महापुरुषों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा महाराष्ट्र

बागेश्वर बाबा के बयान पर पार्षद डॉ. अर्चना आत्राम का हमला

अमरावती/दि.27- बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री द्वारा समर्थ रामदास स्वामी और छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में दिए गए कथित इतिहासविरोधी और भ्रामक बयान पर अमरावती महानगरपालिका की नगरसेविका डॉ. अर्चना आत्राम ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसका कड़ा विरोध किया है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की अस्मिता, स्वाभिमान और गौरवशाली परंपरा से जुड़े महापुरुषों के बारे में इस प्रकार की गैरजिम्मेदार और अपमानजनक टिप्पणी महाराष्ट्र की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी.
पार्षद डॉ. आत्राम ने कहा कि बागेश्वर बाबा का यह बयान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है, बल्कि यह महाराष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और जनभावनाओं का भी अपमान है. उन्होंने कहा कि समर्थ रामदास स्वामी और छत्रपति शिवाजी महाराज केवल ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की आत्मा, पराक्रम और प्रेरणा के प्रतीक हैं. उनके संबंध में तथ्यहीन और भ्रामक बातें करना बेहद निंदनीय है. उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर भी आपत्ति जताई कि मंच पर उपस्थित मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और संघ प्रमुख मोहन भागवत जैसे प्रमुख नेताओं ने इस बयान पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराने के बजाय मुस्कुराकर प्रतिक्रिया दी.
पार्षद डॉ. आत्राम ने कहा कि महाराष्ट्र के जिम्मेदार नागरिकों के लिए यह दृश्य अत्यंत पीड़ादायक और अस्वीकार्य है. जब महाराष्ट्र के महापुरुषों के सम्मान पर चोट पहुंचाई जा रही हो, तब मौन रहना या हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देना जनता की भावनाओं के साथ अन्याय है. यह पहली बार नहीं है जब देश के महापुरुषों के बारे में गलत जानकारी, विकृत इतिहास और अपमानजनक टिप्पणियां सामने आई हैं. इससे पहले भी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा ज्योतिराव फुले और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महापुरुषों के संबंध में कई बार गलत और भ्रामक बातें कही गई हैं. उन्होंने कहा कि यह केवल व्यक्तियों का अपमान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और देश की प्रगतिशील वैचारिक विरासत पर हमला है. परंतु महाराष्ट्र की जनता जागरूक है और अपने महापुरुषों का सही इतिहास जानती है. हम समाज के सामने सच्चा इतिहास रखते रहेंगे और झूठे प्रचार, विकृत इतिहास तथा भ्रम फैलाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगे.
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पार्षद डॉ. आत्राम ने कहा कि आज आम जनता में यह भावना गहराती जा रही है कि सरकार को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है. जनहित के मुद्दों पर जवाब देने के बजाय सरकार केवल प्रचार, दिखावा और भावनात्मक राजनीति में लगी हुई है. बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्या, महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है. उन्होंने कहा कि महापुरुषों के नाम का राजनीतिक उपयोग तो किया जाता है, लेकिन उनके विचारों और सिद्धांतों को व्यवहार में लागू करने की कोई ईमानदार कोशिश दिखाई नहीं देती. जनता सब देख रही है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी. सत्ता जनता से चलती है, जनता के बिना नहीं- यह बात किसी भी सरकार को नहीं भूलनी चाहिए.
महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर डॉ. आत्राम ने बागेश्वर बाबा के एक अन्य बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि एक ओर महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को लेकर अपमानजनक सोच सामने आती है. चार बच्चे पैदा करो और एक संघ को दो जैसे बयान महिलाओं का घोर अपमान हैं. क्या महिलाएं केवल बच्चे पैदा करने की मशीन हैं. यह सोच स्त्री के अस्तित्व, सम्मान और स्वतंत्रता को कमतर आंकने वाली है. उन्होंने कहा कि यह वही मनुवादी मानसिकता है, जो महिलाओं को केवल ‘चूल्हा और बच्चा’ तक सीमित रखना चाहती है. लेकिन आज की महिला शिक्षित है, सक्षम है, निर्णय लेने में समर्थ है और समाज निर्माण की सशक्त धुरी है. उसे केवल घर तक सीमित समझना पिछड़ी और स्त्री विरोधी सोच का परिचायक है.
पार्षद डॉ. अर्चना आत्राम के मुताबिक महापुरुषों के अपमान, इतिहास की तोड़-मरोड़ और महिलाओं के सम्मान पर आघात को महाराष्ट्र कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि महापुरुषों का सम्मान कीजिए, इतिहास का आदर कीजिए और महाराष्ट्र की भावनाओं से खिलवाड़ करना बंद कीजिए.

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