कुंभमेले के लिए 35 हजार करोड, अस्पतालों के लिए पैसा नहीं
कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता विजय वडेट्टीवार का कथन

* डफरीन अग्निकांड पर सरकार को जमकर घेरा
* वेंटिलेटर, फायर ऑडिट व ठेका व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
* सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने 8 दिन का दिया अल्टिमेटम
* अन्यथा जिलाधीश कार्यालय में ठिया आंदोलन करने की चेतावनी
* भस्मिसात एनआयसीयू का निरीक्षण कर पत्रवार्ता को किया संबोधित
अमरावती/दि.26 – अमरावती के जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग (एनआयसीयू) में लगी भीषण आग में तीन नवजातों की मौत के बाद आज कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार अमरावती पहुंचकर ने अस्पताल का दौरा कर घटनास्थल का जायजा लिया. इसके बाद विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला. कांग्रेस नेता व विधायक विजय वडेट्टीवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी केवल किसी एक कर्मचारी या अधिकारी पर डालकर मामला खत्म नहीं किया जा सकता. स्वास्थ्य विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग और संबंधित उपकरण उपलब्ध कराने वाली कंपनी सहित सभी जिम्मेदार पक्षों की जांच होनी चाहिए. उन्होंने सरकार को आठ दिन की समयसीमा देते हुए चेतावनी दी कि इस अवधि में जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस जिलाधिकारी के कक्ष में धरना देगी. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने की भी मांग की.
डफरीन अग्निकांड की जानकारी मिलते ही अमरावती के दौरे पर पहुंचे कांग्रेस के विधानमंडल दल नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि जिला महिला अस्पताल के एनआयसीयू में हुई घटना अत्यंत गंभीर है. अस्पताल में नवजात बच्चे उपचार के लिए भर्ती थे और उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की थी. ऐसे में आग लगने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी थी, उपकरणों की नियमित जांच हुई थी या नहीं और आपात स्थिति में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था कितनी सक्षम थी, इन सभी सवालों के जवाब जांच में सामने आने चाहिए. उन्होंने कहा कि घटना के कारणों की जांच केवल वेंटिलेटर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. स्वास्थ्य विभाग से लेकर पीडब्ल्यूडी, विद्युत विभाग और उपकरण आपूर्ति करने वाली कंपनी तक की भूमिका की जांच होनी चाहिए. इस निरीक्षण दौरे व पत्रकार परिषद में विधायक विजय वडेट्टीवार के साथ पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनिल देशमुख, पूर्व विधायक प्रा. वीरेंद्र जगताप, कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख, मनपा के नेता प्रतिपक्ष व पूर्व महापौर विलास इंगोले, स्वीकृत पार्षद व पूर्व महापौर मिलींद चिमोटे, पार्षद संजय शिरभाते, कांग्रेस के प्रदेश सचिव किशोर बोरकर, महिला शहराध्यक्ष जयश्री वानखडे, पूर्व महिला शहराध्यक्ष अंजली ठाकरे तथा सुरेश रतावा, संकेत कुलट व अनिकेत ढेंगले सहित कांग्रेस, युवक कांग्रेस व एनएसयूआय के पदाधिकारी उपस्थित थे.
डफरीन अस्पताल की इमारत में चौथी मंजिल पर स्थित एनआयसीयू के पूरी तरह से जलकर खाक कक्ष का निरीक्षण करने के बाद सरकारी विश्रामगृह में बुलाई गई पत्रकार परिषद में कांग्रेस नेता व विधायक विजय वडेट्टीवार ने अस्पताल में इस्तेमाल किए जा रहे वेंटिलेटरों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि अस्पताल में उपलब्ध कुछ वेंटिलेटर ‘चाइना मेड’ हैं और राज्यभर में ऐसे बड़ी संख्या में उपकरण इस्तेमाल किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि उपकरणों की गुणवत्ता पर संदेह है तो उनकी तत्काल तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए. दोषपूर्ण उपकरण पाए जाने पर उन्हें हटाकर उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण लगाए जाएं. हालांकि, वेंटिलेटर की खराबी को आग का अंतिम कारण मानना अभी जांच का विषय है. प्रशासन की प्रारंभिक जानकारी में वेंटिलेटर से आग शुरू होने की आशंका जताई गई है, जबकि आधिकारिक जांच अभी जारी है.
* ‘मृत बच्चों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये दें’
विधायक विजय वडेट्टीवार ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले तीनों नवजातों के परिवारों के लिए प्रत्येक को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की. उन्होंने कहा कि बच्चों को खो चुके परिवारों का दर्द किसी आर्थिक सहायता से कम नहीं हो सकता, लेकिन सरकार को कम से कम उनके भविष्य के लिए ठोस आर्थिक मदद उपलब्ध करानी चाहिए. उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि दुर्घटना के दौरान बच्चों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाली अस्पताल की कंत्राटी परिचारिकाओं को विशेष पुरस्कार दिया जाए.
