सीएम ने ली उच्चस्तरीय बैठक, कडे नियोजन के निर्देश

इस साल महाराष्ट्र पर बारिश का सबसे बड़ा संकट

* 4 माह तक निर्माणकार्य रोके जाने की संभावना
* खेती-बाडी को सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध करवाने की सूचना
* अगले साल भी चारा संकट न हो, इसकी सावधानी बरतें
मुंबई /दि.20- महाराष्ट्र पर इस बार पानी संकट गहराने का आशंका बढ गई है. मौसम विभाग ने अलनीनो के प्रभाव से मानसून की बारिश कम होने की आशंका जता देने के बाद आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रदेश के अपने सहयोगी कृषि मंत्री और राज्य मंत्री के साथ महत्वपूर्ण बैठक लेकर पानी के संभावित संकट के मद्देनजर कडे नियोजन के निर्देश दिये हैं. जिसमें खेती किसानी को सिंचाई के लिए भरपुर पानी उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न बांधों से अभी से संभलकर नियोजन करने कहा गया है. सीएम की बैठक में अगले वर्ष 2027 तक के हालात को ध्यान में रखकर नियोजन करने और उसका कडाई से अनुपालन करने कहा गया है. एक खबर के अनुसार 4 महीने तक सभी प्रकार के निर्माण कार्य रोके जाने के भी संकेत दिये गये है.
राज्य के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी देखने को मिल रही है. विदर्भ और मराठवाड़ा में तापमान काफी बढ़ गया है. कई जिलों में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है. वहीं कुछ जगहों पर अगले 48 घंटों में बारिश की चेतावनी भी दी गई है. मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार कुछ इलाकों में बारिश भी दर्ज की गई है. इस बीच अब अप्रैल खत्म होने को है, जल्द ही मई शुरू होगा और जून में मानसून देश के साथ राज्य में प्रवेश कर सकता है.
* सीएम की बैठक में कृषि और वित्त मंत्री
इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक बुलाई थी. इस बैठक में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे और राज्य के वित्त राज्यमंत्री आशीष जयसवाल भी मौजूद थे. साथ ही मौसम विभाग, कृषि सहायता एवं पुनर्वसन विभाग, वित्त विभाग, जल संसाधन और जल संरक्षण विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे. इस साल बारिश पर अल नीनो का प्रभाव रहने की संभावना है, जिसका सबसे ज्यादा असर अगस्त और सितंबर महीने में पड़ सकता है. इस साल मानसून में औसत से कम बारिश का अनुमान है. मई में गर्मी की तीव्रता कम हो सकती है, लेकिन हीटवेव अधिक होंगी. हालांकि यदि पॉजिटिव आईओडी विकसित होता है तो प्रभाव की तीव्रता कम हो सकती है, ऐसी जानकारी मौसम विभाग ने दी है. बैठक में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए. उन्होंने कहा कि 2015 में बारिश के बाद जलसंग्रह 45 प्रतिशत था, लेकिन इस बार बारिश आने से पहले ही इतना पानी उपलब्ध है. इसलिए स्थिति का मजबूती से सामना किया जा सकता है.
* पानी बचाने और हर जिले में टीम
जलयुक्त शिवार और गालमुक्त धरण-गालयुक्त शिवार जैसी योजनाओं के काम तुरंत और बड़े स्तर पर पूरे किए जाएं. इसके लिए वित्त विभाग तुरंत निधि उपलब्ध कराए. मरम्मत और पुनरुद्धार के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए. उन्होंने कहा कि 2015 के बाद हमने काफी कुछ सीखा है. कम बारिश में भी सिंचाई संभव करने वाले साधन तैयार किए गए हैं. कम बारिश को देखते हुए अगले गर्मी के मौसम की तैयारी अभी से करनी होगी. चारा संकट न हो इसका ध्यान रखा जाए, क्योंकि अन्य राज्यों में भी ऐसी स्थिति हो सकती है. पानी बचाने और अन्य संबंधित उपायों के लिए हर जिले में टीम बनाई जाए, ऐसा भी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया.
* देश और राज्य की चिंता बढ़ गई
इस साल राज्य में मानसून कैसा रहेगा, इसको लेकर सभी के मन में उत्सुकता है. इसका मुख्य कारण यह है कि देश और राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहती है. मौसम विभाग की ओर से कुछ दिन पहले ही मानसून को लेकर पहला अनुमान जारी किया गया था. इस अनुमान से देश और राज्य की चिंता बढ़ गई है. कारण यह है कि इस साल बारिश पर अल नीनो का प्रभाव रहने की संभावना है. प्रशांत महासागर में अल नीनो के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, जिसका असर राज्य में बढ़ती गर्मी के रूप में देखा जा रहा है.मौसम विभाग के अनुसार यदि इस साल बारिश पर अल नीनो का प्रभाव रहा तो राज्य में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है. पिछले साल भारी बारिश हुई थी, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था. वहीं इस साल यदि बारिश कम होती है तो किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है.

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