अब स्वीकृत पार्षद व ‘स्टैंडींग’ के लिए इच्छुकों की जमकर मोर्चाबंदी

अमरावती/दि.20 – अमरावती महानगर पालिका में भाजपा के नेतृत्ववाली युति की सत्ता स्थापित होने का चित्र लगभग स्पष्ट हो गया है. ऐसे में वोटों के थोडे से अंतर से पराजित हुए पार्टी प्रत्याशियों ने अब जैसे-तैसे मनपा के सदन में पहुंचने हेतु पार्टी के नेताओं के पास खुद को स्वीकृत नगरसेवक बनाए जाने हेतु जबरदस्त ढंग से मोर्चाबंदी करनी शुरु कर दी है. वहीं दूसरी ओर मनपा के चुनाव में विजयी रहे नवनिर्वाचित पार्षदों ने अब अपना नंबर स्थायी समिति में लगने हेतु प्रयास करने शुरु कर दिए है. जिसके लिए नवनिर्वाचित पार्षदों द्वारा अपने नेताओं से मिलकर खुद के लिए जमकर लॉबिंग व फिल्डींग लगाई जा रही है. ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि, स्वीकृत नगरसेवक तथा स्थायी समिति सदस्य पदों के लिए किन-किन लोगों की लॉटरी लगती है.
बता दें कि, 87 सदस्यीय अमरावती महानगर पालिका में अलग-अलग पार्टियों के संख्याबल अनुसार स्वीकृत नगरसेवकों को नामनिर्देशित किया जाना है. वहीं राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने कुल संख्या अनुपात में 10 फीसद के हिसाब से स्वीकृत सदस्यों का चयन करने से संबंधित निर्देश व सूचना जारी किए है. ऐसे में अब मनपा में राजनीतिक दलों के गटों की रचना कैसे होती है, इस पर ही स्वीकृत सदस्य संख्या के चयन का समीकरण निर्भर करेगा. इस समय महानगर पालिका के चुनाव पश्चात पैदा हुई राजनीतिक परिस्थिति के अनुसार पहली विशेष आमसभा में महापौर व उपमहापौर जैसे पदों पर निर्वाचन व नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी. जिसके बाद दूसरी आमसभा में स्वीकृत नगरसेवकों के चयन का मामला सुलझाया जाएगा, ऐसे संकेत फिलहाल दिखाई दे रहे है.
बता दें कि, अमरावती महानगर पालिका की 87 सीटों हेतु कराए गए चुनाव में भाजपा के 25, कांग्रेस के 15, युवा स्वाभिमान पार्टी के 15, एमआईएम के 12, राकांपा (अजीत पवार) के 11, शिवसेना (शिंदे) के 3, बसपा के 3, शिवसेना (उबाठा) के 2 एवं वंचित बहुजन आघाडी के 1 नगरसेवक चुने गए है. ऐसे में सभी पार्टियों द्वारा पक्षीय बलाबल की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने अधिक से अधिक स्वीकृत नगरसेवक चुनकर लाने के प्रयास में जुटे हुए है.
* ऐसे तय होती है स्वीकृत सदस्य संख्या
राज्य सरकार ने वर्ष 2023 के आदेश में बदलाव किया है और अब कुल सदस्य संख्या के अनुपात में 10 फीसद स्वीकृत सदस्य चुने जाने का प्रावधान किया गया है. जिसके चलते 87 सदस्यीय अमरावती महानगर पालिका में स्वीकृत पार्षदों का प्रतिशत 8.7 यानि पूर्णांक के तौर पर 9 तय रहेगा. ऐसे में अब गटों की स्थापना कैसे होती है और कौनसी पार्टी किस गट के साथ जाती है, इस पर काफी कुछ निर्भर करेगा.
