70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात

महाराष्ट्र में 1 करोड़ हस्ताक्षर जुटाएंगे, कांग्रेस का महिला विरोधी चेहरा उजागर करेंगे

* सीएम देवेंद्र फडणवीस का कांग्रेस और सहयोगी दलों पर तीखा हमला
* मामला महिला आरक्षण बिल गिरने का
मुंबई/दि.20 – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर विरोधियों पर जोरदार हमला बोला. विरोधियों ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करके देश की 70 करोड़ महिलाओं का विश्वासघात किया. उन्होंने इस विधेयक की भ्रूणहत्या की. इससे भी बुरा यह है कि इस हत्या के बाद उन्होंने जश्न मनाकर भारत के समाज सुधारकों के विचारों पर एक तरह से तांडव किया, ऐसा उन्होंने कहा. महिलाओं को संगठित करने के साथ-साथ राज्य से 1 करोड़ महिलाओं के हस्ताक्षर जुटाएंगे, जनजागरण करेंगे. हमने एक सभा बुलाई है, जिसमें अपने सहयोगी दलों को आमंत्रित करेंगे. महिलाओं को आरक्षण मिलने तक हम शांत नहीं बैठेंगे, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 17 अप्रैल का दिन देश की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण दिन साबित होगा, ऐसी अपेक्षा थी. एक निर्णायक क्षण होगा, ऐसा लगा था. क्योंकि उस दिन महिला आरक्षण का विधेयक पारित होने वाला था. सभी लोग उसका समर्थन करेंगे, ऐसा विश्वास भी था. लेकिन दुर्भाग्य से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड मुनेत्र कजगम, शिवसेना उबाठा, राकांपा शरद पवार, समाजवादी पार्टी आदि विपक्षी दलों ने अपनी महिला-विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन करते हुए इस विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने दिया. 70 करोड़ महिलाओं का विश्वासघात करते हुए इस विधेयक की भ्रूणहत्या विपक्ष ने की. इससे भी बुरा यह कि ऐसी हत्या के बाद जो जश्न उन्होंने मनाया, वह भारत के समाज सुधारकों के विचारों पर किया गया तांडव था.
* महात्मा फुले के विचारों को तिलांजलि
मुख्यमंत्री ने कहा, मुझे अत्यंत दुख है कि महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती वर्ष के दौरान विरोधियों ने उनके विचारों को तिलांजलि देने का काम किया. भाषणों में महात्मा फुले का नाम लेने वाले ये दल पूरी तरह बेनकाब हो गए. सदन में 3 विधेयक प्रस्तुत किए गए थे-134वां संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्रशासित प्रदेश विधेयक. आपको ज्ञात होगा कि 1976 में देश में डिलिमिटेशन हुआ था, तब संविधान संशोधन कर 1971 की जनसंख्या को आधार मानते हुए 2000 तक डिलिमिटेशन न करने का निर्णय लिया गया था.
इस संदर्भ में 2002 में डिलिमिटेशन आयोग बना, तब महाराष्ट्र सहित दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय न हो, इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे 20 वर्षों की और अवधि दी. इसके बाद 2002 में 1971 की जनसंख्या के आधार पर ही राज्यों में डिलिमिटेशन किया गया. इससे देश की कुल सीटों में कोई बदलाव नहीं हुआ. लेकिन 2023 में महिला आरक्षण के लिए संविधान संशोधन हुआ, तब जनगणना और डिलिमिटेशन दोनों प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही यह लागू होगा, ऐसा प्रावधान किया गया. इसका मतलब यह कि हाल ही में जो विधेयक आए, वे अचानक नहीं थे, बल्कि 2023 के संशोधन के अनुसार ही थे. तब ऐसा लगा था कि जनगणना पूरी हो जाएगी, लेकिन कोविड के कारण यह प्रक्रिया 2027 तक जाएगी. पिछले अनुभव के अनुसार 2002 में शुरू हुई डिलिमिटेशन प्रक्रिया 2008 में पूरी हुई थी. इसलिए यदि 2027 में डिलिमिटेशन शुरू होता, तो महिला आरक्षण 2029 तक लागू नहीं हो पाता. इसलिए सरकार ने 2023 के निर्णय के अनुरूप समय से पहले प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए यह विधेयक लाया, ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा.
* 1 करोड़ महिलाओं के हस्ताक्षर जुटाए जाएंगे
यदि महिलाओं के अधिकारों की भ्रूणहत्या होती है, तो लोकतंत्र में जनमत का दबाव बनाया जाएगा. जिस दिन इन दलों को लगेगा कि वे महिलाओं का सामना नहीं कर सकते, उस दिन ये दल रास्ते पर आ जाएंगे और महिला आरक्षण को मंजूरी देंगे. इसके लिए महायुति के सभी घटक दल जनमत तैयार करेंगे. महिलाओं को संगठित किया जाएगा. इस विधेयक के समर्थन में महाराष्ट्र की 1 करोड़ महिलाओं के हस्ताक्षर जुटाए जाएंगे. साथ ही तहसील स्तर तक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
भाजपा ने इस संबंध में एक बैठक बुलाई है. उसमें सहयोगियों को आमंत्रित किया जाएगा. सभी दल महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाकर महाराष्ट्र में कांग्रेस, शरद पवार और उबाठा का चेहरा उजागर करेंगे. ऐसा जनदबाव बनेगा कि उन्हें महिला आरक्षण विधेयक पारित करना ही पड़ेगा. जब तक महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलता, तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे, ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा.
* कांग्रेस के आरोपों का जवाब
कांग्रेस ने दावा किया है कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका है और सरकार अब केवल तकनीकी संशोधन कर रही है. इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह बहुत ही बचकाना सवाल है. उन्होंने कहा, 2023 के विधेयक में 2021 की जनगणना को आधार माना गया था, जो पूरी नहीं हो सकी. यदि यह 2028 में पूरी होती, तो 2029 में लागू नहीं हो पाती. इसलिए 2011 की जनगणना के आधार पर इसे लागू करने का निर्णय लिया गया. यदि विपक्ष ने किसी अन्य मुद्दे पर यह विधेयक रोका होता, तो हम मान लेते. लेकिन महिलाओं के अधिकार रोकने का काम बेहद निंदनीय है, ऐसा उन्होंने कहा.
* ऐसा होगा प्लान
उन्होंने आगे कहा, देशभर में और महाराष्ट्र में अब महिलाओं का एकजुटीकरण किया जाएगा. इस तरह से महिलाओं के अधिकारों की भ्रूणहत्या हो रही है. लोकतंत्र में महिलाओं का दबाव जिस दिन ऐसा बनेगा कि वे जवाब नहीं दे पाएंगे, उसी दिन वे महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी देंगे. महायुति के सभी दल इस पर जनमत तैयार करने का काम करेंगे. इस बिल के समर्थन में महाराष्ट्र की 1 करोड़ महिलाओं के हस्ताक्षर जुटाए जाएंगे. इसके साथ ही तहसील स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. भारतीय जनता पार्टी ने इस विषय पर एक बैठक बुलाई है, जिसमें सहयोगियों को आमंत्रित किया जाएगा.
* अब हम शांत नहीं बैठेंगे
सभी दल महिलाओं में जागरूकता फैलाकर महाराष्ट्र में कांग्रेस, शरद पवार की राष्ट्रवादी और उबाठा का असली चेहरा उजागर करेंगे. निश्चित रूप से ऐसा जनदबाव बनाया जाएगा कि उन्हें महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी देनी पड़े. जब तक महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक हम अब शांत नहीं बैठेंगे, उन्होंने अपनी दृढ़ भूमिका भी व्यक्त की.

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