दोषियों को बचाने नहीं, सजा देने की जरूरत
डफरीन अग्निकांड पर कांग्रेस का हमला, गुड्डू हमीद ने उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई

* जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर और मृत नवजातों के परिजनों को तत्काल मुआवजे की भी मांग
अमरावती/दि.26– डफरीन अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में हुए भीषण अग्निकांड और तीन नवजात बच्चों की दर्दनाक मौत को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होती जा रही हैं. अमरावती शहर कांग्रेस कमेटी ब्लॉक क्रमांक-1 के अध्यक्ष गुड्डू हमीद ने इस घटना को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि केवल जांच समिति गठित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई भी की जानी चाहिए.
गुड्डू हमीद ने कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह, जहां जीवन बचाने का काम होता है, वहां नवजात शिशुओं की मौत होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है. इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवारों को बल्कि पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. उन्होंने कहा कि जिन माता-पिता ने अपने नवजात बच्चों को इलाज और सुरक्षा की उम्मीद के साथ अस्पताल में भर्ती कराया था, उन्हें अपने बच्चों की मौत की खबर मिली. यह किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहद पीड़ादायक स्थिति है. हादसे के पीछे जो भी कारण हों, उनकी निष्पक्ष और गहन जांच कर पूरी सच्चाई सार्वजनिक की जाए. उन्होंने कहा कि जांच केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि घटना के लिए कौन जिम्मेदार है और किस स्तर पर चूक हुई.
गुड्डू हमीद ने कहा कि, अस्पताल प्रशासन, तकनीकी विभाग, सुरक्षा व्यवस्था, उपकरणों के रखरखाव और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक जिम्मेदारों की पहचान हो सके. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी. ऐसे मामलों में आपराधिक जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए. दोषियों को निलंबित करने के साथ-साथ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति मरीजों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही करने का साहस न कर सके. गुड्डू हमीद ने राज्य सरकार से मांग की कि हादसे में जान गंवाने वाले नवजात बच्चों के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए.





