10 लाख सौर कृषि पंप स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य

महाराष्ट्र ने रचा नया रिकॉर्ड

अमरावती/दि.5 – महाराष्ट्र ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश में सबसे अधिक 10 लाख सौर कृषि पंप स्थापित करने का रिकॉर्ड बनाया है. प्रधानमंत्री कुसुम-बी और राज्य सरकार की ‘मागेल त्याला सौर कृषिपंप’ योजना के तहत यह उपलब्धि हासिल हुई है. देश में स्थापित कुल सौर कृषि पंपों में से लगभग 64 प्रतिशत हिस्सेदारी महाराष्ट्र की है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस उपलब्धि पर किसानों, ऊर्जा विभाग और महावितरण के अधिकारियों का अभिनंदन किया है.
* देश में महाराष्ट्र सबसे आगे
देशभर में अब तक कुल 15.62 लाख सौर कृषि पंप स्थापित किए गए हैं. इनमें से 10 लाख 472 पंप अकेले महाराष्ट्र में कार्यरत हैं. अन्य राज्यों की स्थिति इस प्रकार है. हरियाणा 1.90 लाख, राजस्थान 1.27 लाख, उत्तर प्रदेश 71,538, झारखंड 61,452, गुजरात 21,894. इस प्रकार महाराष्ट्र सौर कृषि पंपों की स्थापना में अन्य सभी राज्यों से काफी आगे निकल गया है.
* पहले भी बना चुका है विश्व रिकॉर्ड
महावितरण ने इससे पहले एक ही महीने में 45,911 सौर कृषि पंप स्थापित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था. इस उपलब्धि को दिसंबर 2025 में गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने आधिकारिक रूप से दर्ज किया था.
* किसानों को क्या लाभ?
योजना के तहत सामान्य किसानों को केवल 10 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों को मात्र 5 प्रतिशत अंशदान पर 3, 5 और 7.5 हॉर्सपावर क्षमता के सौर पंप उपलब्ध कराए जाते हैं.
* सौर पैनलों की प्रमुख विशेषताएं
25 वर्षों तक बिजली उत्पादन क्षमता, बिजली बिल से स्थायी राहत, दिन में निर्बाध बिजली आपूर्ति, खेतों में विद्युत दुर्घटनाओं का जोखिम कम, सिंचाई के साथ घरेलू उपकरण चलाने की सुविधा, मोबाइल और ई-वाहन चार्जिंग की सुविधा, अतिरिक्त ऊर्जा से कृषि पूरक व्यवसाय शुरू करने का अवसर.
* पांच साल की वारंटी और बीमा सुरक्षा
योजना के अंतर्गत प्रत्येक सौर पंप पर 5 वर्ष की वारंटी दी जाती है. इस अवधि में रखरखाव और मरम्मत की पूरी जिम्मेदारी आपूर्तिकर्ता कंपनी की होती है. इसके अलावा पंप और सौर पैनलों को प्राकृतिक आपदा, नुकसान और चोरी से बचाने के लिए बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध कराई गई है.
* शिकायत दर्ज करने की सुविधा
किसानों को किसी भी समस्या या शिकायत के लिए महावितरण के मोबाइल ऐप, वेबसाइट, 24 घंटे उपलब्ध टोल-फ्री हेल्पलाइन तथा संबंधित आपूर्तिकर्ता कंपनी के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है. यह उपलब्धि महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र के सौरकरण, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और किसानों के बिजली खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है.

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