137 साल की परंपरा, 910 किमी की पदयात्रा

12 जून को घुईखेड़ से पंढरपुर के लिए रवाना होगी दिंडी

* 47 दिनों में पूरा होगा सफर
* पैठण और आलंदी होते हुए पंढरपुर पहुंचेगी विदर्भ की एकमात्र मानाची दिंडी
चांदूर रेलवे /दि.9- वारकरी संप्रदाय की आस्था, भक्ति और परंपरा का प्रतीक घुईखेड़ स्थित श्री संत बेंडोजीबाबा संस्थान की ऐतिहासिक पदयात्रा इस वर्ष भी पंढरपुर के लिए रवाना होगी. 137 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा 12 जून को घुईखेड़ से शुरू होगी और 25 जुलाई को पंढरपुर पहुंचकर विठ्ठल-रुक्मिणी के दर्शन के साथ संपन्न होगी. इस यात्रा में वारकरी लगभग 910 किलोमीटर का सफर पूरी तरह पैदल तय करेंगे. 47 दिनों तक चलने वाली इस पदयात्रा का विशेष महत्व है. दिंडी पैठण और आलंदी होते हुए आगे बढ़ेगी तथा आलंदी से पंढरपुर तक संत ज्ञानेश्वर माऊली पालखी समारोह में शामिल होकर लगभग 260 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करेगी.
संस्थान के अध्यक्ष वसंत घुईखेड़कर, ट्रस्टी प्रवीण घुईखेड़कर और अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि जो श्रद्धालु घुईखेड़ से पंढरपुर तक की पदयात्रा में शामिल होना चाहते हैं, वे घुईखेड़ में पंजीकरण करा सकते हैं. यात्रा कार्यक्रम के अनुसार दिंडी 25 जून को पैठण पहुंचेगी, 7 जुलाई को आलंदी में प्रवेश करेगी और 25 जुलाई को पंढरपुर पहुंचेगी. घुईखेड़ की दिंडी को संत ज्ञानेश्वर माऊली पालखी समारोह में विशेष सम्मान प्राप्त है. यह माऊली के रथ के पीछे चलने वाली 21 मानाच्या दिंडियों में 17वें क्रमांक पर शामिल है. खास बात यह है कि विदर्भ क्षेत्र से भाग लेने वाली यह एकमात्र मानाची दिंडी मानी जाती है. श्री संत बेंडोजीबाबा संस्थान कई पीढ़ियों से वारकरी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है. आधुनिक सुविधाओं और बदलते समय के बावजूद हजारों श्रद्धालु आज भी पैदल वारी की इस परंपरा को उसी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभा रहे हैं.

 

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