सरकारी नियमों से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विभाग में बढ़ी अव्यवस्था
हजारों आवेदन लंबित, नागरिक त्रस्त

अमरावती/दि.6- जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में लागू नए सरकारी नियमों और तकनीकी सीमाओं के कारण अमरावती मनपा के जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग में भ्रम और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई है. परिणामस्वरूप हजारों नागरिकों के आवेदन लंबित पड़े हैं और उन्हें आवश्यक प्रमाणपत्र समय पर नहीं मिल पा रहे हैं. वर्तमान में स्कूल-कॉलेज प्रवेश प्रक्रिया जारी है, वहीं आधार कार्ड, शासकीय योजनाओं, वारिस प्रमाणपत्र और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जन्म प्रमाणपत्र की मांग बढ़ गई है. ऐसे में नागरिकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
जानकारी के अनुसार, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अब सीआरएस पोर्टल के माध्यम से जारी किए जाते हैं. हालांकि सरकार द्वारा पोर्टल पर हर महीने केवल 2 हजार पुराने रिकॉर्ड दर्ज करने और प्रमाणपत्र जारी करने की सीमा निर्धारित की गई है. जबकि अमरावती जैसे बड़े शहर में मांग इसके मुकाबले कहीं अधिक है. समस्या को और गंभीर बनाते हुए, जोन स्तर पर प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अलग लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. वर्तमान में अधिकांश कार्य केवल रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार की सीमित लॉगिन आईडी के माध्यम से किए जा रहे हैं, जिससे प्रक्रिया धीमी हो गई है.
मनपा के सूत्रों के अनुसार विभाग में लगभग 3 हजार आवेदन लंबित हैं. जोन कार्यालयों में आवेदन तो स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम मंजूरी और प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार मुख्यालय स्तर पर ही केंद्रित होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है. इस बीच अमरावती के महापौर श्रीचंद तेजवानी ने जिला कलेक्टर आशीष येरेकर को पत्र लिखकर सीआरएस पोर्टल की मासिक सीमा 2 हजार से बढ़ाकर कम से कम 5 हजार करने की मांग की है. उनका कहना है कि लगभग 10 लाख आबादी वाले शहर के लिए वर्तमान सीमा पर्याप्त नहीं है. हाल ही में आधार कार्ड संबंधी नियमों में हुए बदलावों के बाद जन्म प्रमाणपत्र का महत्व और बढ़ गया है. अब आधार कार्ड में कई प्रकार के संशोधनों के लिए भी जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है. इससे प्रमाणपत्रों की मांग में अचानक वृद्धि हुई है. नागरिकों का कहना है कि यदि शीघ्र ही पोर्टल की क्षमता नहीं बढ़ाई गई और जोन स्तर पर अलग लॉगिन सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो लंबित मामलों की संख्या और बढ़ सकती है. वहीं प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की जा रही है ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों और आम नागरिकों को राहत मिल सके.





