बच्चू कडू का विधान परिषद में जाना तय

शिंदे गुट वाली शिवसेना से उम्मीदवारी मिलना पक्का

* आज शाम 7 बजे मुंबई में बैठक, कई मुद्दों पर होगी चर्चा
* तीन दिनों से मुंबई में ही डेरा जमाए बैठे हैं प्रहार पार्टी प्रमुख बच्चू कडू
* आज दोपहर पत्रवार्ता में अपने पास शिंदे गुट का ‘फॉर्म’ रहने का किया था दावा
अमरावती/मुंबई/दि.29 – इस समय महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव को लेकर राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और पूर्व मंत्री बच्चू कडू का विधान परिषद में जाना लगभग तय माना जा रहा है. राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना से बच्चू कडू की उम्मीदवारी लगभग पक्की हो चुकी है. आज शाम 7 बजे मुंबई में होने वाली अहम बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है.
बता दें कि, पिछले तीन दिनों से बच्चू कडू मुंबई में डेरा जमाए हुए हैं और लगातार राजनीतिक संपर्कों में सक्रिय हैं. शिंदे गुट के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी कई दौर की चर्चा हो चुकी है. माना जा रहा है कि आज शाम होने वाली बैठक में न केवल उनकी उम्मीदवारी पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, बल्कि प्रहार जनशक्ति पार्टी और शिंदे गुट के बीच भविष्य की राजनीतिक भूमिका, संगठनात्मक तालमेल और कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होगी. राजनीतिक सूत्रों की मानें तो बच्चू कडू को विधान परिषद भेजने के साथ ही शिंदे गुट उन्हें सामाजिक, दिव्यांग, किसान और मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी भूमिका देने का भरोसा दे सकता है. वहीं दूसरी ओर बच्चू कडू भी लगातार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे केवल पद के लिए किसी के साथ नहीं जाएंगे, बल्कि मुद्दों और जनहित की राजनीति ही उनकी प्राथमिकता है.
इसी क्रम में आज दोपहर आयोजित पत्रकार वार्ता में बच्चू कडू ने बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए कहा था कि विधान परिषद के लिए शिंदे गुट वाली शिवसेना की ओर से नामांकन का फॉर्म मेरी बैग में है. बच्चू कडू ने साफ कहा कि यदि उन्हें विधान परिषद भेजा जाता है, तो वे एकनाथ शिंदे के पाईक के रूप में काम करने को तैयार हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता किसान, मजदूर, दिव्यांग और आम जनता के मुद्दे ही रहेंगे. उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी. साथ ही बच्चू कडू के इस बयान के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया कि वे शिंदे गुट के प्रस्ताव को लेकर सकारात्मक हैं. हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतिम निर्णय सम्मानजनक राजनीतिक समझ और जनहित के मुद्दों पर स्पष्ट सहमति के बाद ही होगा.
सूत्रों के अनुसार, बच्चू कडू को विधान परिषद में भेजकर शिंदे गुट विदर्भ में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करना चाहता है. बच्चू कडू की ग्रामीण क्षेत्र, किसान वर्ग, दिव्यांग समाज और जनआंदोलन की राजनीति में मजबूत पकड़ को देखते हुए यह फैसला शिंदे गुट के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है. दूसरी ओर, प्रहार जनशक्ति पार्टी के लिए यह सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर नई भूमिका का मार्ग खोल सकता है.
बताया जा रहा है कि आज शाम 7 बजे मुंबई में होने वाली बैठक में बच्चू कडू, शिंदे गुट के वरिष्ठ नेताओं और कुछ रणनीतिक समन्वयकों के बीच अंतिम चर्चा होगी. इसके बाद उम्मीदवारी को लेकर औपचारिक घोषणा भी संभव मानी जा रही है. यदि सब कुछ तय रणनीति के अनुसार हुआ, तो बच्चू कडू जल्द ही शिंदे गुट की ओर से विधान परिषद के अधिकृत उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर सकते हैं. ऐसे में महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में यह एक बड़ा और निर्णायक राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है.
गौरतलब है कि पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने वर्ष 1999 में शिवसेना से अलग होकर प्रहार जनशक्ति पार्टी की स्थापना की थी. इसके बाद वे लगातार चार बार अचलपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए. वर्ष 2019 में लगातार चौथी बार विधायक चुने जाने के बाद वे तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार में मंत्री भी बने. बाद में जून 2022 में शिवसेना नेता और तत्कालीन मंत्री एकनाथ शिंदे की बगावत के दौरान बच्चू कडू ने शिंदे का साथ दिया था. हालांकि, वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में बच्चू कडू ने शिंदे से अलग राह चुनने का निर्णय लिया. 2024 के विधानसभा चुनाव में प्रहार जनशक्ति पार्टी ने 38 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसके सभी उम्मीदवार पराजित हो गए. इस चुनाव में प्रहार जनशक्ति पार्टी को कुल 1.55 प्रतिशत यानी लगभग 3.07 लाख मत प्राप्त हुए थे. ऐसे में अब बच्चू कडू की संभावित वापसी केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पुनर्स्थापना नहीं, बल्कि विदर्भ की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत मानी जा रही है.

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