भाजपा के लिए इस बार स्थानीय निकाय क्षेत्र से विधान परिषद की राह नही रहेगी आसान
जिले के कुल 453 में से भाजपा के पास केवल 150 वोट अपने खुद के

* जीत हेतु महायुति में शामिल राकांपा (अजीत पवार) व शिंदे सेना का साथ मिलना रहेगा जरूरी
* युवा स्वाभिमान पार्टी व प्रहार के मतदाता सदस्य निभाएंगे निर्णायक भूमिका
* महाविकास आघाडी की ओर से महायुति को इस बार कडी टक्कर मिलने की पूरी संभावना
* 24 वर्षों से लगातार भाजपा के कब्जे में हैं विधान परिषद की अमरावती स्वायत्त निकाय सीट
* इस बार कांग्रेस अपने पुराने किले को वापीस हासिल करने लगाएगी पूरा जोर
* अभी से ही मनपा व नप सदस्यों पर इच्छूक प्रत्याशियों द्बारा डोरे डालने का काम हुआ शुरू
* मतदाता सदस्यों के यहां हापुस आम की पेटी सहित सोनपापडी व घडियां पहुंच रही गिफ्ट के तौर पर
* इस बार के चुनाव में मतदाता सदस्यों की हो सकती है जमकर ‘खरीद फरोख्त’
* सभी दलों के सामने अपने-अपने सदस्यों व वोटों को संभालकर रखने की चुनौती
* जिला परिषद व पंचायत समिति का चुनाव हुए बिना अगले सप्ताह हो सकती हैं विधान परिषद चुनाव की घोषणा
* जिले की 15 स्वायत्त संस्थाओं के 453 सदस्यों के पास होगा अपना विधायक चुनने का अधिकार
अमरावती/दि.13- जिले में नगर परिषदों व नगर पंचायतों सहित महानगर पालिका के चुनाव निपटने के बाद अब जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव होने की ओर सभी की निगाहे लगी हुई थी. परंतु अमरावती जिला परिषद एवं जिले के 14 पंचायत समितियों के चुनाव का मामला आरक्षण की अधिकतम सीमा के उल्लंघन की वजह से सुप्रीम कोर्ट में लटका हुआ हैं. ऐसे में इस बात को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई थी कि स्थानीय स्वायत्त निकाय क्षेत्र से विधानपरिषद की सीट हेतु होनेवाला चुनाव कब होगा. इसी बीच अब ऐसे संकेत बनते दिखाई दे रहे है कि जिन जिलो में जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव हो चुके हैं, उन जिलों सहित जिन जिलों में इन दोनों स्वायत्त निकायों के चुनाव होने बाकी हैं, उन जिलों में भी स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधानपरिषद का चुनाव करवाने की तैयारी राज्य सरकार द्बारा की जा रही हैं. इसके चलते अब अमरावती जिले में स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के चुनाव की गहमा गहमी शुरू हो गई हैं. जिसके चलते चुनाव लडने के इच्छूक प्रत्याशियों द्बारा इस चुनाव में मताधिकार प्राप्त रहनेवाले महानगरपालिका, नगर परिषद व नगर पंचायत के सदस्यों, स्वीकृत सदस्यों सहित नप क्षेत्र के सीधे जनता द्बारा निर्वाचित नगराध्यक्षों पर डोरे डालने का काम करना शुरू कर दिया गया हैं और अब सभी की निगाहे सरकार की ओर से विधानपरिषद चुनाव को लेकर की जानेवाली घोषणा पर टिकी हुई हैं.
बता दें कि स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद की सीट हेतु होनेवाले चुनाव में महानगरपालिका, जिला परिषद, नगर परिषद व नगर पंचायत के पदाधिकारियों व सदस्यों सहित स्विकृत सदस्य के साथ ही पंचायत समितियों के सभापतियों को मताधिकार प्राप्त होता हैं. चूंकि इस समय अमरावती में जिला परिषद एवं पंचायत समितियों के चुनाव नहीं हुए है, जिसके चलते विधानपरिषद के चुनाव आगे टलने की उम्मीद जताई जा रही हैं. परंतु विगत दिसंबर व जनवरी माह के दौरान अमरावती महानगरपालिका सहित जिले की 12 नगरपरिषदों व नगर पंचायतों के चुनाव कराए गए, साथ ही दो नगर पंचायत के चुनाव पहले ही हो चुके हैं. इसके चलते जहां अमरावती महानगरपालिका में 87 निर्वाचित सदस्यों व 8 स्वीकृत सदस्यों सहित कुल 95 सदस्य हैं. वहीं जिले की 14 नगर परिषदों व नगर पंचायतों में नगराध्यक्षों सहित कुल सदस्य संख्या 358 हैं. उसके चलते इस समय अमरावती जिले में स्थानीय निकाय क्षेत्र से विधानपरिषद की सीट हेतु कुल मतदाता संख्या 453 हैं. जिसे ध्यान में रखते हुए राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की यह इच्छा है कि भले ही अमरावती में जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव होना बाकी है लेकिन अमरावती के स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से भी विधानपरिषद के लिए चुनाव करा लिया जाए.