* बागीयों व पराजितों का होगा पुनर्वसन
अमरावती मनपा के चुनाव में लगभग सभी राजनीतिक दलों में जमकर बगावत हुई थी. जिसका सर्वाधिक शिकार भाजपा को होना पडा था और उस समय कई नाराजों व असंतुष्टों को स्वीकृत नगरसेवक पद का आश्वासन देते हुए बगावत को रोकने का प्रयास भी किया गया था. चूंकि अब अमरावती मनपा में भाजपा ही सबसे बडी पार्टी के तौर पर उभरकर सामने आई है. जिसके चलते भाजपा नेताओं के कहने पर अपनी बगावत को परे रखकर भाजपा प्रत्याशियों का प्रचार करनेवाले पार्टी कार्यकर्ताओं को स्वीकृत नगरसेवक के तौर पर मौका मिलता है अथवा नहीं, इस बात की ओर सभी का ध्यान लगा हुआ है. इसके अलावा भाजपा के कई प्रबल दावेदारों को इस बार वोटों के बेहद मामूली फर्क की वजह से हार का सामना करना पडा है. जो अब अपने राजनीतिक पुनर्वसन के लिए खुद को स्वीकृत पार्षद बनाए जाने हेतु पार्टी की ओर बेहद उम्मीदभरी नजरों से देख रहे है. वहीं दूसरी ओर युवक कांग्रेस ने अब तक बडनेरा विधानसभा क्षेत्र को स्वीकृत पार्षद पद पर मौका नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस पार्टी से मांग की है कि, कांग्रेस पार्टी द्वारा अपने कोटे के तहत बडनेरा विधानसभा क्षेत्र से वास्ता रखनेवाले किसी कांग्रेस पदाधिकारी को स्वीकृत पार्षद के तौर पर मौका दें.
* स्थायी पर टिकी अनेकों की निगाहें
– महानगर पालिका में स्थायी समिति ही सबसे महत्वपूर्ण समिति होती है. क्योंकि इस समिति में ही आर्थिक बातों से संबंधित सभी निर्णय लिए जाते है और एक तरह से महानगर पालिका का पूरा कामकाज स्थायी समिति द्वारा ही चलाया जाता है. जिसके चलते स्थायी समिति का हिस्सा रहनेवाले पार्षदों का महानगर पालिका में अच्छा-खासा बोलबाला रहता है.
– अमरावती मनपा में स्थायी समिति की सदस्य संख्या 16 है. जिसके चलते पक्षीय बलाबल का विचार करते हुए ही स्थायी समिति के लिए अलग-अलग पार्टियों द्वारा अपने सदस्यों का चयन किया जाता है. ऐसे में इस बार चुने गए पार्षदों में से कई ने अभी से ही स्थायी समिति में जाने हेतु मोर्चाबंदी करनी शुरु कर दी है.
– इसके साथ ही स्थायी समिति का सभापति पद किस पार्टी के हिस्से में जाता है, यह मनपा में सत्ता स्थापित करने जा रही पार्टियों के बीच पदों को लेकर बंटवारे की बातचीत तय होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा.
* पराजितो को स्वीकृत पार्षद नहीं बनाने की भी उठ रही मांग
महानगर पालिका के चुनाव में कई दिग्गजों को पराजय का सामना करना पडा. जिनमें भाजपा प्रत्याशियों की संख्या सबसे अधिक है. साथ ही साथ कांग्रेस एवं राकांपा (अजीत पवार) के भी कई दिग्गज प्रत्याशी चुनाव हार गए है. जिसमें से कुछ ने पिछले दरवाजे से मनपा के सदन में पहुंचने हेतु खुद को स्वीकृत सदस्य बनाए जाने के लिए प्रयास करना भी शुरु कर दिया है. इस बात को ध्यान में रखते हुए भाजपा एवं कांग्रेस के पदाधिकारियों के बीच से ही यह मांग उठ रही है कि, चुनाव में पराजित हुए प्रत्याशियों को उनके प्रभागों की जनता ने साफ तौर पर नकार दिया. ऐसे में उन पराजित प्रत्याशियों की बजाए जनस्वीकार्यता रहनेवाले पार्टी पदाधिकारियों एवं शहर के गणमान्यों को स्वीकृत पार्षद के तौर पर काम करने का मौका प्रदान किया जाए.