अमरावती विधान परिषद सीट के चुनाव में

अब आगे क्या, कांग्रेस में चल रहा मंथन

* ‘हर्षजीत’ मामले पर हुई कांग्रेस नेताओं की बैठक
* पार्टी नेतृत्व को पूरी जानकारी देने की बात हुई तय
* प्रदेशाध्यक्ष सपकाल के निर्णय पर भूमिका तय करने का फैसला
अमरावती/दि.12 – विधान परिषद की सीट हेतु अमरावती के स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस द्बारा प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारे गये हर्षजीत देशमुख ने नामांकन प्रक्रिया के बाद खुद को बीमार दर्शाते हुए इस तरह का ‘यू-टर्न’ लिया है. उसकी वजह से कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारियों के सामने विधान परिषद के चुनाव में एक अभूतपूर्व संकट खडा हो गया है. ऐसी स्थिति में अब आगे क्या किया जाए, इस विषय को लेकर विचारमंथन करने हेतु गत रोज स्थानीय कांग्रेस नगर रोड स्थित सांसद बलवंत वानखडे के जनसंपर्क कार्यालय में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं व पदाधिकारियों की बैठक हुई. जिसमें यह तय किया गया कि पार्टी नेतृत्व को पूरे मामले की जानकारी दी जायेगी. साथ ही कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की ओर से मिलनेवाले दिशा निर्देशों के आधार पर आगे की भूमिका तय की जायेगी. इस बैठक में सांसद बलवंत वानखडे, पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख व एड. यशोमती ठाकुर, पूर्व विधायक वीरेंद्र जगताप, कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख तथा मनपा के नेता प्रतिपक्ष व पूर्व महापौर विलास इंगोले उपस्थित थे.
बता दे कि कांगे्रस द्बारा इस बार स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र में विधान परिषद की सीट हेतु होने जा रहे चुनाव में मूलत: नागपुर से वास्ता रखनेवाले उद्योजक हर्षजीत देशमुख को अपना प्रत्याशी बनाया गया था. जिन्होंने कांग्रेस नेताओं के साथ जिलाधीश कार्यालय पहुंचकर जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपनी दावेदारी पेश की थी. साथ ही वे नामांकन वापसी का समय समाप्त होने तक अमरावती में ही डटे हुए है. लेकिन इसके बाद हर्षजीत देशमुख अचानक ही सभी के लिए ‘आउट ऑफ कवरेज’ तथा ‘नॉट रिचेवल’ हो गये थे. सभी को आश्चर्य का झटका तब लगा जब दो दिन पहले हर्षजीत देशमुख के बीमार रहने एवं इलाज हेतु नागपुर के एक अस्पताल में भर्ती रहने की जानकारी सामने आयी. इसके साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख तथा कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलना भी शुरू हो गया. जिसके तहत जहां कांग्रेस की तेजतर्रार महिला नेत्री व पूर्व मंत्री एड. यशोमती ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि इस मामले में 15 से 20 करोड रूपयों का लेनदेन हुआ है. जिसके चलते हर्षजीत देशमुख ने चुनावी मैदान से जानबूझकर अपने कदम पीछे खींच लिए है. वहीं दूसरी ओर हर्षजीत देशमुख ने उस पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हए बताया कि एक दो दिन में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जायेगी. जिसके बाद वे अमरावती पहुंचकर अपने चुनाव प्रचार में जुट जायेंगे. इस ी बात पर पूर्व राज्यमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि अब चुनाव मे केवल 5 से 6 दिन का समय बचा हुआ है. ऐसी स्थिति में अगर हर्षजीत देशमुख अमरावती आते भी है तो वे पूरे जिले भर का दौरा करते हुए सभी मतदाता सदस्यों से कैसे मुलाकात कर पायेंगे. यह अपने आपमें सबसे बडा सवाल है.
गत रोज सांसद बलवंत वानखडे के जनसंपर्क कार्यालय में हुई बैठक में शामिल कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना रहा कि चुनाव प्रचार के दौरान तथा बीमार होेकर अस्पताल में भर्ती होने के बाद किसी भी वक्त हर्षजीत देशमुख ने कांग्रेस के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं से कभी कोई संवाद नहीं किया. बल्कि हमेशा उनके निजी सहायक से ही बातचीत हुआ करती थी. साथ ही नामांकन प्रक्रिया के खत्म होते ही हर्षजीत देशमुख किसी को भी सूचित किए बिना अचानक ही नागपुर वापिस चले गये और फिर वहां जाकर अस्पताल में भर्ती भी होे गये. जिस तरह से अमरावती विधान परिषद के चुनाव में हर्षजीत देशमुख किसी धुमकेतू की तरह प्रकट हुए और फिर अचानक ही गायब हो गये, उसे देखते हुए यह पूरा मामला काफी संदेहास्पद दिखाई दे रहा है और पूरी संंभावना है कि शायद यह सबकुछ पहले से मैनेज था. ऐसे में अब इस पूरे मामले की जानकारी पार्टी हाईकमान को दी जायेगी. साथ ही यह भी देखा जायेगा कि पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हषैवर्धन सपकाल द्बारा इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और उनके द्बारा किस तरह के निर्देश दिए जाते हैं. इसके बाद ही कांग्रेस के स्थानीय नेताओं द्बारा अपनी आगे की रणनीति और भूमिका को तय किया जायेगा.
* ‘वंचित’ के प्रत्याशी को समर्थन देना अभी तय नहीं
विषेश उल्लेखनीय है कि काग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख द्बारा ऐन चुनावी धामधूम के बीच अस्पताल में भर्ती होकर अप्रत्यक्ष तौर पर खुद को चुनाव से अलग कर लिए जाने के बाद इस चर्चा ने जोर पकडा था कि अब शायद मौजूदा स्थिति को देखते हुए कांग्रेस द्बारा वंचित बहुजन आघाडी के प्रत्याशी डॉ. नीलेश विश्वकर्मा की दावेदारी का समर्थन किया जा सकता है. परंतु गत रोज बैठक के दौरान जब यह विषय चर्चा में आया तो कांग्रेस के स्थानीय वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख का कहना रहा कि यह निर्णय कांग्रेस एवं वंचित बहुजन आघाडी के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर होगा. जिसके बारे में स्थानीय स्तर पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता. साथ ही डॉ. देशमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल तक वंचित बहुजन आघाडी के प्रत्याशी डॉ. नीलेश विश्वकर्मा की दावेदारी का कांग्रेस की ओर से समर्थन किए जाने को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है. ऐसे में अब पूरा मामला इसी बात पर टिका हुआ है कि इस संदर्भ में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्बारा क्या निर्णय लिया जाता है.

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