* 8 हजार रुपये के मानधन पर काम कर रही परिचारिकाओं से क्या उम्मीद?
विधायक वडेट्टीवार ने अस्पताल के ठेका नियुक्त कर्मचारियों की स्थिति को भी पत्रकार परिषद में प्रमुखता से उठाया. उनका कहना था कि कुछ कंत्राटी कर्मचारियों को बेहद कम मानधन पर काम करना पड़ रहा है. उन्होंने सवाल किया कि इतनी संवेदनशील जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों को यदि पर्याप्त वेतन और सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो उनसे किस तरह की व्यवस्था की अपेक्षा की जा सकती है? उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार कंपनी को कर्मचारियों के नाम पर सरकार से अधिक राशि मिलती है, जबकि कर्मचारियों को कम भुगतान किया जाता है. इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरी व्यवस्था की जांच की मांग करने की बात कही. यह आरोप वडेट्टीवार द्वारा लगाए गए हैं; इसकी स्वतंत्र सरकारी पुष्टि अभी सामने नहीं आई है.
* फायर ऑडिट और सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूरी
विधायक वडेट्टीवार ने कहा कि अमरावती की घटना को केवल स्थानीय हादसा मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए. राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में फायर ऑडिट, विद्युत सुरक्षा, ऑक्सीजन व्यवस्था, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और चिकित्सा उपकरणों का नियमित निरीक्षण अनिवार्य रूप से होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्पताल का फायर ऑडिट या सुरक्षा निरीक्षण लंबित है तो उसे तुरंत पूरा किया जाए. हादसा होने के बाद जांच कराने के बजाय दुर्घटना से पहले ही कमियों को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है.
* सरकार को आठ दिन में जवाब देना होगा
विधायक वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार जांच समितियां गठित करके अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती. उन्होंने मांग की कि आठ दिन के भीतर जांच पूरी कर यह स्पष्ट किया जाए कि आग कैसे लगी, सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई, उपकरणों की देखभाल किसकी जिम्मेदारी थी और किन अधिकारियों अथवा संस्थाओं ने अपने कर्तव्य में लापरवाही की. उन्होंने चेतावनी दी कि आठ दिन में दोषियों की जिम्मेदारी तय नहीं हुई तो कांग्रेस जिलाधिकारी कार्यालय में ठिय्या आंदोलन करेगी. उन्होंने कहा कि मृत बच्चों के परिवारों को न्याय और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को ठोस कार्रवाई करनी होगी.
* इतनी बड़ी घटना के बाद पालकमंत्री कहां हैं?
विधायक वडेट्टीवार ने अमरावती के पालकमंत्री और स्थानीय सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर दुर्घटना के बाद जिले के पालकमंत्री को घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलना और अस्पताल की व्यवस्था का जायजा लेना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के जनप्रतिनिधि घटना की गंभीरता के अनुरूप संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं. वडेट्टीवार ने कहा कि अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत केवल एक प्रशासनिक घटना नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है.
* कुंभमेले के लिए हजारों करोड़, अस्पतालों के लिए पैसा क्यों नहीं?
पत्रकार परिषद में विधायक वडेट्टीवार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के बजट को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कुंभमेले के लिए लगभग 35 हजार करोड़ रुपये के खर्च का संदर्भ देते हुए पूछा कि यदि इतने बड़े आयोजन के लिए हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध हो सकते हैं, तो अस्पतालों, स्कूलों, डॉक्टरों, शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त धन क्यों नहीं उपलब्ध कराया जा रहा? उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को धार्मिक आयोजन से आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता में अस्पताल, स्कूल, पेयजल, शौचालय और नागरिकों की मूलभूत सुविधाएं भी होनी चाहिए.
* 2022 की घटना से सरकार ने क्या सीखा?
विधायक वडेट्टीवार ने पुराने अस्पताल हादसों का संदर्भ देते हुए सरकार से जवाब मांगा. उनका कहना था कि पहले भी अस्पतालों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं और जांच समितियां गठित की गई थीं. इसके बावजूद यदि आज फिर नवजातों की जान जा रही है तो यह बताता है कि पिछली जांचों और उनकी सिफारिशों पर कितनी गंभीरता से अमल हुआ. उन्होंने कहा कि केवल समिति गठित करना पर्याप्त नहीं है. जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए और उसमें दी गई सिफारिशों पर अमल भी होना चाहिए.
* जांच में विपक्ष के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग
विधायक वडेट्टीवार ने जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विपक्ष के दो प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग भी की. उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष और विश्वसनीय होनी चाहिए ताकि किसी भी अधिकारी, ठेकेदार या संबंधित संस्था को राजनीतिक अथवा प्रशासनिक दबाव में संरक्षण न मिले.





