मानसून पूर्व तैयारी को लेकर प्रशासन अलर्ट, सभी एजेंसियों को 24 बाय 7 सतर्क रहने के निर्देश

आपदा प्रबंधन कक्ष लगातार चालू रखने, बचाव दलों को सुसज्जित रखने पर जोर

* ‘एल नीनो’ की पृष्ठभूमि में विभागीय आयुक्त नयना गुंडे ने लिया व्यापक समीक्षा बैठक
अमरावती /दि.19– आगामी मानसून और संभावित आपदाओं को देखते हुए अमरावती संभाग में प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. विभागीय आयुक्त नयना गुंडे ने स्पष्ट कहा कि बाढ़, अतिवृष्टि और आपदा की स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाने के लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा तथा जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष 24÷7 घंटे सक्रिय रखने होंगे. विभागीय आयुक्त कार्यालय में आयोजित मानसून पूर्व तैयारी समीक्षा बैठक में उन्होंने पांचों जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए.
बैठक में अपर आयुक्त संजय जाधव, कृषि सहसंचालक गणेश घोरपड़े प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि सभी जिलाधिकारियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों ने दूरदृश्य प्रणाली के माध्यम से सहभाग लिया.
* बाढ़ प्रभावित और दुर्गम गांवों पर विशेष फोकस
विभागीय आयुक्त नयना गुंडे ने कहा कि हर वर्ष बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित होने वाले गांवों के लिए स्थायी उपाययोजनाएं तैयार की जाएं. जिन गांवों का संपर्क बरसात में कट जाता है, विशेष रूप से आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य समय पर पहुंचे, इसके लिए पहले से ठोस योजना बनाई जाए. उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में ऊंचे स्थानों पर सुरक्षित आश्रय स्थल, भोजन व्यवस्था, पीने के पानी, धान्य और दवाइयों का पर्याप्त भंडारण अभी से सुनिश्चित किया जाए. साथ ही आपदा प्रबंधन कक्ष, संपर्क व्यवस्था और बचाव दलों को लगातार सक्रिय रखा जाए.
* एसडीआरएफ और एनडीआरएफ दल रहें तैयार
बैठक में विभागीय आयुक्त नयना गुंडे ने कहा कि एसडीआरएफ तथा एनडीआरएफ की बचाव टीमों को पूरी तरह सुसज्जित रखा जाए. मोटर बोट, लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग, रस्सियां, सर्च लाइट, मेगाफोन, हेल्मेट, स्कूबा डाइविंग किट सहित अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए. उन्होंने बचाव दलों की नियमित मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण आयोजित करने पर भी जोर दिया.
* ‘एल नीनो’ के कारण सतर्कता बढ़ाने के निर्देश
विभागीय आयुक्त नयना गुंडे ने कहा कि इस वर्ष ‘एल नीनो’ की पृष्ठभूमि को देखते हुए मौसम में असामान्य परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं. इसलिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी. मौसम विभाग से चेतावनी मिलते ही सूचना तत्काल गांव-गांव तक पहुंचाई जाए तथा आपदा से पूर्व ही सुरक्षा उपाय सक्रिय कर दिए जाएं.
* स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश
बरसात के मौसम में फैलने वाली बीमारियों और विषैले जीव-जंतुओं के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी विशेष निर्देश दिए गए. प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में सर्पदंश और बिच्छू दंश के इंजेक्शन तथा पर्याप्त औषधि भंडार उपलब्ध रखने को कहा गया. दूषित पानी से फैलने वाले रोगों की रोकथाम के लिए जलस्रोतों की गुणवत्ता जांचने और आवश्यक स्थानों पर वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए.
* जीर्ण स्कूल भवनों और तालाबों का होगा सर्वे
विभागीय आयुक्त ने जिला परिषद प्रशासन और जलसंधारण विभाग को पुराने तालाबों की सफाई, गाद निकालने तथा सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. ग्रामीण क्षेत्रों में नदी गहरीकरण और बाढ़ सुरक्षा दीवारों की जांच कर आवश्यक मरम्मत तत्काल करने को कहा गया. साथ ही जर्जर जिला परिषद स्कूल भवनों और अन्य सरकारी इमारतों का सर्वेक्षण कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए. नगर निगम और नगर परिषदों को नालों की सफाई, स्वच्छता और मच्छर नियंत्रण अभियान तत्काल पूरा करने के आदेश दिए गए.
* बांधों से पानी छोड़ने से पहले 24 घंटे पूर्व सूचना अनिवार्य
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि किसी भी परियोजना या बांध से पानी छोड़े जाने से कम से कम 24 घंटे पहले तहसीलदार, पुलिस विभाग और नियंत्रण कक्ष को सूचित किया जाए. नदी किनारे बसे गांवों में रेड लाइन और ब्लू लाइन क्षेत्र का सीमांकन करने तथा बाढ़ नियंत्रण समितियों को सक्रिय रखने के आदेश भी दिए गए.
* खरीफ सीजन और कृषि तैयारी की भी समीक्षा
बैठक में आगामी खरीफ सीजन को लेकर कृषि विभाग की तैयारियों की भी समीक्षा की गई. बारिश के संभावित स्वरूप, जलसंचय, बीज उपलब्धता और किसानों के लिए आवश्यक योजनाओं की जानकारी विभागीय आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों से ली. विभागीय आयुक्त ने अंत में कहा कि आपदा के समय त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय और प्रभावी संचार व्यवस्था ही जनहानि और नुकसान को कम कर सकती है. इसलिए सभी विभाग मानसून पूर्व तैयारियों को गंभीरता से लें और समय रहते सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण करें.

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