अमरावती में 6,500 जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र अटके

90 दिन बाद मिलेगी राहत

* डिजिटल रिकॉर्ड की कमी और डीएचओ की एक आईडी बनी बाधा
* पुराने प्रमाणपत्रों के लिए नागरिकों को लगाने पड़ रहे कार्यालयों के चक्कर
अमरावती/दि.16 – जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नागरिकों को इन दिनों भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. डिजिटल व्यवस्था की तकनीकी खामियों, पुराने रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और दस्तावेजों के सत्यापन की लंबी प्रक्रिया के कारण अमरावती नगर निगम में करीब 6,500 जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र लंबित हैं. प्रशासन के अनुसार, इन आवेदनों का निपटारा करने में कम से कम 90 दिन लग सकते हैं. ऐसे में नागरिकों को अपने जरूरी दस्तावेज हासिल करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
सर्वर डाउन होना, पोर्टल समय पर नहीं खुलना, रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होना, आवेदन में गलत जानकारी और पहचान संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन जैसी समस्याओं से प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. विशेष रूप से वर्ष 2016 से पहले के जन्म और मृत्यु के मामलों में परेशानी अधिक है, क्योंकि उस समय के कई रिकॉर्ड अब भी ऑफलाइन रजिस्टरों में दर्ज हैं.
* 2016 से पहले के प्रमाणपत्रों के लिए तीन से चार महीने का इंतजार
पुराने रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को ‘ऐड ओल्ड इवेंट’ कहा जाता है. ऐसे मामलों में संबंधित रिकॉर्ड की तलाश करने के बाद मनपा, अस्पताल और कब्रिस्तान के रजिस्टरों में दर्ज जानकारी का सत्यापन करना पड़ता है. आवेदक को पहचान पत्र, शपथपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करना होता है. इसके बाद प्रमाणपत्र जारी करने के लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारी की मंजूरी आवश्यक होती है. बताया जा रहा है कि पुराने प्रमाणपत्र जारी करने के लिए डीएचओ के पास केवल एक आईडी उपलब्ध है. डीएचओ को पूरे जिले के मामलों की मंजूरी देनी होती है. ऐसे में सीमित समय के कारण अमरावती नगर निगम क्षेत्र के आवेदनों को मंजूरी मिलने में देरी हो रही है.
* चार चरणों की प्रक्रिया से बढ़ रही परेशानी
जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए पुराने रिकॉर्ड की तलाश, संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन, आवश्यक कागजातों के साथ आवेदन और डीएचओ से मंजूरी जैसे चरण पूरे करने पड़ते हैं. ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से कर्मचारियों को पुराने ऑफलाइन रजिस्टर खंगालने पड़ते हैं. एक ओर आवेदनों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सत्यापन और मंजूरी की प्रक्रिया में समय लग रहा है. परिणामस्वरूप, नागरिकों को प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.
* पहले रोजाना 60, अब 150 प्रमाणपत्र जारी करने का दावा
मनपा के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विशाल काले के मुताबिक वर्ष-2016 से पहले के प्रमाणपत्र जारी करने में सबसे अधिक समय लगता है. पुराने रिकॉर्ड की जांच और मंजूरी के लिए सीमित आईडी उपलब्ध होने के कारण प्रक्रिया धीमी रहती है. आवेदकों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों का बोझ भी बढ़ा है. उन्होंने बताया कि पुराने प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया को गति देने के लिए व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं. मनपा क्षेत्र में प्रतिदिन अधिक से अधिक पुराने प्रमाणपत्र जारी करने पर जोर दिया जा रहा है.
* अतिरिक्त आईडी मिलने पर तेज हो सकती है प्रक्रिया
मनपा प्रशासन पुराने रिकॉर्ड की तलाश और सत्यापन के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था कर रहा है. साथ ही, प्रमाणपत्र जारी करने के लिए दो से पांच अतिरिक्त अधिकृत आईडी प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है. यदि अतिरिक्त आईडी उपलब्ध होती हैं, तो पुराने आवेदनों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है. फिलहाल, 6,500 लंबित प्रमाणपत्रों का आंकड़ा नागरिकों की परेशानी को उजागर करता है. पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने, मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाने और पर्याप्त अधिकृत आईडी उपलब्ध कराने से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है.

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