विशेष उल्लेखनीय है कि विगत 35 वर्षों के दौरान शुरूआती 12 वर्षों तक अमरावती के स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद हेतु कांग्रेस की वसुधा देशमुख निर्वाचित हुई थी. जिसके बाद भाजपा के जगदिश गुप्ता और फिर भाजपा के ही प्रवीण पोटे पाटिल लगातार 2-2 बार विधानपरिषद के लिए निर्वाचित हुए यानी विगत 24 वर्षों से यह सीट लगातार भाजपा के ही कब्जे में रही. जिसके चलते भाजपा एकबार फिर इस सीट पर अपना केसरिया परचम लहराने की तैयारी में हैं. लेकिन यदि मतदाताओं के आंकडो के साथ ही पक्षीय बलाबल की संख्या को देखा जाए तो इस बार भाजपा के लिए अमरावती स्वायत्त निकाय क्षेत्र से विधानपरिषद की राह आसान दिखाई नहीं देती.
बता दें कि इस समय अमरावती जिले के स्थानीय स्वायत्त निकायों में कुल 453 वोट हैं. जिसमें से भाजपा के मतदाता सदस्यों की संख्या केवल 150 हैं ऐसे में भाजपा के लिए इस बार चुनाव काफी जद्दोजहद वाला रहेगा. लेकिन यदि भाजपा को महायुति में घटक दलों के तौर पर शामिल शिंदे गुट वाली शिवसेना के 18 और अजीत पवार गुटवाली राकांपा के 33 मतदाता सदस्यों का साथ व समर्पण मिलता हैं तो भाजपा के लिए जीत की राह थोडी आसान हो सकती हैं. वहीं पूर्व मंत्री बच्चू कडू के शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल हो जाने के चलते यदि प्रहार पार्टी के 21 मतदाता सदस्यों द्बारा भी महायुति के तहत भाजपा का साथ दिया जाता है तो भाजपा लगभग जीत के मुहाने पर पहुंच सकती हैं. साथ ही यदि हमेशा से ही भाजपा के करीबी रहनेवाले विधायक रवि राणा की युवा स्वाभिमान पार्टी के 26 मतदाता सदस्यों के वोट भी भाजपा के पाले में पडते हैं. तब 248 वोटो के साथ भाजपा काफी हद तक जीत की दावेदार हो सकती हैं. हालांकि इसके बावजूद भाजपा के लिए इस बार विधानपरिषद की राह आसान नहीं रहेगी.
ध्यान देनेवाली बात है कि इस बार अमरावती जिले में विधानपरिषद के चुनाव हेतु कांग्रेस के पास भी 120 वोट हैं. वहीं कांग्रेस के साथ महाविकास आघाडी में शामिल शिवसेना उबाठा के पास 22 तथा शरद पवार गुटवाली राकांपा के पास 11 वोट हैं. जिसके चलते महाविकास आघाडी के पास कुल 153 वोट रहने की वजह से कांग्रेस भी इस बार भाजपा को चुनौती देने में सक्षम नजर आ रही हैं. ध्यान देनेवाली बात यह है कि एमआईएम के पास 16 सदस्य हैं साथ ही बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, वंचित बहुजन आघाडी जैसे छोटे दलों के सदस्यों व निर्दलिय पार्षदों की संख्या 34 हैं. ऐसे में इन 50 वोटो को भी काफी हद तक निर्णायक माना जा सकता हैं. क्योंकि यदि यह 50 वोट भाजपा के खिलाफ कांग्रेस व महाविकास आघाडी के पाले में झुक गए, तो कांग्रेस व महाविकास आघाडी के पास 203 वोट जाएंगे.
कुल मिलाकर इस समय कांग्रेस एवं भाजपा के बीच बेहद काटे के मुकाबले वाली स्थिति हैं. इसके चलते आंकडो के खेल में सबसे बडा दारोमदार प्रहार पार्टी एवं युवा स्वाभिमान पार्टी पर हैं. जिनके पाए 47 वोट हैं. अगर यह 47 वोट किसी कारण के चलते भाजपा के पक्ष में नहीं जाते हैं और एन समय पर करवट बदलते हैं, तो भाजपा के लिए अमरावती स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र में काफी कडी चुनौती पेश हो सकती हैं.
ध्यान देनेवाली बात यह भी है कि वर्ष 2018 में हुए विधानपरिषद के चुुनाव को भाजपा के तत्कालीन प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटिल ने बडी आसानी के साथ क्लिन स्विप करते हुए जिता था और उस समय कांग्रेस प्रत्याशी केवल 16 वोट ही मिले थे. परंतु इस बार भाजपा के लिए विधान परिषद के चुनाव को जीतना पिछली बार की तरह आसान नहीं रहेगा. यहां यह कहना अतिशयोक्ति पूर्ण नहीं होगा कि भाजपा के जिस प्रत्याशी के अजीत पवार गुट वाली राकांपा, व शिंदे गुट के स्थानीय नेता व पदाधिकारियों सहित भाजपा के करिबी रहनेवाले विधायक रवि राणा तथा अब शिंदे सेना में प्रवेश कर चुके पूर्व मंत्री बच्चू कडू के साथ अच्छे संबंध होंगे, वहीं प्रत्याशी 248 वोट हासिल करने में सफल रहेगा. लेकिन यदि इसमें से कोई भी नेता डगमगाता है और 40 से 50 वोटों का उलटफेर होता है तो भाजपा को इसका जबरदस्त नुकसान उठाना पड सकता हैं.
