस जानकारी के साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि अमरावती स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस अब तक अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है. इन घटनाक्रमों के बाद कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर सस्पेंस और गहरा गया है. वहीं दूसरी ओर विधान परिषद की अमरावती निकाय सीट के लिए कांग्रेस की ओर से अब नागपुर के हर्षजीत देशमुख का नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार हर्षजीत देशमुख ने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से फोन पर चर्चा की है और वे अमरावती का दौरा भी कर चुके हैं. बताया जाता है कि उन्होंने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क साधने की कोशिश की तथा ‘हल्दीराम’ की मिठाई बांटकर अपनी दावेदारी का अप्रत्यक्ष संकेत भी दिया. हालांकि अब तक उन्होंने मतदाता सदस्यों से व्यापक और प्रत्यक्ष संपर्क नहीं किया है, जिसके कारण उनकी दावेदारी को लेकर संशय बना हुआ है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बार स्थानीय बनाम बाहरी और संगठनात्मक पकड़ बनाम व्यक्तिगत संपर्क जैसे समीकरणों के बीच फंसी हुई दिखाई दे रही है. पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा उम्मीदवार चुनने की है जो स्थानीय निकायों के मतदाताओं के बीच स्वीकार्य भी हो और संगठन को एकजुट भी रख सके. उधर भाजपा द्वारा लगभग उम्मीदवार तय कर लेने के बाद कांग्रेस पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है. यदि पार्टी अधिक देर तक असमंजस में रहती है, तो इसका असर चुनावी तैयारी और मतदाताओं तक पहुंचने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है.
* वासंती मंगरोले की चर्चा, लेकिन चांस कम
कांग्रेस पार्टी में कुछ हद तक पूर्व जिप सदस्या वासंती मंगरोले का नाम भी विधान परिषद के चुनाव हेतु चर्चा में है, लेकिन उनके चुनाव लड़ने को लेकर पार्टी के भीतर ही मतभेद बताए जा रहे हैं. राजनीतिक सूत्रों के अनुसार उनके परिवार के व्यावसायिक संबंध राजस्थान और दिल्ली तक फैले हुए हैं तथा भाजपा नेताओं के साथ भी निकटता की चर्चा है. यही कारण है कि कांग्रेस के कुछ नेता उनकी उम्मीदवारी को लेकर सहज नजर नहीं आ रहे हैं. बता दें कि पूर्व जिप सदस्या वासंती मंगरोले के बेटे द्बारा राजस्थान व दिल्ली में अपना कारोबार किया जाता है और कारोबार के चलते उनके राजस्थान व दिल्ली के भाजपा नेताओं के साथ काफी नजदीकी संबंध भी है. जिसे देखते हुए इस बात की संभावना काफी हद तक कम है कि वासंती मंगरोले द्बारा भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ विधान परिषद का चुनाव लडा जाए.





