सप्तशृंगी गढ़ पर 22 किलो चांदी का अपहार!

जिलाधिकारी द्वारा जांच के निर्देश

* मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर ही संदेह
नाशिक/दि.23 – महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक सप्तशृंगी गढ़ स्थित श्री सप्तशृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट के कामकाज में 22 किलो चांदी की कमी पाए जाने से बड़ी खलबली मच गई है, और इस चांदी अपहार प्रकरण की नासिक विभागीय आयुक्त कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय ने गंभीर दखल लेते हुए अब सखोल जांच के आदेश दिए हैं.
सामाजिक कार्यकर्ता विठोबा लच्छिराम द्वारा सबूतों के साथ की गई शिकायत के अनुसार, मंदिर में नक्काशी के लिए पुरानी रिकॉर्ड में 406 किलो चांदी का उल्लेख था, जबकि वास्तविक माप में केवल 383 किलो 703 ग्राम चांदी उपलब्ध पाई गई, जिससे कुल 22 किलो 490 ग्राम चांदी के अपहार का खुलासा हुआ है.
ट्रस्ट के प्रबंधक सुदर्शन दहातोंडे ने जांच समिति के समक्ष दी गई जानकारी में बताया कि चांदी निकालते समय नियमानुसार पंचनामा करना, अधिकृत वजन करना या सीलबंद करना-इनमें से कोई भी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. प्रबंधक के इस चौंकाने वाले खुलासे से यह मामला केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि एक जानबूझकर किया गया नियोजित अपहार होने का संदेह और भी गहरा हो गया है.
इस प्रकरण के खिलाफ स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता छगन जाधव, पूर्व सरपंच बेबी जाधव ने विधिज्ञ सुरेंद्र सोनवणे के मार्गदर्शन में जनवरी 2026 से आंदोलन शुरू किया था. लगातार प्रयासों के बावजूद शुरुआत में प्रशासन से उचित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी. लेकिन राज्य सूचना आयोग के नासिक खंडपीठ में शिकायत के बाद प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हुआ और जांच को गति मिली है.
इस गंभीर मामले में ट्रस्ट के अध्यक्ष, विश्वस्त और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर फौजदारी मामले दर्ज करने तथा गायब चांदी की राशि ब्याज सहित वसूल करने की मांग शिकायतकर्ताओं ने की है. साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक सप्तशृंगी गढ़ पर इस भ्रष्टाचार से श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश फैल गया है और सभी की नजर अब अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है.

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