*शुरू हुआ ‘मनधरणी’ और गिफ्ट पॉलिटिक्स का दौर
-मतदाता सदस्यों की ‘पूछपरख’ अचानक बढ़ी, रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की भी संभावना
चुनाव की आधिकारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, लेकिन जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है. इच्छुक प्रत्याशियों द्वारा मतदाता सदस्यों के यहां संपर्क अभियान शुरू कर दिया गया है. शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा है कि कई मतदाता सदस्यों के घरों तक हापुस आम की पेटियां, सोनपापड़ी के डिब्बे और महंगी घड़ियां ‘उपहार’ के तौर पर पहुंचाई जा रही हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा जोरों पर है कि इस बार चुनाव में मतदाता सदस्यों की जमकर ‘खरीद-फरोख्त’ हो सकती है. यही कारण है कि सभी दलों के सामने अपने-अपने सदस्यों और वोटों को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे मतदाता सदस्यों की राजनीतिक ‘वैल्यू’ भी बढ़ती जा रही है. कई ऐसे सदस्य, जिनकी सामान्य दिनों में कोई खास पूछपरख नहीं होती, वे इन दिनों राजनीतिक दलों और इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं. सूत्र बताते हैं कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता सदस्यों के घरों पर लगातार मुलाकातों का दौर शुरू हो चुका है. कई जगहों पर हापुस आम की पेटियां, सोनपापड़ी के डिब्बे, महंगी घड़ियां और अन्य उपहार पहुंचाए जाने की चर्चाएं खुलेआम हो रही हैं. हालांकि कोई भी नेता खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि इस बार चुनाव में जमकर ‘मैनेजमेंट’ और ‘खरीद-फरोख्त’ देखने को मिल सकती है.
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि यदि मुकाबला बेहद करीबी हुआ, तो चुनाव से पहले ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ भी देखने को मिल सकती है. सभी दल अपने-अपने मतदाता सदस्यों को टूटने से बचाने के लिए उन्हें एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. संभावना जताई जा रही है कि चुनाव घोषणा के बाद कई दल अपने सदस्यों को जिले से बाहर सुरक्षित स्थानों पर ठहराने का निर्णय भी ले सकते हैं, ताकि विरोधी दल संपर्क साधने में सफल न हो सकें.
*अमरावती की राजनीति का सबसे प्रतिष्ठित चुनाव
अमरावती स्थानीय स्वायत्त निकाय विधान परिषद सीट को जिले की राजनीति का सबसे प्रतिष्ठित चुनाव माना जाता है. यही वजह है कि इस सीट पर होने वाला मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं, बल्कि जिले के सत्ता समीकरणों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है. यह चुनाव केवल एक विधायक चुनने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे जिले में राजनीतिक दलों की वास्तविक ताकत और भविष्य की दिशा भी तय होती है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा 24 वर्षों से कायम अपना किला बचाने में सफल होगी, या फिर कांग्रेस और महाविकास आघाड़ी इस बार सत्ता समीकरण बदलते हुए इतिहास रच देगी. आने वाले दिनों में जिले की राजनीति और भी ज्यादा गर्माने वाली है.
* भाजपा के लिए ऐसी रह सकती हैं स्थिति
भाजपा – 150
शिंदे सेना – 18
राकांपा (अजीत) – 33
युवा स्वाभिमान – 26
कुल – 227 कांग्रेस के लिए ऐसी हैं स्थिति
कांग्रेस – 120
सेना उबाठा – 22
राकांपा (शरद) – 11
कुल – 153
* इन पार्टियों के वोट रहेंगे निर्णायक
प्रहार – 21
एमआईएम – 16
अन्य – 34
कुल – 71 * नगर परिषद/नगर पंचायत सदस्यों का ब्यौरा
नगर पालिका निर्वाचित सदस्य नगराध्यक्ष स्वीकृत कुल
अचलपुर 41 1 4 46
अंजनगांव 28 1 3 32
वरुड 26 1 3 30
दर्यापुर 25 1 3 29
मोर्शी 24 1 3 28
चिखलदरा 20 1 2 23
शेंदूरजनाघाट 20 1 2 23
चांदुर रेलवे 20 1 2 23
चांदुर बाजार 20 1 2 23
धामणगांव रेलवे 20 1 2 23
धारणी 17 1 2 20
नांदगांव खंडेश्वर 17 1 2 20
तिवसा 17 0 2 19
भातकुली 17 0 2 19
कुल 312 12 34 358





