सफाई ठेका कंपनी कोणार्क के मालिक मनपा पहुंचे तो बिफरे सभी दलों के पार्षद

नंदूसेठ जेठानी ने बातें सुनने के बाद मनपा से निकाल लिया पैर

* पुत्र सहित आए थे जेठानी, कई गटनेताओं ने साफ-सफाई पर शिकायतें
अमरावती/दि.7 – महापालिका की साफ-सफाई ठेका कंपनी कोणार्क के मालिक नंदूसेठ जेठानी बुधवार को मनपा पहुंचे, तो उन्हें गटनेताओं और अनेक पार्षदों का कोपभाजन बनना पडा. साफ-सफाई नहीं होने की लगभग सभी एरिया की शिकायते लेकर गटनेता और कई पार्षद जेठानी पर पिल पडे. जिससे जेठानी ने वहां से चले जाना ही बेहतर समझा और वे अपने पुत्र धीरज के साथ धीरे से मनपा से खिसक लिए. यह घटना बुधवार शाम होने की जानकारी है.
महापालिका सूत्रों ने बताया कि, मनपा का अनेक वर्षों का सफाई ठेका कोणार्क कंपनी को दिया गया है. पुरानी प्रथा अलग करते हुए संपूर्ण शहर का साफ-सफाई का कान्ट्रैक्ट कोणार्क को दिया गया. यह निर्णय प्रशासक राज में होने की चर्चा है. बहरहाल कोणार्क कंपनी के मालिक नंदूसेठ जेठानी बुधवार को अपने पुत्र धीरज जेठानी के संग महापालिका पहुंचे.
जेठानी ने महापालिका में अधिकारियों के साथ ही अनेक गटनेताओं से भी मेल-मुलाकात की. राष्ट्रवादी कांग्रेस के गटनेता अविनाश मार्डीकर भी अपनी केबिन में बैठे थे, तब नंदूसेठ जेठानी उनसे मिलने पहुंचे. वहां राष्ट्रवादी के गटनेता के साथ ही अन्य दलों के गटनेता और निगम पार्षद उपस्थित थे. सूत्रों ने बताया कि, जैसे ही मार्डीकर ने जेठानी का परिचय निगम पार्षदों से करवाया. वैसे ही पार्षद अपने-अपने एरिया की साफ-सफाई भली प्रकार नहीं होने की शिकायते करने लगे.
जेठानी इन सभी की शिकायते देर तक सुनते रहे. जिसमें कचरा नहीं उठा पाने, नियमित साफ-सफाई नहीं होने और अन्य शिकायते रही. पार्षद भडकने वाले अंदाज में अपनी तक्रार कर रहे थे. कोणार्क के पास ही महापालिका क्षेत्र का कचरा साफ-सफाई और उसके परिवहन का ठेका है. जिससे खबर है कि, नंदूसेठ जेठानी ने सभी उपस्थित पार्षद और गटनेताओं की शिकायते सुनी. कुछ सफाई भी अपनी ओर से देनी चाही. जिसे उपस्थित नेतागण सुनने तैयार नहीं हुए, तो जेठानी ने वहां से खिसक जाना ही बेहतर समझा और वे पुत्र धीरज के साथ धीमे से वहां से चले गए.

* नहीं थी स्थायी समिति की सभा
राष्ट्रवादी गटनेता और स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने स्पष्ट किया कि, बुधवार को स्थायी समिति की सभा आहूत नहीं थी. सभा होने संबंधी समाचार गलत है. उन्होंने इस बात से भी इंकार किया कि, उन्होंने पत्र देकर जेठानी को बुलाया. इस प्रकार का कोई पत्र नहीं देने का खुलासा मार्डीकर ने किया. उन्होंने यह जरुर स्वीकार किया कि, नंदूसेठ जेठानी आए थे. पार्षदों ने उन्हें सफाई के मुद्दे पर घेर लिया था.

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