मनरेगा की 6.15 करोड रुपए मजदूरी बकाया

100 दिनों का नियम, अधूरी निधि के कारण मजदूरों में रोश

अमरावती/दि.16- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम कर 100 दिन बीत गए, फिर भी जिले में 6 करोड 15 लाख रुपए की मजदूरी शासन के पास बकाया हैं. मार्च के अंत में शासन से अधूरी निधि प्राप्त होने से कुछ मजदूरों को राहत मिली हैं. लेकिन 100 दिन बितने के बावजूद अपने अधिकार की मजदूरी से वंचित हैं. इसके अलावा घरकुल लाभार्थियों को भी मजदूरी की निधि न मिलने से उनके काम ठप पडे हैं.
मनरेगा के तहत प्रत्येक मजदूरो को काम देने का आश्वासन शासन की तरफ से दिया जाता हैं. लेकिन काम करने के बावजूद उन्हें मजदूरी तत्काल नहीं दी जाती. चिखलदरा और धारणी में काफी काम किए गए हैं, फिर भी मजदूरो की करोडो रुपए मजदूरी अभी भी प्रलंबित हैं. इस कारण 15 दिनों में मजदूरी देने का नियम किसलिए? ऐसा सवाल अब उपस्थित किया जा रहा है. 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए जिले की विविध तहसीलों में बडी संख्या में काम किए गए. इसके लिए जिले की कुल 62 करोड 34 हजार 73 रुपए निधि अपेक्षित हैं. इसमें मजदूरी और साहित्य खर्च का समावेश हैं. ऐसे में शासन की तरफ से 53 करोड रूपए की निधि मार्च एडिंग में मिली, लेकिन वह अधूरी हैं. 100 दिन बितने के बावजूद हजारों मजदूर मजदूरी की प्रतिक्षा में हैं. करीबन 6 करोड 15 लाख 63 हजार 691 रुपए शासन के पास बकाया हैं. इसमें चिखलदरा तहसील में सर्वाधिक 2 करोड 81 लाख 52 हजार 944 रुपए की निधि शासन से अपेक्षित हैं. पश्चात धारणी तहसील के 62 लाख 96 हजार 469, चांदूर रेलवे 60 लाख 20 हजार 441 रुपए, नांदगांव खंडेश्वर 42 लाख 69 हजार 333 रुपए, अमरावती 35 लाख 88 हजार 601 रुपए, अचलपुर 34 लाख 30 हजार 332, वरूड 23 लाख 89 हजार 881, दर्यापुर 22 लाख 14 हजार 96 रुपए तथा भातकुली तहसील में 19 लाख 24 हजार 473 रुपए की मजदूरी बकाया हैं. इसके अलावा जिले में कुशल व तकनीकी सहायक मानधन की रकम शासन से लेना बाकी हैं. जिसमें अकुशल कामगारों को मजदूरी के अभाव में मानसिक परेशानी सहन करनी पड रही हैं.

* घरकुल का काम ठप
पीएम आवास व अन्य योजना में काम करनेवाले मजदूरों की 28 हजार 500 रुपए की मजदूरी बकाया हैं. लेकिन यह मजदूरी समय पर न मिलने से जिले में सैंकडो घरकुल के काम अधूरे रूके दिखाई देते हैं. इस कारण घरकुल के लाभार्थियोंं को तत्काल मजदूरी की निधि देने की मांग जोर पकडने लगी हैं.

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