92 बच्चाेंं को मिला जीवनदान
जन्मजात हृदय रोग की सफल शल्यक्रिया

अमरावती/दि.27- हृदयरोग से पीडित कुल 92 बच्चों पर सफल शल्यक्रिया कर उन्हें नया जीवन देने में स्वास्थ्य विभाग को सफलता मिली हैं. ये सभी शल्यक्रियाएं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत निशुल्क की गई. इस योजना के माध्यम से केवल हृदय रोग ही नहीं बल्कि जन्मजात एवं अन्य गंभीर बीमारियों पर भी प्रभावी उपचार किया गया हैं. आरबीएसके केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना हैं, जिसे 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की स्वास्थ्य जांच एवं उपचार के लिए लागू किया गया हैं. इस योजना के अंतर्गत बच्चों में पाए जानेवाले चार प्रमुख प्रकार के रोगों पर विशेष ध्यान दिया जाता हैं. जिनमें जन्मजात दोष बीमारियां, पोषण की कमी तथा विकास में लंबित या दिव्यांगता शामिल हैं. आरबीएसके के तहत अंगणवाडी स्कूलो और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से बच्चों की जांच की जाती हैं. गंभीर बिमारी पाए जाने पर बच्चों को विशेष अस्पताल में संदर्भित कर निशुल्क उपचार एवं शल्यक्रिया उपलब्ध कराई जाती हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में कुल 1062 बच्चों पर आवश्यक शल्यक्रिया की गई हैं.
* जन्मजात हृदयरोग में समय पर उपचार आवश्यक
जन्मजात हृदय रोग से पीडित बच्चों में सांस लेने में तकलीफ, वजन न बढना, त्वचा पर नीलेपन का दिखाई देना तथा जल्दी थक जाना जैसे प्रमुख लक्षण दिखाई देते हैं,शुरूआत में ये लक्षण हल्के होने के कारण कई बार माता-पिता इन्हें नजर अंदाज कर देते हैं. लेकिन सही समय पर निदान होनकर नवजात अवस्था में ही जांच और उपचार किया जाए तो बच्चा पूरी तरह स्वास्थ्य जीवन जी सकता हैं.
* 7 बच्चों पर कॉक्लियर इम्लांट शल्यक्रिया
जन्मजात मूकबधिर , 0 से 2 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कॉक्लियर इम्लांट शल्यक्रिया भी निशुल्क की जाती हैं. एक वर्ष में ऐसे 7 बच्चों पर यह शल्यक्रिया की गई हैं. इससे इन बच्चों को केवल सुनने की क्षमता ही नहीं, बल्कि बोलने और सीखने की क्षमता में भी बडा सुधार होने की संभावना हैं.





