कचरे व सफाई को लेकर मनपा की आमसभा में जबरदस्त घमासान
‘कोणार्क’ को तीन माह का बिल नही देंगे

* महापौर श्रीचंद तेजवानी ने सुनाया फैसला
* राकांपा पार्षद मंगेश मनोहरे ने उठाया था विषय
* स्थायी सभापति अविनाश मार्डीकर ने किया विषय का अनुमोदन
* एमआईएम पार्षद नजीब खान व सैय्यद राशीद अली भी जमकर हुए संतप्त
* काम में कोताही को लेकर हुई जमकर गहमा-गहमी, पार्षदों का फूटा गुस्सा
अमरावती/दि.23 – पिछली बार की तरह आज बुलाई गई मनपा की आमसभा में एक बार फिर कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को लेकर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला. शहर में बदहाल सफाई व्यवस्था और कचरा उठाव में हो रही लापरवाही पर पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा, जिससे सदन का माहौल काफी देर तक गर्म रहा. तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बीच आखिरकार महापौर श्रीचंद तेजवानी ने बड़ा फैसला लेते हुए संबंधित ठेका कंपनी ‘कोणार्क’ का तीन माह का बिल रोकने की घोषणा की.
बता दें कि, विगत जनवरी माह में हुए मनपा के आम चुनाव से पहले ही प्रशासक राज के दौरान मनपा प्रशासन द्वारा साफ-सफाई के एकल व संयुक्त ठेके की निविदा जारी की गई थी और चुनाव निपट जाने के बाद मनपा का नया सदन अस्तित्व में आने से पहले ही निविदा प्रक्रिया को पूरा करते हुए सफाई ठेका कोणार्क कंपनी को दे दिया गया था. वहीं कोणार्क कंपनी द्वारा शहर में सही तरीके से साफ-सफाई का काम भी नहीं किया जा रहा था. जिसके चलते सभी राजनीतिक दलों के नवनिर्वाचित पार्षदों में कोणार्क कंपनी को लेकर पहले से ही काफी रोष व संताप था, जो मनपा की पहली आमसभा से ही दिखाई देना शुरु हो गया था. यही वजह रही कि, मनपा के इतिहास में पहली बार विगत 28 फरवरी को केवल साफ-सफाई के मुद्दे पर ही चर्चा करने हेतु विशेष सभा बुलाई गई थी. जिसमें समस्या का अध्ययन करने और समाधान सुझाने हेतु अभ्यास गट के तौर पर स्वच्छता समिति का गठन किया गया था. पश्चात स्वच्छता समिति द्वारा विगत सप्ताह 17 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट मनपा प्रशासन को सौंपी गई. जिसके बाद विगत सोमवार 20 अप्रैल को हुई मनपा की सर्वसाधारण सभा में उस रिपोर्ट को रखा गया था. विशेष उल्लेखनीय है कि, विगत 20 अप्रैल को बुलाई गई मनपा की आमसभा में कुल 135 प्रस्तावों पर चर्चा की जानी थी. परंतु उस आमसभा का अधिकांश समय साफ-सफाई के मुद्दे को लेकर चर्चा करने में ही बीत गया. जिसके चलते 20 अप्रैल को दोपहर साढे तीन बजे के आसपास आमसभा स्थगित कर दी गई थी और उस समय प्रलंबित रहे प्रस्तावों पर चर्चा करने हेतु आज गुरुवार 23 अप्रैल को एक बार फिर मनपा की आमसभा बुलाई गई. लेकिन आज की आमसभा में भी शुरु से लेकर कचरे व गंदगी सहित साफ-सफाई के ठेके का मुद्दा ही जबरदस्त ढंग से चर्चा में छाया रहा.
मनपा मुख्यालय स्थित विश्वरत्न डॉ. बाबासाहब आंबेडकर सभागार में आज आयोजित आमसभा के दौरान शहर में व्याप्त कचरे व गंदगी की समस्या तथा साफ-सफाइ, कचरा संकलन व कचरा ढुलाई का एकल व संयुक्त ठेका हासिल रहनेवाली कोणार्क इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी द्वारा सही ढंग से काम नहीं किए जाने का मुद्दा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पार्षद मंगेश मनोहरे ने उठाया. उन्होंने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कचरे के ढेर लगे होने, समय पर कचरा उठाव नहीं होने और सफाई कार्यों में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन और ठेकेदार कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि नागरिकों को गंदगी और दुर्गंध के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
राकांपा पार्षद मंगेश मनोहरे के प्रस्ताव का स्थायी समिति के सभापति अविनाश मार्डीकर ने समर्थन करते हुए कहा कि ठेकेदार कंपनी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रही है. साथ ही ठेकेदार कंपनी द्वारा शहर के सभी प्रभागों में निर्धारित से कम सफाई कर्मी लगाए गए है और आवश्यक वाहन व यंत्र सामग्री भी पर्याप्त ढंग से उपलब्ध नहीं कराई गई है. ठेकेदार कंपनी द्वारा प्रत्येक प्रभाग में 54 सफाई कामगारों को लगाया जाना जरुरी है. साथ ही कचरा संकलन व कचरा ढुलाई के लिए 12 छोटे व बडे वाहन लगाए जाने आवश्यक है. परंतु इन मानकों का ठेकेदार एजेंसी द्वारा कोई पालन नहीं किया जा रहा. जिसके चलते शहर में सही ढंग से साफ-सफाई और कचरा ढुलाई का काम नहीं हो पा रहा. जबकि इस काम के लिए प्रति माह 40 लाख रुपयों का भुगतान कोणार्क कंपनी को अदा किया जा रहा है. ऐसे में बेहद जरुरी है कि, इस मामले को लेकर ठोस कदम उठाने के साथ ही सख्त कार्रवाई भी की जाए.
