कंत्राटी सफाई कर्मचारी के बेटे रोहित सांगले बने आईएएस
यूपीएससी में 865 वीं रैंक

* मेहतर-वाल्मीकि समाज का बढाया मान
* झाडू से जुडी पहचान से आईएएस तक का सफर
अमरावती /दि.10 – कहते हैं कि, सपनों की ऊंचाई इंसान की परिस्थितियां नहीं, बल्कि उसका हौसला तय करता है. श्रीरामपुर के रोहित नरेश सांगले ने इस कहावत को सब साबित करते हुए देश की सबसे कठिन मानी जानेवाली संघ लोकसेवा आयोग परीक्षा में सफलता हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया.
नगर परिषद में कंत्राटी सफाई कर्मचारी के पुत्र रोहित ने ऑल इंडिया रैंक 865 हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे श्रीरामपुर, अहिल्या नगर जिले और मेहतर वाल्मीकि समाज का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है. रोहित के पिता नरेश सांगले श्रीरामपुर नगर परिषद में कंत्राटी सफाई कर्मचारी हैं. जबकि उनकी माता एक छोटा किराना व्यवसाय संचालित करती है. सीमित संस्थाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद रोहित ने कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और निरंतर अध्ययन के बल पर यह मुकाम हासिल किया.
* पहले केंद्रीय सेवा, फिर आईएएस का लक्ष्य
रोहित सांगले इससे पहले महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर केंद्र सरकार के ईपीएफओ विभाग में अधिकारी के रुप में कार्यरत थे. नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने अपने अंतिम लक्ष्य से समझौता नहीं किया. नियमित सेवा के साथ-साथ सेल्फ स्टडी जारी रखी और अंतत: यूपीएससी में सफलता प्राप्त कर आईएएस बनने का सपना साकार किया. विशेष बात यह है कि, वर्ष 2025 की यूपीएससी बैच में रोहित सांगले को मेहतर-वाल्मीकि समाज से देशभर का एकमात्र सफल अभ्यर्थी बताया जा रहा है, जिससे समाज में खुशी और गर्व का माहौल है.
* किशोर पिवाल के हाथों माता-पिता का सत्कार
यूपीएससी में सफलता के लगभग दो महीने बाद महाराष्ट्र राज्य मेहतर वाल्मीकि बावनी पंचायत के लोकनियुक्त कार्याध्यक्ष किशोर पिवाल ने रोहित सांगले के निवास पर पहुंचकर उनके माता-पिता और बहन का सम्मान किया. इस दौरान रोहित की उपलब्धि को पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए उनके प्रशासनिक जीवन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी गई.
* परिवार भी उपलब्धियों से भरा
रोहित की पत्नी दिल्ली में केंद्रीय नीति आयोग में उच्च पदस्थ अधिकारी के रुप में कार्यरत है, जबकि उनकी बहन श्रीरामपुर के सरकारी अस्पताल में चिकित्सक हैं. परिवार की यह उपलब्धि शिक्षा और संघर्ष की ताकत का प्रेरक उदाहरण बन गई है.





