अकोट में खाद संकट से हड़कंप

यूरिया के लिए सुबह 4 बजे से कतारें

* खरीफ सीजन से पहले किसानों की बढ़ी परेशानी
* 400 से अधिक किसान घंटों इंतजार करते रहे
अकोला/दि.10 – महाराष्ट्र में खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू होते ही अकोला जिले के अकोट में यूरिया खाद की कथित कमी को लेकर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. सीमित मात्रा में यूरिया उपलब्ध होने की सूचना मिलते ही सैकड़ों किसान मंगलवार तड़के ही कृषि सेवा केंद्र के बाहर पहुंच गए. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा.
जानकारी के अनुसार, अकोट के एक कृषि सेवा केंद्र पर यूरिया की खेप आने की खबर फैलते ही किसान सुबह करीब चार बजे से ही केंद्र के बाहर जमा होने लगे. देखते ही देखते वहां 400 से अधिक किसानों की भीड़ लग गई, जिनमें बड़ी संख्या में महिला किसान भी शामिल थीं. किसान कई घंटों तक कतार में खड़े होकर खाद मिलने का इंतजार करते रहे. हालांकि केंद्र पर केवल लगभग 200 बोरी यूरिया ही उपलब्ध थी. ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को खाद नहीं मिलने की आशंका पैदा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया. सीमित स्टॉक को देखते हुए विक्रेता ने प्रत्येक किसान को केवल एक बोरी यूरिया देने का निर्णय लिया. इस पर कई किसानों ने नाराजगी जताई और अधिक खाद की मांग को लेकर बहस शुरू हो गई. विवाद बढ़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.
* बेमौसम बारिश के बाद नई चुनौती
क्षेत्र के किसान पहले ही बेमौसम बारिश से हुए नुकसान से जूझ रहे हैं. ऐसे में खरीफ बुवाई के ठीक पहले यूरिया की उपलब्धता को लेकर पैदा हुई समस्या ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है. किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसलों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
* प्रशासन ने टंचाई से किया इनकार
घटना के बाद कृषि विभाग ने यूरिया की वास्तविक कमी होने से इनकार किया है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिला और तहसील स्तर पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध है. उनके अनुसार, कुछ केंद्रों पर एक साथ बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने से कमी जैसी स्थिति दिखाई देती है. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि खाद आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं.
* अन्य राज्यों में भी उठ रहे सवाल
यूरिया की उपलब्धता को लेकर देश के कई राज्यों में किसानों की नाराजगी सामने आ रही है. पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में भी किसान संगठनों ने यूरिया की कमी, कालाबाजारी तथा खाद के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के दबाव जैसे आरोपों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है.
* मांग बढ़ने से बनती है संकट की स्थिति
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ सीजन की शुरुआत में यूरिया की मांग अचानक बढ़ जाती है. दूसरी ओर आपूर्ति में बाधाएं, आयात पर निर्भरता और कुछ क्षेत्रों में जमाखोरी की शिकायतों के कारण स्थानीय स्तर पर कमी जैसी स्थिति बन जाती है. महाराष्ट्र के कई जिलों में पहले भी कृत्रिम संकट और खाद की अनिवार्य लिंकिंग की शिकायतें सामने आ चुकी हैं.
* अकोट में कपास का रकबा बढ़ा, सोयाबीन और तुअर की उत्पादकता घटी
अकोट तहसील के खरीफ फसलों के आंकड़े बताते हैं कि कपास का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, जबकि सोयाबीन और तुअर जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में गिरावट दर्ज की गई है. कृषि विभाग के अनुसार मौसम में बदलाव, अनियमित वर्षा तथा कीट एवं रोगों के बढ़ते प्रकोप का असर उत्पादन पर पड़ा है.
वर्ष 2024-25 में कुल खरीफ क्षेत्र 64,673.52 हेक्टेयर था, जो 2025-26 में 64,591.50 हेक्टेयर रहा. आगामी 2026-27 सीजन में इसे बढ़ाकर 67,800 हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है. कपास का क्षेत्र 2024-25 में 46,210 हेक्टेयर था, जो 2025-26 में बढ़कर 49,781 हेक्टेयर हो गया. आगामी सीजन में इसके 51,800 हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं सोयाबीन का क्षेत्र 11,672.70 हेक्टेयर से घटकर 9,112.80 हेक्टेयर रह गया. इसकी उत्पादकता भी 1,137.07 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर 734.46 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर आ गई.
इसी तरह तुअर का क्षेत्र 6,479.50 हेक्टेयर से घटकर 5,663 हेक्टेयर रह गया, जबकि इसकी उत्पादकता 1,547.52 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर 1,350.72 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई. कृषि विभाग ने आगामी सीजन में तुअर का क्षेत्र 6,900 हेक्टेयर तक बढ़ाने और उत्पादकता 1,700 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
खरीफ सीजन के ऐन पहले यूरिया को लेकर पैदा हुई स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो इसका असर फसल उत्पादन और कृषि अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है.

Back to top button