स्वच्छता समिति की रिपोर्ट आमसभा में पेश व मंजूर
आधी मंजूरी पर सफाई ठेके पर आमसभा ने भी जताई हैरत

* अब सभी सदस्यों की रिपोर्ट पर ली जाएगी राय, सभी के सुझाव किए जाएंगे शामिल
* सर्वपक्षीय सुझावों के साथ तय की जाएगी आगे की रणनीति, आयुक्त ने किया आश्वस्त
अमरावती/दि.20 – अमरावती शहर में व्याप्त कचरे व गंदगी की समस्या तथा मनपा की ओर से साफ-सफाई हेतु बेहद आनन-फानन में जारी किए गए एकल व संयुक्त ठेके की प्रक्रिया के साथ ही कोणार्क कंपनी को दिए गए ठेके जैसी तमाम बातों का अध्ययन करने हेतु 28 फरवरी की विशेष सभा में गठित स्वच्छता समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और समिति की सिफारिशें विगत शुक्रवार 17 अप्रैल को ही मनपा प्रशासन के सुपूर्द कर दिया गया था, जिसे मनपा प्रशासन आज सोमवार 20 अप्रैल को हुई आमसभा में सभी के समक्ष रखा गया और समिति की रिपोर्ट पर सर्वदलित पार्षदों द्वारा चर्चा की गई. जिसके उपरांत मनपा प्रशासन ने स्वच्छता समिति की सिफारिशों व रिपोर्ट को मंजूरी प्रदान करते हुए स्वीकार भी किया. साथ ही सर्वदलिय पार्षदों से इस रिपोर्ट पर राय एवं सुझाव आमंत्रित करते हुए कहा कि, सभी पार्षदों के सुझावों पर विचार-विमर्श के बाद मनपा द्वारा सफाई ठेके के बारे में आगे की रणनीति तय की जाएगी. यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, सफाई ठेके को स्थायी समिति की केवल आधी मंजूरी प्राप्त रहने की जानकारी सामने आते ही मनपा के लगभग सभी पार्षदों ने सफाई ठेके की वैधता एवं पात्रता पर सवालिया निशान भी उपस्थित किए. इस विषय को लेकर बेहद गहमा-गहमी वाले वातावरण के बीच हुई चर्चा में सभी सदस्यों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए महापौर श्रीचंद तेजवानी तथा मनपा आयुक्त वर्षा लढ्ढा ने यह ‘रुलिंग’ दी कि, इस रिपोर्ट पर मनपा के सभी सदस्यों से राय एवं सुझाव लिए जाएंगे. जिनके आधार पर आगे क्या करना है यह तय किया जाएगा.
बता दें कि, विगत कई दिनों से शहर में कचरे और गंदगी की समस्या को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर पूरे शहर की साफ-सफाई हेतु अमरावती मनपा द्वारा कोणार्क कंपनी को दिया गया एकल व संयुक्त ठेका भी विवादों में घिरा हुआ है. इसी बीच विगत 28 फरवरी को अमरावती शहर व मनपा के इतिहास में पहली बार केवल साफ-सफाई के मुद्दे पर चर्चा करने हेतु विशेष आमसभा बुलाई गई थी और करीब 9 घंटे तक चली विशेष सभा के बाद महापौर श्रीचंद तेजवानी एवं मनपा की तत्कालीन आयुक्त सौम्या शर्मा ने अभ्यास गट के तौर पर स्वच्छता समिति का गठन किया था. जिसके अध्यक्ष के तौर पर मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे की नियुक्ति की गई थी. साथ ही इस समिति में मनपा के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले, स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर, गटनेता ज्ञानेश्वर उर्फ नाना आमले, शेख हमीद शेख वाहिद, डॉ. राजेंद्र तायडे, स्वीकृत पार्षद एड. प्रशांत देशपांडे, मिलिंद चिमोटे, अनिल अग्रवाल, भोजराज काले एवं पार्षद संजय नरवणे, बबलू शेखावत, प्रशांत वानखडे, दिनेश बूब, मंगेश मनोहरे, अजय जयस्वाल, नजीब खान, नूतन भुजाडे व सुरेखा लुंगारे का बतौर सदस्य समावेश किया गया था. जिसके उपरांत स्वच्छता समिति की जारी माह में ही 6 अप्रैल, 13 अप्रैल व 17 अप्रैल को तीन बैठकें हुई थी और तीनों बैठकों में साफ-सफाई से संबंधित तमाम पहलुओं का अध्ययन करते हुए स्वच्छता समिति ने विगत 17 अप्रैल को