इस दौरान एमआईएम के पार्षद नजीब खान करीम खान और सैय्यद राशीद अली ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए सफाई व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि शहर के कई इलाकों में नियमित सफाई नहीं हो रही है और कचरा दिनों तक सड़कों पर पड़ा रहता है. सदन में इस मुद्दे को लेकर जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ, जिससे कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित भी रही. इस समय विपक्षी पार्षदों के साथ-साथ सत्ता पक्ष से जुडे कई पार्षदों ने भी एक स्वर में मांग उठाई कि सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. इस चर्चा में सभागृह के नेता चेतन गावंडे, नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले, युवा स्वाभिमान पार्टी के गटनेता नाना आमले, एमआईएम के गटनेता शेख हमीद शेख वहीद, कांग्रेस के स्वीकृत पार्षद मिलिंद चिमोटे, राकांपा के स्वीकृत पार्षद भोजराज काले, युवा स्वाभिमान पार्टी के स्वीकृत पार्षद संजय हिंगासपुरे, भाजपा के स्वीकृत पार्षद संजय तिरथकर सहित पार्षद बबलू शेखावत, ललिता रतावा, प्रमोद महल्ले, प्रशांत वानखडे, गौरी मेघवानी, प्रीति रेवणे, लता देशमुख, लुबना तनवीर, प्रमोद महल्ले, स्वाती कुलकर्णी, डॉ. राजेंद्र तायडे, राधा कुरिल, विद्या माटे, सुमती ढोके, संजय गव्हाले, मनीष बजाज, महेश मुलचंदानी, आसीया अंजूम वहीद खान, सैय्यद राशीद अली, मीरा कांबले, लविना हर्षे व मधुरा कहाले ने हिस्सा लिया. इन सभी पदाधिकारी व पार्षदों ने शहर में व्याप्त कचरे व गंदगी की समस्या तथा सफाई ठेकेदार द्वारा काम में की जानेवाली कोताही को लेकर अपनी बेहद संतप्त भावनाएं प्रकट की.
सदन में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महापौर श्रीचंद तेजवानी ने हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक ‘कोणार्क’ कंपनी को तीन माह का भुगतान नहीं किया जाएगा. उन्होंने प्रशासन को भी सख्त निर्देश दिए कि शहर में सफाई व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए और नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो. इस फैसले के बाद सदन में कुछ हद तक माहौल शांत हुआ, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने मनपा की कार्यप्रणाली और शहर की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. नागरिकों को अब उम्मीद है कि इस कड़े निर्णय के बाद शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा.
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* अब तक दिए गए 88 लाख के भुगतान का क्या?
यद्यपि आज की आमसभा में महापौर श्रीचंद तेजवानी ने कोणार्क कंपनी को पहले तीन माह की ठेका अवधि के लिए कोई भुगतान नहीं करने की बात कही है. परंतु अब यह सवाल उपस्थित हो रहा है कि, क्या इन तीन माह की कालावधि के दौरान कोणार्क कंपनी को वाकई कोई भुगतान नहीं किया गया है. इस संदर्भ में दैनिक ‘अमरावती मंडल’ को मिली जानकारी के मुताबिक मनपा द्वारा कोणार्क कंपनी को अब तक करीब 88 लाख रुपए का भुगतान अदा किया जा चुका है. ऐसे में अब कोणार्क को अदा की गई रकम की वसूली कैसे होगी. क्या आगे चलकर किए जानेवाले भुगतान की रकम में से अब तक अदा किए गए 88 लाख रुपए के भुगतान की कटौती की जाएगी. अब ऐसे सवालों का भी मनपा प्रशासन को जवाब देना होगा.
