सुनेत्रा पवार ने कहा – अदिति मेरी बेटी है
सुनील तटकरे ने भी की उपमुख्यमंत्री की प्रशंसा, महाराष्ट्र की ’पहली वाहिनी’

रायगढ़./दि.11 – आज का दिन सभी के लिए गर्व और खुशी का क्षण है, सभी की उपस्थिति में आज रायगढ़ में विकास कार्यों का भूमिपूजन हुआ, ऐसा कहते हुए सुनेत्रा पवार ने अपने भाषण की शुरुआत की. उन्होंने आगे कहा कि अजीत दादा के बाद मुझे यहाँ विकास कार्यों के कार्यक्रम के लिए बुलाकर जो परंपरा शुरू की गई है, वह आगे भी जारी रहेगी.
रोहा में विकास कार्यों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के कई अवसर उपलब्ध होंगे. यहाँ अदिति मेरी बेटी के रूप में काम देख रही है, दादा के बाद मैं जिम्मेदार महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री (पत्नी के नाते/प्रतिनिधि के रूप में) के तौर पर काम देखूँगी. दादा की तरह ही मेरा भी तटकरे परिवार पर उतना ही प्रेम रहेगा. वहीं, सुनील तटकरे ने अपने भाषण में भविष्यवाणी की कि सुनेत्रा पवार की पहचान पूरे भारत में ’वाहिनी’ (भाभी) के रूप में होगी.
रायगढ़ और कोंकण का महत्व रायगढ़ केवल एक जिला नहीं है, बल्कि यह शिवराज्याभिषेक की पवित्र भूमि है. कोंकण साक्षात देवभूमि है जिसे परिश्रमी लोगों ने बनाया है. दादा का कोंकण पर विशेष प्रेम रहा है, कोंकण महाराष्ट्र के विकास की महत्वपूर्ण रीढ़ है. सुनेत्रा पवार पुरानी यादों को ताजा करते हुए भावुक हो गईं और कहा, अजीत दादा और मैं अगर सैर पर जाने के लिए निकलते थे, तो हमारी पहली प्राथमिकता हमेशा कोंकण ही होती थी. इस दौरान सुनील तटकरे ने भी अपने भाषण में सुनेत्रा पवार और अजीत दादा के कार्यों की जमकर प्रशंसा की.
देश की ’पहली वाहिनी’ सुनेत्रा पवार रायगढ़ जिले के विकास पर टिप्पणी करते हुए सुनील तटकरे ने कहा कि भविष्य में रायगढ़ में ऐसे प्रोजेक्ट खड़े होंगे कि पर्यटक गोवा को भूलकर कोंकण आएंगे. साथ ही, तमिलनाडु की जयललिता और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी का उल्लेख करते हुए तटकरे ने कहा कि भारत में ’पहली वाहिनी’ के रूप में सुनेत्रा पवार की पहचान बनेगी.
अजीत दादा के नेतृत्व की सराहना तटकरे ने कहा कि अजीत दादा की उपस्थिति के बिना रोहा शहर का कोई भी काम पूरा नहीं हुआ, महाराष्ट्र ने अजीत दादा को विकासोन्मुख नेतृत्व के रूप में अनुभव किया है. महाराष्ट्र ने वसंतदादा देखे, दादा (अजीत पवार) देखे, अब विकास की दृष्टि रखने वाली ’वाहिनी’ काम देखेंगी. उन्होंने भावुक होकर कहा, आज आपका स्वागत करते समय एक आँख में आँसू हैं. जब कोंकण में निसर्ग चक्रवात का कहर आया था, उस समय अजीत दादा ने मदद कार्यों की झड़ी लगा दी थी. दादा ने रेवस रेड्डी और करंजा के कार्यों का लगातार पीछा किया. दादा हमेशा राज्य के हित की परियोजनाओं की समीक्षा करते थे. राज ठाकरे ने कहा था कि अजीत दादा जाति-पाति न रखने वाले नेता हैं, दादा जैसा मिलनसार और हँसाने वाला नेता होना संभव नहीं है. तटकरे ने यह भी उल्लेख किया कि बारामती एक रोल मॉडल है और कई नेताओं ने इसे देश का पहला मॉडल बताया है.