हुई बैठक के बाद अपनी सिफारिशों सहित अपनी रिपोर्ट मनपा प्रशासन के सुपूर्द कर दी थी. जिसमें 26 तरह की सिफारिशें करने के साथ ही काम में लापरवाही व कोताही के लिए सफाई ठेकेदार पर लगाए जानेवाले 25 तरह के दंड को लेकर सुझाव भी दिया गया था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि, समिति ने अपनी रिपोर्ट में कोणार्क कंपनी को दिए गए सफाई ठेके की कानूनी वैधता पर ही सवाल खडा कर दिया था. जिसे लेकर समिति का यह कहना रहा कि, साफ-सफाई का एकल व संयुक्त ठेका दो हिस्सों में दिया गया था. जिसमें से केवल एक ही हिस्से को स्थायी समिति की मंजूरी मिली थी. वहीं दूसरे हिस्से को स्थायी समिति की मंजूरी प्राप्त नहीं है. जिसके चलते सफाई ठेके की कानूनी वैधता ही सवालों के घेरे में है. वहीं इस जानकारी सामने आते ही मनपा पार्षदों ने आधी मंजूरी के साथ कोणार्क कंपनी को सफाई ठेका दिए जाने पर आश्चर्य एवं हैैरत जताई.
बता दें कि, स्वच्छता समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ‘टेंडर’ और ‘एग्रीमेंट’ के दस्तावेजों में जानबूझकर अंतर रखा गया. इस अंतर के चलते ठेकेदार को करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप है. समिति ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए प्रशासन की भूमिका की जांच की आवश्यकता जताई है. इसके अलावा समिति ने अपनी रिपोर्ट में कानूनी पहलुओं पर भी कई खामियां उजागर की हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेका प्रक्रिया में नियमों का पालन ठीक से नहीं किया गया और दंड के प्रावधान भी बेहद कमजोर रखे गए, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है. समिति ने अपनी सिफारिशों में ठेका प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने, सख्त दंडात्मक प्रावधान लागू करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मनपा के सर्वदलिय पार्षदों ने आज मनपा प्रशासन को जमकर घेरने का प्रयास किया और कोणार्क कंपनी को मनमाने ढंग से दिए गए सफाई ठेके को लेकर जबरदस्त सवाल-जवाब भी किए.
* क्यों गरमाया हुआ है सफाई ठेके का मामला?
बता दें कि, विगत दिसंबर माह में मनपा प्रशासन द्वारा पूरे शहर की साफ-सफाई करने तथा कचरा संकलित करते हुए उसे कंपोस्ट डिपो तक पहुंचाने के काम हेतु एकल पद्धति से संयुक्त ठेका देने हेतु करीब 365 करोड रुपयों के काम की निविदा प्रकाशित की थी. जिसके लिए कोणार्क कंपनी की ओर से आए प्रस्ताव को मान्य करते हुए कोणार्क कंपनी को जनवरी माह के दौरान सफाई ठेका दिया गया था. परंतु अमरावती शहर के पूरे 22 प्रभागों की साफ-सफाई का ठेका हासिल करनेवाली कोणार्क कंपनी द्वारा अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया जा रहा है. जिसके चलते कोणार्क कंपनी को प्रशासक राज के दौरान बेहद हडबडी में दिए गए सफाई ठेके को लेकर उठनेवाले सवालिया निशान और भी बडे होते चले गए. यही वजह रही कि, अरावती महानगर पालिका का नया सदन अस्तित्व में आते ही साफ-सफाई के मुद्दे पर चर्चा करने हेतु विगत 28 फरवरी को मनपा की विशेष सभा बुलाई गई थी और ऐसा मनपा के इतिहास में पहली बार हुआ था कि, साफ-सफाई जैसे मनपा के मूलभूत काम पर चर्चा करने के लिए विशेष सभा बुलाई गई हो. उसी विशेष सभा में सर्वसम्मती के साथ इस पूरे मामले का अध्ययन करने तथा सुझाव सिफारिशें देने हेतु अभ्यास गट के तौर पर मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे की अध्यक्षता के तहत स्वच्छता समिति का गठन किया गया था.
