अतिरिक्त कार्यों के दबाव से शिक्षकों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित

अमरावती/दि.2– शिक्षकों पर लगातार बढ़ते बीएलओ, जनगणना तथा ऑनलाइन कार्यों का बोझ शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है. ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भी विद्यालय पूर्व तैयारी, निरंतर ऑनलाइन रिपोर्टिंग तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. प्रभावी शिक्षण के लिए शिक्षकों को मानसिक विश्राम तथा परिवार के साथ समय मिलना भी उतना ही आवश्यक है.
राज्य के शिक्षकों पर दिन-प्रतिदिन अध्यापन के अतिरिक्त विभिन्न शासकीय कार्यों का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. चुनाव संबंधी कार्य, बीएलओ की जिम्मेदारियाँ, जनगणना, विभिन्न सर्वेक्षण, ऑनलाइन जानकारी भरना, पोर्टल अपडेट करना आदि कार्यों के कारण शिक्षकों का तनाव काफी बढ़ गया है. शिक्षकों का मुख्य कार्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, किंतु वास्तविकता में उन्हें अनेक प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्यों में व्यस्त रखा जाता है. लगातार ऑनलाइन रिकॉर्ड बनाए रखना, रिपोर्ट प्रस्तुत करना, समय-समय पर आने वाले निर्देशों का पालन करना तथा विभिन्न सरकारी अभियानों में भाग लेना पड़ता है, जिससे शिक्षकों को अपने लिए तथा परिवार के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता. ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक शिक्षकों को इंटरनेट संबंधी समस्याओं, तकनीकी कठिनाइयों तथा समय की सीमाओं के कारण अतिरिक्त तनाव का सामना करना पड़ता है. पूरे दिन विद्यालय में अध्यापन करने के बाद रात देर तक ऑनलाइन जानकारी भरने का कार्य करना पड़ता है, जिससे मानसिक थकान बढ़ रही है.
शिक्षकों का कहना है कि बढ़ते मानसिक तनाव के कारण उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है. विद्यार्थियों को प्रभावी एवं सकारात्मक वातावरण में शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षकों का मानसिक रूप से स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है. शिक्षकों को मानसिक विश्राम, परिवार के साथ समय तथा शिक्षण के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता बन गया है.शिक्षक उन कर्मचारियों की श्रेणी में आते हैं जो लंबे अवकाश के दौरान भी कार्य करते रहते हैं. ग्रीष्मकालीन लंबी छुट्टियों में भी विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्य जारी रहते हैं. इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिदिन नए-नए परिपत्र एवं शासनादेश जारी किए जाते हैं, जिससे शिक्षकों पर अत्यधिक मानसिक दबाव बढ़ रहा है. इसलिए उन्हें शारीरिक एवं मानसिक आराम की अत्यंत आवश्यकता है.





