बच्चों को सुख- सुविधा के साथ आध्यात्म से जोडना जरूरी

स्वामी श्रवणानंद के आशीर्वचन

* दादी परिवार द्बारा श्रीमद भागवत कथा का आयोजन
अमरावती/दि.30– समय के साथ मनुष्य की जीवनशैली में बदलाव आया है. आज मनुष्य आधुनिक सुविधा के साथ अपना जीवन यापन कर रहा है. लेकिन हम अपने बच्चों को अध्यात्म से दूरी बनाने की सलाह दे रहे हैं. हमें अपने बच्चों को सुख सुविधा प्रदान करने के साथ अध्यात्म से जोडने की कोशिश करनी चाहिए. यह बातें स्वामी अखंडानंद सरस्वती महाराज के कृपापात्र शिष्य सरस्वती महाराज वृंदावन धाम निवासी स्वामी श्रवणानंद ने कही.
स्थानीय रायली प्लॉट स्थित सतीधाम मंदिर में शनिवार 25 अप्रैल से दादी परिवार द्बारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा की प्रस्तुति दी जा रही है. मंगलवार 28 अप्रैल को कथा के चौथे दिन स्वामी अखंडानंद सरस्वती महाराज के कृपापात्र शिष्य सरस्वती महाराज वृंदावन धाम निवासी स्वामी श्रवणानंद ने कहा कि भगवत गीता में जीवन का सार छिपा है. यह कहना आसान है. लेकिन उस सार को समझना भी जरूरी है. हम बच्चों को इन बातों का ज्ञान देने का प्रयास नहीं करते. केवल उनकी सुख सुविधाओं का ध्यान रखते हैं. हमें बच्चों को शिक्षा के साथ आध्यात्मिक शिक्षा भी प्रदान करनी चाहिए. ताकि उन्हें भी जीवन के हर पहलुओं की ओर देखने का नजरिया प्राप्त हो. हर दिन अगर हम कम से कम 5 मिनट संकीर्तन करें, 10 मिनट तक कथा वाचन करें तो बच्चों को भी उसके प्रति जिज्ञासा निर्माण होगी. कम से कम 40 दिनों तक इस प्रकार का प्रयोग करेंगे तो अंतर अपने आप ही नजर आयेगा. स्वामी श्रवणानंद ने कहा कि बच्चों को केवल पैसा कमाने का यंत्र न बनाए. बल्कि उन्हें अच्छा मनुष्य बनाने की कोशिश करें. आज के युग में उद्योगपति भी सुखी नहीं है. इसलिए भगवान का नाम स्मरण ही हमें सुख से अवगत करायेगा. आज के दौर में हम भगवान का नाम लेना भूल चुके हैं. उन्होंने कहा कि पहले लोगों के नाम ईश्वर के नाम पर रखे जाते थे. भारत का नाम अयोध्या के सुपुत्र भरत के नाम पर पडा. क्योंकि यह प्रदेश भरत का राज्य था. इसलिए इसे भरत प्रदेश कहा गया है. समय के साथ उसे भारत कहा जाने लगा्. आज अन्य जाति धर्म के पुराणों को देखेंगे तो उनमें जिन स्थानों का उल्लेख होता है. वह आज भी जीवित है. नक्शे में वह नजर आते है. लेकिन भारत के इतिहास में जिन स्थानों का उल्लेख है, वह नामशेष हो चुके हैं. स्वामी श्रवणानंद ने कहा कि आज उन राज्य व स्थान के नाम बदल दिए गये हैं. इस कारण बच्चों को रामायण महाभारत की कथाएं काल्पनिक लगती है. अगर हम भारत की संस्कृति का जतन नहीं करेंगे तो भारत का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा. अन्य देशों की तरह इसे हिन्दुस्तान कहना बंद करे, उसे भारत के नाम से संबोधित करेें. तभी भारत राष्ट्र जीवित रहेगा. उन्होंने कहा कि समय रहे तब भगवान का नाम स्मरण करे. क्योंकि भगवान केवल भक्तों के प्रति पक्षपाती होता है. जो व्यक्ति खुद को भगवान का भक्त नहीं मानता उसे भगवान कभी भी पक्षपात नहीं करते.
इन बातों के साथ भगवत गीता के 8 वें अध्याय , जिसे अक्षर ब्रह्म योग कहा जाता है. इसका सभी को अर्थ बताया. इस अध्याय में अर्जुन के प्रश्नों के उत्तर में कृष्ण द्बारा ब्रम्ह, आत्मा, कर्म और मृत्यु के रहस्यों का उजागर किया था. यह 28 श्लोक का अध्याय सिखाता है कि मृत्यु के समय मनुष्य जिस भाव का स्मरण करता है, वही उसे प्राप्त होता है. अंत में ईश्वर का निरंतर स्मरण मोक्ष का मार्ग है. जो व्यक्ति अंतकाल में मेरा स्मरण करते हुए शरीर त्यागता है. वह मुझे ही प्राप्त होता है. केवल अंत में नहीं, बल्कि जीवन भर हर समय ईश्वर का नाम स्मरण करना चाहिए. जीवन में ईश्वर की भक्ति और स्मरण को बिताएं ताकि अंतिम समय में भी उन्हीं का स्मरण रहे और जीव जन्म- मृत्य के चक्र से मुक्त हो सके.

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