‘शावक नहीं, पूरी तरह वयस्क बाघिन है’
मेलघाट टीटीसी में लाए गए वन्यजीव को लेकर उठे सवाल

* मेलघाट ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर में लाए गए वन्यजीव की उम्र और पहचान पर बहस
* अमरावती में पकड़े गए तेंदुए को जुन्नार भेजे जाने की संभावना
परतवाड़ा /दि.9 – मेलघाट टाइगर प्रोजेक्ट के अंतर्गत ब्रह्मपुरी-सिंदेवाही क्षेत्र से परतवाड़ा स्थित ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी) में लाए गए बाघ के शावक को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है. कई जानकारों का दावा है कि जिस वन्यजीव को शावक बताया जा रहा है, वह वास्तव में एक पूर्ण विकसित बाघिन है. प्रत्यक्षदर्शियों और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघ का शावक सामान्यतः दो वर्ष की आयु तक माना जाता है. इसके बाद वह स्वतंत्र रूप से शिकार करने और जंगल में रहने में सक्षम हो जाता है. ऐसे में टीटीसी में लाए गए वन्यजीव की वास्तविक आयु और स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, ब्रह्मपुरी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत सिंदेवाही क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष का कारण बनी बाघिन टी-2 के एक शावक ‘कब-1’ को 28 मई को परतवाड़ा के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर में लाया गया था. टी-2 बाघिन पर चार महिलाओं की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप था. स्थानीय सूत्रों का दावा है कि घटनाओं के दौरान बाघिन के शावक भी उसके साथ मौजूद थे. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि वन विभाग द्वारा नहीं की गई है.
* टीटीसी में उमड़ी लोगों की भीड़
टीटीसी में बाघ और तेंदुए के रखे जाने की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने के लिए पहुंचने लगे. बताया जा रहा है कि कुछ लोग अस्पताल मार्ग से परिसर तक पहुंच गए, जबकि कई लोगों ने बाहर से वन्यजीवों को देखने का प्रयास किया. वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ और तेंदुआ दोनों ही अत्यंत संवेदनशील तथा संरक्षित वन्यजीव हैं. ऐसे जानवरों को अनावश्यक भीड़ और शोर-शराबे से दूर रखना आवश्यक होता है, क्योंकि इससे उनके व्यवहार और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
* अमरावती में पकड़े गए तेंदुए को विदर्भ से बाहर भेजने की तैयारी
इस बीच, अमरावती शहर में आठ दिन पहले पकड़े गए तेंदुए को लेकर भी वन विभाग सक्रिय है. वरिष्ठ अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में उसे उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने पर चर्चा की गई. सूत्रों के अनुसार नागपुर के गोरेवाड़ा, चंद्रपुर और विदर्भ के अन्य बचाव केंद्रों में जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण तेंदुए को विदर्भ के बाहर भेजे जाने की संभावना है. माना जा रहा है कि उसे जुन्नार स्थित वन्यजीव केंद्र में स्थानांतरित किया जा सकता है. वन विभाग के जानकारों का कहना है कि परतवाड़ा का ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर कोई चिड़ियाघर नहीं, बल्कि घायल अथवा बचाव किए गए वन्यजीवों के उपचार और अस्थायी देखभाल के लिए बनाया गया केंद्र है. वर्तमान में बाघ और तेंदुए दोनों के वहां मौजूद होने से केंद्र की क्षमता पर भी दबाव बढ़ गया है.





