अखबारी कागज में खाद्य पदार्थ बिल्कुल नहीं
नया नहीं है नियम, तुकाराम मुंढे केवल करवा रहे हैं सख्ती से पालन

* एफएसएसएआई ने 2019 से लागू की थी रोक, महाराष्ट्र में कार्रवाई के बाद फिर चर्चा में आया मुद्दा
नागपुर/ दि. 6- खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे इन दिनों खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रही सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में हैं. वर्धा के चर्चित गोरस भंडार सहित कई प्रतिष्ठानों पर एफडीए की कार्रवाई के बाद यह धारणा बन गई है कि अखबारों के कागज में खाद्य पदार्थ देने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश तुकाराम मुंढे ने हाल ही में जारी किया है. हालांकि वास्तविकता यह है कि यह नियम नया नहीं है, बल्कि कई वर्षों से पूरे देश में लागू है.
* 2019 से लागू है प्रतिबंध
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने वर्ष 2016 में ही एक परामर्श जारी कर चेतावनी दी थी कि समाचार पत्रों में खाद्य पदार्थ लपेटना या परोसना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इसके बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशंस-2018 लागू किए गए, जो 1 जुलाई 2019 से पूरे देश में प्रभावी हैं. इन नियमों के तहत खाद्य पदार्थों को पैक करने, परोसने अथवा तले हुए खाद्य पदार्थों का अतिरिक्त तेल सोखने के लिए अखबार के कागज का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया. नियमों का उल्लंघन खाद्य सुरक्षा कानून के तहत दंडनीय माना जाता है.
* तुकाराम मुंढे ने शुरू की सख्त कार्रवाई
आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के एफडीए आयुक्त बनने के बाद इस नियम के पालन पर विशेष जोर दिया गया. उन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सड़क किनारे खाद्य पदार्थ बेचने वाले विक्रेताओं, होटलों, मिठाई दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों की जांच कर अखबार के उपयोग पर रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. इसके बाद कई स्थानों पर छापेमारी और दंडात्मक कार्रवाई हुई, जिससे यह मुद्दा व्यापक चर्चा में आ गया. इसी वजह से आम लोगों में यह धारणा बनी कि यह नियम तुकाराम मुंढे द्वारा लागू किया गया है, जबकि वास्तव में वे पहले से मौजूद कानून का सख्ती से पालन करा रहे हैं.
* क्यों खतरनाक है अखबारी कागज में खाना परोसना?
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार समाचार पत्रों की छपाई में उपयोग होने वाली स्याही में सीसा (लेड), कैडमियम, जिंक और अन्य हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं. जब गर्म या तेलयुक्त खाद्य पदार्थ अखबार पर रखे जाते हैं तो ये रासायनिक तत्व भोजन में मिल सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे भोजन का लंबे समय तक सेवन करने से पेट संबंधी बीमारियां, यकृत और गुर्दे की समस्याएं तथा गंभीर मामलों में कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
* स्वच्छता भी बड़ी चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अखबार छपाई केंद्र से लेकर वितरण और कबाड़ तक पहुंचने की प्रक्रिया में कई लोगों के संपर्क में आता है. इस दौरान उस पर धूल, गंदगी, बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीव जमा हो जाते हैं. ऐसे कागज के सीधे संपर्क में आने से खाद्य पदार्थ दूषित हो सकते हैं और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
* ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर अमल
एफडीए के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार वर्तमानपत्र में खाद्य पदार्थ देने पर रोक का कानून वर्षों से लागू है, लेकिन तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में इसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सख्ती से निगरानी की जा रही है. प्रशासन का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे खाद्य पदार्थ खरीदते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और यदि कहीं अखबार या अन्य अस्वीकृत सामग्री में भोजन परोसा जा रहा हो तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें.





