नियमों की अनदेखी कर बनाए जा रहे स्पीड ब्रेकर
वाहन चालक परेशान, अनेकों की गर्दन और कमर में तकलीफ

* अनेक इलाकों में हो रही दुर्घटनाएं
अमरावती/दि.6 – शहर में जगह-जगह बनाए गए अनियमित और गैर-मानक स्पीड ब्रेकरों को लेकर नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. वाहन चालकों का आरोप है कि बिना तकनीकी मानकों का पालन किए फाइबर, कंक्रीट और डामर से मनमाने ढंग से स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और लोगों को शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
विशेष रूप से स्पॉन्डिलाइटिस, कमर दर्द और रीढ़ संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों ने शिकायत की है कि ऊंचे और असमान स्पीड ब्रेकरों से गुजरते समय उन्हें तेज झटके लगते हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य समस्याएं और बढ़ रही हैं. महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को भी इससे काफी परेशानी हो रही है. नागरिकों का कहना है कि कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर बिना अनुमति और बिना निर्धारित मानकों के बनाए गए हैं. कई स्पीड ब्रेकरों पर चेतावनी संकेतक और रिफ्लेक्टिव पेंट भी नहीं लगाए गए हैं, जिसके कारण रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है.
* जिलाधिकारी के निर्देशों की भी अनदेखी
हाल ही में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिला जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने गैर-मानक और परेशानी पैदा करने वाले स्पीड ब्रेकरों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए थे. बावजूद इसके कई स्थानों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
* मानक क्या कहते हैं?
सड़क सुरक्षा मानकों के अनुसार स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 10 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए और इसकी कुल चौड़ाई लगभग 3.7 मीटर होनी चाहिए. स्पीड ब्रेकर गोलाकार ढलान वाले होने चाहिए ताकि वाहन चालकों को तेज झटका न लगे. इसके अलावा सफेद-काली पट्टियां, रिफ्लेक्टिव पेंट और 40 मीटर पहले चेतावनी संकेतक लगाना अनिवार्य माना जाता है.
* केवल निर्धारित स्थानों पर ही अनुमति
विशेषज्ञों के अनुसार स्पीड ब्रेकर केवल आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, अस्पतालों, बाजारों और मुख्य सड़क से जुड़ने वाली छोटी सड़कों पर लगाए जा सकते हैं. राष्ट्रीय राजमार्गों और तेज रफ्तार मार्गों पर इन्हें लगाने की अनुमति नहीं है. किसी भी सार्वजनिक सड़क पर मनमाने ढंग से स्पीड ब्रेकर बनाने का अधिकार किसी व्यक्ति या संस्था को नहीं है.
* निरीक्षण अभियान की तैयारी
मनपा के शहर अभियंता रविंद्र पवार ने बताया कि नागरिकों की शिकायतों को देखते हुए शहर के स्पीड ब्रेकरों का निरीक्षण किया जाएगा. रिपोर्ट सड़क सुरक्षा समिति को भेजी जाएगी और उसके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं, अविनाश मार्डीकर ने कहा कि जहां आवश्यकता होगी, वहां ही नियमों के अनुसार स्पीड ब्रेकर लगाए जाएंगे और इस संबंध में संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जाएगा.
* स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता
डॉ. वसंत लुंगे ने कहा कि गलत तरीके से बनाए गए स्पीड ब्रेकरों के कारण सर्वाइकल और लंबर स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. सड़क सुरक्षा समिति को चिकित्सा विशेषज्ञों की राय लेकर ही ऐसे निर्माण कार्यों की योजना बनानी चाहिए. नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि गैर-मानक और खतरनाक स्पीड ब्रेकरों को तत्काल हटाया जाए तथा भविष्य में केवल निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार ही उनका निर्माण किया जाए.





