सामंजस्य करार के बिना मेडिकल कॉलेज खतरे में!
पूर्व मंत्री डॉ. सुनिल देशमुख ने जताई चिंता

* नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश बंदी के खतरे पर दिलाया ध्यान
* स्वास्थ्य विद्यापीठ के पत्र की जानकारी को रखा सामने
अमरावती/दि.18- अमरावती के सरकारी मेडिकल कॉलेज को जिला सामान्य अस्पताल (इर्विन) एवं जिला स्त्री अस्पताल (डफरिन) के हस्तांतरण का सामंजस्य करार अब भी प्रलंबित हैं. इस गंभीर त्रुटी के चलते महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विद्यापीठ (एमयुएनएस) ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को अंतिम चेतावनी देने के साथ ही आगामी शैक्षणिक सत्र में प्रथम वर्ष पाठ्यक्रम हेतु 100 विद्यार्थियों की तीसरी बैच की प्रवेश प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाने की बात कही हैं. इस तकनीकी दिक्कत के चलते मेडिकल कॉलेज की अगले वर्ष की मान्यता ही खतरे में दिखाई दे रही हैं. इस गंभीर परिस्थिति पर पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनिल देशमुख ने गंभीर चिंता व्यक्त की हैं. साथ ही कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्बारा महाविद्यालय के अस्तित्व को बचाए रखने की बजाय जमीन को लेकर विवाद, निर्माण के ठेके तथा अपने निर्वाचन क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज ले जाने को लेकर श्रेय की लडाई में मामले को लटकाकर रखा जा रहा हैं.
* 11 मई का अल्टीमेटम खत्म, मान्यता अधर में बता दें कि इस समय सुपर स्पेशालिटी अस्पताल की इमारत में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्थायी तौर पर शुरू किया गया. जहां पर पहली व दूसरी बैच की पढाई चल रही हैैं. वहीं अब आगामी शैक्षणिक सत्र में तिसरी बैच की प्रवेश प्रक्रिया शुरू होनेवाली हैं. परंतु विद्यार्थियों के प्रात्यक्षिकों हेतु आवश्यक मरीजों व ऑपरेशन थीएटर सहित प्राध्यापकों की कमी रहने की बात एमयुएचएस की जांच में सामने आयी हैं. जिसके बाद एमयुएचएस ने सभी बातों की पुर्तता 11 मई तक नहीं किए जाने पर अगले सत्र में 100 विद्यार्थियों के प्रवेश को अनुमति नहीं देने की बात स्पष्ट रूप से कही थी. 11 मई के अल्टीमेटमवाली अवधि खत्म होने के बावजूद यह करार अब तक पूरा नहीं हुआ हैं. जिसके चलते सरकारी मेडिकल कॉलेज के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगते नजर आ रहे हैं.
* तो जमीन का क्या करेंगे
पूर्व मंत्री डॉ. सुनिल देशमुख के मुताबिक अमरावती शहर में जहां पर इस समय सरकारी मेडिकल कॉलेज को अस्थायी रूप से चलाया जा रहा है वहां पर अमरावती महानगर क्षेत्र के दो में से एक भी विधायक ने अभी कोई सामान्य भेंट नहीं दी हैं. तथा इर्विन व डफरिन अस्पतालों का हस्तांतरण कर मेडिकल विद्यार्थियों के प्रात्यक्षिक पाठ्यक्रम हेतु पुरा इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के लिए सरकारी स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए हैं. इसकी बजाय दोनों प्रतिनिधियों का पूरा ध्यान केवल मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन और इमारत निर्माण की टेंडर प्रक्रिया पर है. परंतु इस चक्कर में यदि अमरावती का सरकारी मेडिकल कॉलेज बंद पड जाता है और इससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एवं विद्यार्थियों के भविष्य के लिहाज से अंधकारमय स्थिति बन जाएगी. साथ ही इस जमीन के लिए आज हमारे जनप्रतिनिधि आपस में लड रहे है, अगर मेडिकल कॉलेज ही बंद हो गया तो क्या उस जमीन का अचार डाला जाएगा.





