चिखलदरा में पशुओं के चारे-पानी की चिंता
दुर्गम पहाडी क्षेत्र में पशुसंवर्धन विभाग ने शुरू की तैयारी

* 50 हजार से अधिक गाय-भैंस और 27 हजार से ज्यादा बकरियों के पालन की जिम्मेदारी
* 18 पशु चिकित्सालयों के भरोसे पूरा तहसील क्षेत्र, कई पद रिक्त
चिखलदरा/दि.17 – जिले के सबसे बड़े तहसील क्षेत्रों में शामिल चिखलदरा में संभावित सूखे और चारे-पानी की समस्या को देखते हुए पशुसंवर्धन विभाग ने पशुधन के संरक्षण की तैयारी शुरू कर दी है. चिखलदरा तहसील के लगभग 140 गांवों तक पहुंचने के लिए जंगलों से गुजरने वाले रास्तों और दुर्गम कच्ची सड़कों का सहारा लेना पड़ता है. ऐसे भौगोलिक हालात में पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल की जिम्मेदारी निभाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है. वहीं, कार्यालय में कई पद रिक्त होने से उपलब्ध कर्मचारियों पर काम का दबाव भी बढ़ रहा है.
बता दे कि, चिखलदरा तहसील में गवली और आदिवासी समाज के अनेक परिवारों की आजीविका पशुपालन तथा दुग्ध व्यवसाय पर निर्भर है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, तहसील में लगभग 32,621 गाय, 16,150 भैंस और 27,636 बकरियां हैं. इतने बड़े पशुधन के लिए चारे और पानी की व्यवस्था करना सूखे जैसी परिस्थितियों में पशुपालकों के साथ प्रशासन के सामने भी गंभीर चुनौती बन सकता है.
* चारे के बीज पर शत-प्रतिशत अनुदान
पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से तहसील पशुसंवर्धन अधिकारी कार्यालय ने विभिन्न उपाय शुरू किए हैं. जिन पशुपालकों के पास खेती की जमीन और पानी की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें मक्का अथवा बाजरा के बीज खरीदने के लिए चार हजार रुपये तक की सहायता शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराई जा रही है. इसके माध्यम से पशुपालकों को अपने खेतों में चारा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके अलावा बांधों और तालाबों की गाद से बनी जमीन पर चारा बोने की पहल भी की जा रही है. चारे की बर्बादी रोकने के लिए कड़बा कुट्टी मशीन पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है. वहीं, पशुओं के लिए लंबे समय तक चारा सुरक्षित रखने में उपयोगी मुरघास तैयार करने के लिए भी 50 प्रतिशत अनुदान की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
* गांवों में शिविर, पशुपालकों को प्रशिक्षण
पशुओं के स्वास्थ्य की जांच और चारे से संबंधित योजनाओं की जानकारी देने के लिए विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तहसील के विभिन्न हिस्सों में शिविर आयोजित कर रहे हैं. चिखलदरा, चिखली, सेमाडोह, रहू, काटकुंभ, बदनापुर, ढाकना, टेंभुरसोंडा, तेलखार, गुल्लरघाट, रायपुर, गोलखेड़ा बाजार, अंबापाटी, सलोना, तारूबांदा, हतरू और चुन्नी सहित विभिन्न क्षेत्रों के पशु चिकित्सालयों के माध्यम से पशुपालकों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है. इन शिविरों में चारा साक्षरता अभियान के अंतर्गत सूखे चारे के उचित उपयोग, मुरघास तैयार करने तथा कम खर्च में हाइड्रोपोनिक्स पद्धति से चारा उगाने की जानकारी दी जा रही है. विभाग का उद्देश्य है कि पशुपालक उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आगामी कठिन मौसम में पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कर सकें.
* 18 पशु चिकित्सालयों पर बड़ी जिम्मेदारी
चिखलदरा तहसील में तहसील पशुसंवर्धन अधिकारी प्रवीण चेड़े के मार्गदर्शन में 18 पशु चिकित्सालयों के माध्यम से पशुओं के उपचार और देखभाल का काम किया जाता है. दुर्गम भौगोलिक स्थिति, गांवों के बीच अधिक दूरी और बड़ी संख्या में पशुधन होने के कारण विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कार्यालय में कई पद रिक्त होने से पशुओं के स्वास्थ्य और पशुपालकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी और कठिन हो गई है.
तहसील पशुसंवर्धन अधिकारी प्रवीण चेड़े ने पशुपालकों से चारे के बीज, कुट्टी मशीन, मुरघास निर्माण तथा अन्य उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेने के लिए संबंधित पशु चिकित्सालय या विभागीय केंद्र से संपर्क करने का आह्वान किया है.





