अमरावती मनपा का सत्तापक्ष भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति उदासीन

आयुक्त आष्टीकर के खिलाफ जांच हेतु अब तक समिति गठित नहीं

* पिछले माह हुई आमसभा में समिति गठित करने का हुआ था निर्णय
* आमसभा में हुए फैसलों सहित खुद अपनी रूलिंग की अनदेखी कर रहा सत्तापक्ष
* कहीं आष्टीकर को बचाना तो नहीं चाह रही मनपा की सत्ताधारी भाजपा
अमरावती/दि.18 – अमरावती महानगरपालिका के आयुक्त व प्रशासक रह चुके डॉ. प्रवीण आष्टीकर द्बारा अमरावती में अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न कामों, योजनाओं व ठेको की आड लेते हुए जमकर भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप विगत माह हुई मनपा की आमसभा में लगा था. जिसके बाद आमसभा में सर्वसम्मति से यह फैसला हुआ था कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में एक समिति गठित करते हुए इस मामले की जांच कराई जायेगी. परंतु यह फैसला हुए करीब एक माह का समय बीत चुका है. लेकिन इस दौरान ऐसी कोई समिति गठित नहीं हुई है. जिसके चलते यह सवाल उपस्थित हो रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं की तत्कालीन आयुक्त प्रवीण आष्टीकर द्बारा किए गये भ्रष्टाचार को लेकर मनपा का सत्तापक्ष उदासीन बना हुआ है. या फिर मनपा की सत्ताधारी भाजपा द्बारा डॉ. आष्टीकर को बचाने का कोई प्रयास किया जा रहा है.
बता दें कि अमरावती महानगरपालिका के आयुक्त व प्रशासक रहे डॉ. प्रवीण आष्टीकर अमरावती में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद अमरावती से ही सेवानिवृत्त भी हुए थे. उनके आयुक्त पद पर रहते समय एवं सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका कार्यकाल काफी हद तक विवादों में घिरा रहा. यहां यह ध्यान दिलाया जाने वाली बात है कि किसी भी अधिकारी द्बारा उसके कार्यकाल दौरान किए गये किसी भी भ्रष्टाचार संबंधी मामले की जांच पडताल करते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई उस अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के चार वर्ष बाद तक ही उसके की जा सकती है. चूकि 1 जनवरी 2022 को अमरावती मनपा में आयुक्त तौर पर पदस्थ हुए डॉ. प्रवीण आष्टीकर नियतवयोमान के अनुसार 30 जून 2023 को सेवानिवृत्त हुए थे. ऐसे में उन्हें सेवानिवृत्त हुए अब लगभग 3 साल का समय बीत चुका है. जिसके चलते डॉ. आष्टीकर द्बारा कामों में की गई अनियमितताओं एवं गडबडियों के बारे में जांच पडताल करते हुए कार्रवाई करने हेतु अब महज एक वर्ष का समय शेष कहा जा सकता है. ऐसे में सवाल पूछा जा सकता है कि एक माह का समय बीत जाने के बावजूद अब तक जांच समिति भी गठित नहीं हुई है, तो समिति कब तक गठित होगी, समिति द्बारा जांच कब तक पूरी की जायेगी और फिर पूर्व आयुक्त आष्टीकर के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित किसी मामले को लेकर कोई कार्रवाई हो भी पायेगी अथवा नहीं.
* स्वच्छता समिति की सिफारिशों व सुझावों पर भी अब तक कोई अमल नहीं
आमसभा में हुए किसी फैसले अथवा सत्तापक्ष द्बारा खुद दी गई किसी रूलिंग की अनदेखी का यह कोई अपनी तरह का पहला मामला नहीं है. बल्कि इससे पहले साफ सफाई को लेकर बुलाई गई मनपा की विशेष सभा में अभ्यासगट के तौर पर स्वच्छता समिति का गठन करने और फिर स्वच्छता समिति द्बारा दी गई रिपोर्ट में शामिल सुझावों व सिफारिशों पर अमल करने के मामले में भी मनपा के सत्तापक्ष द्बारा इसी तरह की उदासीनता दिखाई जा रही है. बता दें कि साफ सफाई के मुद्दे को लेकर मनपा की विशेष सभा 28 फरवरी को हुई थी. जिसमें 8 दिन के भीतर स्वच्छता समिति गठित करने का निर्णय हुआ था. परंतु समिति का गठन करने में करीब 1 माह का समय लग गया था. जिसके बाद अगले एक माह के भीतर समिति ने कोणार्क कंपनी को दिए गये सफाई ठेके के मामले का अध्ययन करते हुए अपनी रिपोर्ट पेश की थी. जिसमें स्पष्ट तौर पर इस बात की ओर ध्यान दिलाया गया था कि सफाई ठेके को लेकर जारी निविदा सूचना की शर्तो एवं ठेका करार में शामिल नियमों और शर्तो में काफी अधिक फर्क हैं. ऐसे में ठेका करार की शर्तो में संशोधन किए जाने की सख्त जरूरत है. स्वच्छता समिति की यह रिपोर्ट विगत 20 अप्रैल को हुई मनपा की आमसभा में रखी गई थी. जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार भी किया गया था. परंतु इसके बाद एक माह का समय बीत जाने के बावजूद मनपा के सत्तापक्ष एवं प्रशासन द्बारा स्वच्छता समिति की सिफारिशों के आधार पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गये तथा कोणार्क कंपनी से शहर में अस्तव्यस्त हो चुकी सफाई व्यवस्था के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई.

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