भूमि अधिग्रहण घोटाले में

जिलाधिकारी अविनाश पाठक गिरफ्तार

* लातूर से हिरासत में लिया गया
बीड/दि.7- राष्ट्रीय राजमार्ग के भूमि अधिग्रहण और मुआवजा घोटाले मामले में तत्कालीन जिल्हाधिकारी अविनाश पाठक को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस ने उन्हें लातूर से हिरासत में लिया, यह जानकारी पुलिस अधीक्षक नवनीत कौंवत ने फोन पर दी. गिरफ्तारी के बाद अविनाश पाठक को बीड की अदालत में पेश किया जाएगा. इससे पहले दिनभर उनकी गहन पूछताछ की गई थी. इस मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है और शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है. पूरे मामले में एसआईटी द्वारा कार्रवाई करते हुए आज तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश पाठक को गिरफ्तार किया गया, जिससे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है.
बीड जिले में 73 करोड़ रुपये के भूमि अधिग्रहण मामले में केस दर्ज होने के बाद अविनाश पाठक का भी नाम सामने आया था. इस मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक पूजा पवार कर रही थीं, लेकिन उनके अवकाश पर होने के कारण जांच एम. व्यंकटराम को सौंपी गई है.
* पूरा मामला क्या है?
बीड जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों के मुआवजे और जमीन अधिग्रहण में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है. आरोप है कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बढ़ाने के लिए जिलाधिकारी के हस्ताक्षर का उपयोग करके फर्जी आदेश बनाए गए. इससे सरकार को 73 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ. इस मामले में पहले ही शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, जिसमें तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश पाठक का नाम भी शामिल है.
राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के अनुसार अधिग्रहित जमीनों के लिए बढ़ा हुआ मुआवजा पाने हेतु खातेदार जिलाधिकारी के पास आवेदन करते हैं. बीड के तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश पाठक के 22 अप्रैल 2025 को तबादले के बाद भी, उनके कार्यकाल की पिछली तारीखों में फर्जी आदेश जारी किए गए. इन फर्जी आदेशों के जरिए 154 मामलों में पुरानी तारीखें और फर्जी हस्ताक्षर लगाकर 241 करोड़ 62 लाख रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा मंजूर किया गया. इसमें से लगभग 73 करोड़ 4 लाख रुपये संबंधित खातेदारों को वितरित भी कर दिए गए. खास बात यह है कि आदेश जारी करते समय कोई भी रजिस्टर या रिकॉर्ड भूमि अधिग्रहण समन्वय कार्यालय में नहीं रखा गया था.

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