रालेगांव मिसिंग केस मुख्यमंत्री ने की समीक्षा
आदिवासी लड़कियों का कथित लापता मामला

यवतमाल/ दि. 22- रालेगांव तालुका की 34 आदिवासी लड़कियों के कथित लापता होने के मामले ने राज्य भर में हलचल मचा दी है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं इसकी समीक्षा की है. इस बीच, जांच में अब तक कुछ भी ठोस सामने न आने पर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि यह नाहक नफरत फैलाने के लिए भाजपा की एक नाकाम साजिश है.
’लव जिहाद’ या कुछ और ?
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक संदेह के आधार पर दो लोगों पर मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से एक पर ’बाल विवाह प्रतिबंधक अधिनियम’ के तहत कार्रवाई की गई है. इस मामले के मुख्य संदिग्ध मजहर कुरैशी को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की पूरी समीक्षा की है. आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उइके ने कहा, यह ’लव जिहाद’ है या कुछ और, इस पर टिप्पणी करना अभी उचित नहीं होगा. पुलिस जांच के बाद ही सब कुछ स्पष्ट होगा. लड़कियों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है. जांच में जो कुछ भी सामने आएगा, उसके अनुसार दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
मानव तस्करी की संभावना नहीं
इस मामले की अब तक की जांच में मानव तस्करी का कोई सबूत नहीं मिला है. जिला पुलिस अधीक्षक कुमार चिंता ने बताया, अभी तक कोई भी शिकायत लेकर आगे नहीं आया है. जिन्होंने आरोप लगाए, उन्होंने भी कोई सबूत, लड़कियों के नाम या उनकी पहचान स्पष्ट नहीं की है. हमारी जांच जारी है.
’वे’ लड़कियां हिंदू हैं
34 लड़कियों के लापता होने का मामला उजागर करने का दावा करने वाले भाजपा जिला अध्यक्ष एडवोकेट प्रफुल्ल चौहान ने मंगलवार को यवतमाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने दावा किया कि जो लड़कियां लापता होने के संदेह में हैं, वे सिर्फ आदिवासी नहीं बल्कि ’हिंदू’ हैं. उन्होंने कहा कि उनका यह कहना नहीं था कि घटना केवल रालेगांव तालुका तक सीमित है, बल्कि यह लड़कियां रालेगांव और आसपास के आदिवासी बहुल इलाकों से लापता हुई हैं. उन्होंने कहा कि एक और ’ऑडियो क्लिप’ पुलिस को सौंपी गई है. उन्होंने मांग की है कि पुलिस इस मामले के पीछे किसी बड़े रैकेट की संभावना की जांच करे.
नफरत फैलाने की भाजपा की साजिश नाकाम!
राज्य के पूर्व आदिवासी विकास मंत्री और कांग्रेस नेता वसंत पुरके ने इस मामले पर सरकार की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा, जिनकी खुद की सरकार है, अगर वे ही शिकायत कर रहे हैं, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने गृह मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए. उन्होंने तीखा सवाल किया, भाजपा चुनाव को जितनी गंभीरता से लड़ती है, उतनी गंभीरता से इन लापता लड़कियों की तलाश क्यों नहीं की जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जांच में अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और कोई पीड़ित सामने नहीं आया है, इसलिए यह रालेगांव जैसे शांत शहर में माहौल बिगाड़ने के लिए किया गया एक राजनीतिक षडयंत्र है.
इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी लड़कियों के लापता होने का दावा करना, उसमें लव जिहाद और मानव तस्करी का संदेह जताना और जांच में कुछ भी हाथ न लगना-यह भाजपा की हिंदू-मुस्लिम नफरत फैलाने की साजिश थी जो अब नाकाम हो गई है, ऐसी आलोचना पूर्व मंत्री पुरके ने की है.