* क्या है स्वच्छता समिति की रिपोर्ट?
स्वच्छता समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि, मनपा की ओर से प्रकाशित निविदा सूचना में उल्लेखित शर्तों तथा मनपा द्वारा कोणार्क कंपनी के साथ किए गए ठेका करार की शर्तों में काफी अधिक फर्क है तथा यह विसंगती जानबुझकर रखी गई है, ताकि ठेकेदार कंपनी को इसका फायदा मिल सके. स्वच्छता समिति ने इस बात की ओर विशेष ध्यान दिलाया कि, सफाई ठेके को लेकर प्रकाशित निविदा सूचना में स्पष्ट उल्लेख था कि, ठेकेदार कंपनी द्वारा अप्रैल 2025 के बाद बने नए वाहनों की उपलब्धता करानी होगी. जिसके चलते नए कोरे वाहन खरीदने में समर्थ व सक्षम नहीं रहनेवाले कई इच्छुक ठेकेदारों ने इस निविदा प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं लिया. जबकि कोणार्क के साथ ठेका करार करते समय मनपा प्रशासन ने इस शर्त को बदल दिया तथा अप्रैल 2023 के बाद बने वाहनों के प्रयोग को मंजूरी दे दी. जिसके चलते कोणार्क कंपनी द्वारा 2-3 साल पुराने वाहनों को कचरा संकलन के काम में लगाया गया. इसके साथ ही समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि, जोननिहाय ठेके की तुलना में संयुक्त व एकल ठेके की लागत 11 करोड रुपयों से अधिक है. परंतु इस सफाई ठेके में फवारणी व धुवारणी के कामों का समावेश नहीं किया गया है, यानि फवारणी व धुवारणी पर मनपा को अलग से पैसा खर्च करना पडेगा. यदि उस खर्च को भी जोडा जाए, तो शहर में साफ-सफाई का काम पहले की तुलना में काफी अधिक महंगा सौदा साबित हो रहा है. लेकिन हैरत की बात है कि, इतना ज्यादा पैसा खर्च करने के बावजूद शहर में ढंग के साफ-सफाई ही नहीं हो रही और कोणार्क कंपनी द्वारा सही तरीके से काम भी नहीं किया जा रहा. जिसके लिए कोणार्क कंपनी पर लगाए जानेवाले दंड का प्रावधान भी बेहद अत्यल्प है, यानि कोणार्क कंपनी पर लगाई जानेवाली पेनॉल्टी बेहद कम है. जिससे कोणार्क कंपनी को कोई विशेष आर्थिक फर्क भी नहीं पडता. ऐसे में बेहद जरुरी है कि, कोणार्क कंपनी पर लगाई जानेवाली पेनॉल्टी की राशि को बढाया जाए. इसके लिए भी समिति द्वारा मनपा प्रशासन को 25 सुझाव दिए गए है.
