विदर्भ के शहर क्यों बने ‘अर्बन हीट आयलैंड’?

सीमेंट के रास्ते व गगनचुंबी इमारतें बढा रहे तापमान को

* आसपास के गांवों की तुलना में शहरी क्षेत्रों का तापमान 6 डिग्री से अधिक
अमरावती /दि.27- अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह के दौरान विदर्भ के शहरो ने तापमान को लेकर जिस तरह का रिकॉर्ड बनाया है, उसकी वजह से चिंता बढानेवाली स्थिति पैदा हुई है. देश के 10 से 12 सर्वाधिक गर्म शहरों की सूची में अमरावती सहित अकोला, वर्धा व नागपुर जैसे वैदर्भिय शहर सबसे उपर चल रहे है, यही स्थिति गत वर्ष भी थी. जिसे देखते हुए अब यह डर पैदा हो रहा है कि, धीरे-धीरे विदर्भ क्षेत्र के शहर ‘अर्बन हीट आयलैंड’ में तब्दील हो रहे है. इस स्थिति को देखते हुए अब इस सवाल पर गंभीरतापूर्वक विचार किए जाने की जरुरत पैदा हो गई है कि, आखिर ऐसा क्यों हो रहा है.
अमरावती की स्थिति सहित अन्य शहरों की स्थिति को लेकर विचार करने के साथ ही विशेषज्ञों से राय लेने पर पता चलता है कि, अमरावती सहित विदर्भ के सभी प्रमुख शहरों में बडे पैमाने पर सीमेंट के रास्तों और उंची-उंची इमारतों का निर्माण हो रहा है एवं हो चुका है. जिसके चलते ‘अर्बन हीट आयलैंड’ तैयार हो रहा है और इसी वजह के चलते ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में तापमान 5 से 6 डिग्री सेल्सीअस अधिक रहता है.

* विस्तार व विकास की भारी कीमत है गर्मी
ज्ञात रहे कि, इन दिनों विदर्भ क्षेत्र में अमरावती व नागपुर सहित अन्य सभी शहरों का बडी तेजी के साथ विस्तार व विकास हो रहा है. जिसके चलते शहरों के आसपास स्थित गांव एवं जंगल परिसर अब शहर में विलिन हो चुके है तथा उन स्थानों पर बडे पैमाने पर टाउनशीप विकसित हो रही है. जिसके लिए बडी-बडी इमारते बनाई जा रही है. साथ ही साथ शहर में हर ओर सीमेंट कांक्रीट की सडकों का निर्माण करते हुए फुटपाथ वाली जगह पर चेकर्स टाइल्स लगाए जा रहे है. ऐसे में सभी शहर अब सीमेंट कांक्रीट के जंगल में तब्दील होते दिखाई दे रहे है, तथा लगातार बढते सिमेंटीकरण व कांक्रीटीकरण की वजह से शहरी क्षेत्रों में तापमान लगातार बढता जा रहा है.

* क्या कहता है संशोधन?
फोनिक्स स्थित अरिझोना बर्न सेंटर द्वारा ‘अर्बन हीट आयलैंड’ पर किया गया संशोधन जुलाई 2025 में प्रकाशित किया गया था. जिसमें वाहन प्रदूषण, सडकों के सिमेंटीकरण एवं सीमेंट कांक्रीट से बनी उंची इमारतों की वजह से तापमान में किस तरह वृद्धि होती है, यह स्पष्ट किया गया था.
– इस रिपोर्ट में बताया गया था कि, अगर वातावरण में तापमान 38 डिग्री सेल्सीअस है तो सफेद कार 55 डिग्री तक एवं काले व गहरे रंग की कार 65 से 80 डिग्री सेल्सीअस तक गर्म होती है. वहीं डांबरी रास्ते 50 डिग्री तक और सीमेंट रास्ते 62 डिग्री तक गर्म होते है.
– उंची इमारतों का घनत्व अधिक रहनेवाले क्षेत्रों में सूर्य किरणों की उष्णता व रेडिएशन रुक जाते है. जिसके चलते ऐसे परिसर में तापमान सामान्य वातावरण की तुलना में 5 से 6 डिग्री अधिक रहता है.

* अमरावती सहित विदर्भ के ‘हीट ट्रैप’ बनने के प्रमुख कारण
उष्णता का शोषण व संग्रहण (थर्मल मास) – कांक्रीट की इमारतों एवं सीमेंट से बनी सडकों द्वारा दिनभर के दौरान बडे पैमाने पर उष्णता को शोसित किया जाता है. जो रात के समय धीरे-धीरे बाहर निकलती है. जिसके चलते रात के समय भी गर्मी और उमस में इजाफा होता है.
– हरित क्षेत्र एवं वाष्पोत्सर्जन में कमी – शहर में करीब 70 से 80 फीसद हिस्सा सीमेंट कांक्रीट से व्याप्त रहने के चले वृक्ष एवं वनस्पती कम हो गए है. नैसर्गिक हरित क्षेत्र द्वारा वाष्पोत्सर्जन के जरिए वातावरण को ठंडा रखा जाता है. जबकि इसके अभाव में तापमान बडी तेजी के साथ बढता है.
– ‘अर्बन कैनियन’ का प्रभाव – बेहद उंची तथा काफी पास-पास रहनेवाली इमारतें ‘अर्बन कैनियन’ को तैयार करते है. जिसके चलते गरम हवा नीचे ही अटकी रहती है, एवं वायू का प्रवाह भी कम होता है. इसके साथ ही इमारतों पर रहनेवाले कांच भी उष्णता को परावर्तित कर पूरे परिसर में गर्मी व तापमान को बढा देते है.
– अपारगम्य पृष्ठभाग – सीमेंट रास्ते तथा इमारतों की वजह से जमीन में पानी का रिसाव नहीं होता. जिसकी वजह से जमीन में नमी की कमी रहती है तथा बाष्पीकरण के जरिए होनेवाले प्राकृतिक शीतकरण में कमी आती है.
– मानवनिर्मित उष्णता – एसी व वाहनों सहित अन्य साधनों का प्रयोग बढ जाने की वजह से बाहरी तापमान में वृद्धि होती है. विशेष तौर पर एसी से बाहर निकलने वाली उष्णता वातावरण को और भी अधिक गर्म करती है.

 

 

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