‘वर्क प्लेस’ पर महिलाएं कितनी सुरक्षित, सभी कार्यालयों का होगा ‘पॉश ऑडिट’

राज्य महिला आयोग ने जारी किया निर्देश, एक माह में सभी कार्यालयों को देनी होगी रिपोर्ट

मुंबई /दि.12 – मुंबई राज्य में कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने राज्यभर के सभी सरकारी, अर्धसरकारी और निजी कार्यालयों में 30 दिनों के भीतर ‘पॉश’ ऑडिट कराने के निर्देश जारी किए हैं. इस संबंध में आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने सभी जिलाधिकारियों और विभागीय आयुक्तों को कड़े निर्देश दिए हैं. यह ऑडिट यह जांचने के लिए किया जाएगा कि कार्यालयों में कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 (झेडक -लीं) का पालन सही तरीके से हो रहा है या नहीं.
हर कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति अनिवार्य
कानून के अनुसार सभी सरकारी विभागों, स्थानीय स्वराज संस्थाओं, महामंडलों, स्वायत्त संस्थाओं और निजी कंपनियों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है. इसके अलावा जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति भी कार्यरत रहना आवश्यक है. राज्य महिला आयोग के अनुसार कई कार्यालयों में जांच के दौरान गंभीर खामियां सामने आई हैं. कुछ संस्थानों में समिति का गठन ही नहीं किया गया है, जबकि कुछ जगहों पर समिति केवल कागजों तक सीमित है और सक्रिय रूप से काम नहीं कर रही. कई मामलों में समिति सदस्यों को प्रशिक्षण नहीं दिया गया, वार्षिक रिपोर्ट जमा नहीं की गई और कार्यालयों में जानकारी से जुड़े सूचना फलक भी नहीं लगाए गए.
* ‘पॉश’ ऑडिट रिपोर्ट में ये जानकारी देनी होगी
‘पॉश’ ऑडिट के दौरान प्रत्येक कार्यालय को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जिसमें समिति के गठन का आदेश, समिति की संरचना, प्राप्त और लंबित शिकायतें, शिकायतों पर की गई कार्रवाई, वार्षिक रिपोर्ट, जागरूकता कार्यक्रम, कार्यालय में लगाए गए सूचना फलक जैसी जानकारी शामिल होगी.
* 30 दिनों में रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य
सभी जिलाधिकारियों और विभागीय आयुक्तों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में यह ऑडिट पूरा कर 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग को भेजें. रूपाली चाकणकर ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यस्थलों पर काम कर रही हैं. ऐसे में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण मिले. यदि किसी संस्था में ‘पॉश’ के तहत शिकायत समिति नहीं पाई गई तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

* क्या है ‘पॉश’ कानून?
प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हर्रासमेंट (पीओएसएच) यानि ‘पॉश’ कानून के तहत किसी भी तरह की लैंगिक प्रताडना को अपराध निरुपित किया गया है. इस कानून का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके कार्य स्थल पर सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें लैंगिग प्रताडना का शिकार होने पर न्याय दिलाना भी है. उल्लेखनीय है कि, इन दिनों आईटी सेक्टर, बैंकिंग, शिक्षा संस्थाओं व सरकारी कार्यालयों में कार्यरत रहनेवाली महिलाओं का शोषण होने से संबंधित शिकायतों में अच्छी-खासी वृद्धि हो गई है. जिसे देखते हुए राज्य महिला आयोग द्वारा अब इससे निपटने हेतु बेहद कडे कदम उठाए जा रहे है.

Back to top button