स्वच्छता समिति द्वारा अपने अध्ययन में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया गया है कि, अमरावती मनपा क्षेत्र में साफ-सफाई के लिए एकल व संयुक्त ठेका दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ द्वारा 7 अक्तूबर 2025 को करते हुए मनपा के पक्ष में आदेश जारी किया गया था और खास बात यह भी है कि, ठीक उसी दिन मनपा प्रशासन द्वारा एकल व संयुक्त पद्धति से सफाई ठेका देने हेतु निविदा जारी की गई थी, यानि प्रशासन द्वारा सोची-समझी रणनीति अथवा साजिश के तहत सफाई ठेके को लेकर काम किया जा रहा था और कोणार्क कंपनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से निविदा सूचना एवं ठेका करार के नियमों व शर्तों में जानबुझकर विसंगतियां छोडी गई. जिसका कोणार्क कंपनी द्वारा भरपूर फायदा उठाया जा रहा है और इसका खामियाजा कचरे व गंदगी की समस्या के तौर पर अमरावती शहर के आम नागरिकों को उठाना पड रहा है. जिसके लिए पूरी तरह से सफाई ठेकेदार सहित मनपा प्रशासन जिम्मेदार है.
समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह निष्कर्ष भी निकाला है कि, प्रशासक राज के दौरान काफी हद तक मनमाने व जल्दबाजी वाले तरीके से काम किया गया. जिसके चलते मौजूदा ठेका करार में कुछ नए नियमों व शर्तों का समावेश किया जाना बेहद जरुरी है. जिसे लेकर स्वच्छता समिति ने मनुष्यबल एवं कचरा संकलन हेतु प्रयुक्त होनेवाले वाहनों सहित साफ-सफाई के कामों को लेकर कई सुझाव एवं सिफारिशों पर विचार-विमर्श किया है. स्वच्छता समिति के मुताबिक प्रत्येक प्रभाग के अनुसार आवश्यक मनुष्यबल निश्चित कर जरुरी स्थानों पर अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त किए जाने चाहिए. प्रभागनिहाय शिकायत निवारण केंद्र शुरु करते हुए नागरिकों के लिए हेल्पलाइन एवं मोबाइल एप आधारित शिकायत निवारण प्रणाली को कार्यान्वित किया जाना चाहिए. शहर में नियमित फवारणी व धुवारणी करने के साथ ही लेंडेन पावडर की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए. साथ ही सभी सब्जी बाजार, सार्वजनिक शौचालय व मैदान के लिए स्वतंत्र स्वच्छता योजना चलाई जानी चाहिए. इन सभी कामों हेतु नियुक्त अधिकारियों सहित ठेकेदार पर नियमित मॉनिटरिंग रखते हुए उनके काम के अनुसार देयक अदा किए जाने चाहिए. इन सभी सुझावों एवं सिफारिशों पर आज 20 अप्रैल को हुई आमसभा में सभी पार्षदों के सामने रखा गया और समिति की ओर से उपस्थित किए गए प्रत्येक मुद्दे पर जबरदस्त हंगामा भी मचा. विशेषकर विपक्षी पार्षदों ने इस रिपोर्ट के आधार पर मनपा प्रशासन को जमकर आडे हाथ लिया.
* 26 सिफारिशों के साथ 25 तरह के नए दंड सुझाए हैं रिपोर्ट में
स्वच्छता समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि, ठेका करार में जिन शर्तों का समावेश किया गया है, वे सभी शर्तें ठेकेदार के लिहाज से ही फायदेमंद है तथा ठेका करार में अमरावती मनपा एवं शहर के नागरिकों के हितों की अनदेखी की गई है. जिसके चलते अब अमरावती मनपा सहित शहरवासियों के फायदे को देखते हुए इस ठेका करार की शर्तों में संशोधन किया जाना चाहिए. इस बात के मद्देनजर समिति ने मनपा प्रशासन को ठेका करार में शामिल करने हेतु 26 नई शर्तें भी सुझाई है. साथ ही सफाई ठेकेदार द्वारा काम में की जानेवाली अलग-अलग तरह की कोताही व लापरवाही को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कोताही व लापरवाही के लिए स्वच्छता समिति ने 25 तरह के दंड प्रावधानों को लेकर सुझाव दिया है.