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* नियमित सफाई कर्मियों की कोताही व गैरहाजिरी का मुद्दा भी गूंजा
आज की आमसभा में जहां एक ओर कोणार्क कंपनी द्वारा बरती जानेवाली लापरवाही को लेकर गरमा-गर्म चर्चा हुई. वहीं दूसरी ओर मनपा की आस्थापना पर रहनेवाले सफाई कर्मियों द्वारा काम नहीं करने या काम पर अनुपस्थित रहने का मुद्दा भी जमकर गूंजा. इस समय कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि, मनपा की आस्थापना पर रहनेवाले कई सफाई कर्मी सुबह केवल 7 से 9 बजे तक ही काम पर उपस्थित होते है और सडकों के किनारे झाडू लगाकर वापिस चले जाते है. नाला कुली के पद पर पदस्थ रहनेवाले इन कामगारों द्वारा नालों एवं नालियों की सफाई का कोई काम नहीं किया जाता. जिसके चलते रिहायशी इलाकों की सर्विस गलियों और नालियों के साथ ही शहर से होकर गुजरनेवाले नालों में हर ओर कचरे व गंदगी के ढेर लगे दिखाई देते है. जिसकी ओर मनपा के स्वच्छता अधिकारी डॉ. अजय जाधव द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता. ऐसे में सबसे पहले तो स्वच्छता अधिकारी डॉ. जाधव के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. साथ ही मनपा की आस्थापना पर रहनेवाले सफाई कामगारों के लिए बायोमैट्रीक हाजिरी प्रणाली को अनिवार्य बनाते हुए शहर में रोजाना सुबह 7 से दोपहर 2 बजे तक साफ-सफाई का काम करना जरुरी किया जाना चाहिए. इस समय यह भी बताया गया कि, अमरावती मनपा की आस्थापना पर कुल 703 सफाई कर्मी है. जिसके चलते हर प्रभाग में मनपा के ही 22 से 23 सफाई कर्मी रहना चाहिए, परंतु हर प्रभाग में सुबह केवल दो घंटे के लिए 10 से 12 सफाई कर्मी ही दिखाई देते है.
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* हर प्रभाग में हो स्वच्छता कार्यालय व शिकायत निवारण केंद्र
साफ-सफाई की ही मुद्दे पर करीब तीन घंटे तक चली चर्चा के दौरान अधिकांश पार्षदों ने यह मांग भी उठाई कि, मनपा के प्रत्येक प्रभाग में स्वच्छता कार्यालय एवं शिकायत निवारण केंद्र शुरु किया जाना चाहिए, जिस पर संबंधित जोन के सहायक आयुक्त एवं ज्येष्ठ स्वास्थ्य निरीक्षक द्वारा ध्यान दिया जाना चाहिए. इसके अलावा संबंधित जोन के पार्षदों, स्वास्थ्य निरीक्षकों व सफाई कर्मियों के वॉटस्एप ग्रुप भी बनाए जाने चाहिए तथा ऐसा ही एक ग्रुप शहर स्तर पर भी बनाया जाना चाहिए. जिसके लिए मनपा प्रशासन द्वारा सिस्टीम मैनेजर अमित डेंगरे को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए.
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* मानसून से पहले सभी छोटे-बडे नालों की होगी सफाई
इसी चर्चा के दौरान कई पार्षदों ने यह मुद्दा भी उपस्थित किया कि, शहर से होकर गुजरनेवाले 16 बडे नालों तथा 36 छोटे नालों में विगत लंबे समय से साफ-सफाई नहीं हुई है, तथा अधिकांश नालों में कचरे व गंदगी के साथ-साथ गाद भरी हुई है. जिसके चलते सभी नालों का गहराईकरण कर गाद को बाहर निकाला जाए तथा नालों के किनारे ही गाद जमा करने की बजाए गाद को शहर से कहीं बाहर ले जाकर फेंका जाए. इस समय जब मनपा प्रशासन की ओर से बताया गया कि, छोटे नालों में भरी गाद को जेसीबी मशीन के जरिए निकालना संभव नहीं है, तो यह मांग उठाई गई कि, नाला कुली के तौर पर काम करनेवाले सफाई कर्मियों को ऐसे नालों में उतारकर फावडे-घमेले के जरिए गाद बाहर निकाली जाए और उस गाद को कटले के जरिए बाहर लाते हुए ट्रकों में भरकर शहर के बाहर ले जाकर डाला जाए या फिर किसानों को खाद के तौर पर दे दिया जाए. इस समय हुई चर्चा के उपरांत आमसभा के पीठासीन सभापति व महापौर श्रीचंद तेजवानी ने आदेश पारित किया कि, बारिश का आगामी सीजन शुरु होने से पहले शहर के सभी छोटे-बडे नालों की साफ-सफाई को पूरा कर लिया जाए. साथ ही मनपा की आस्थापना पर रहनेवाले सफाई कर्मियों की काम पर नियमित हाजिरी तय की जाए और सफाई ठेकेदार कोणार्क कंपनी द्वारा अपने कामकाज के तरीके को सुधारा जाए, अन्यथा संबंधितों के खिलाफ कडी कार्रवाई भी की जाएगी.
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