आषाढ़ी वारी से पहले बड़ा फैसला
23 और 24 जून को बंद रहेगा विठ्ठल मंदिर

* विठुराया की प्रतिमा पर होगा विशेष संरक्षण कार्य
* श्रद्धालुओं से दर्शन के लिए न आने की अपील
* एएसआई की देखरेख में होगी वैज्ञानिक संवर्धन प्रक्रिया
* प्रतिमा का क्षरण रोकने के लिए उठाया गया कदम
पंढरपुर / दि. 13- आषाढ़ी वारी के लिए देशभर से लाखों वारकरियों के पंढरपुर पहुंचने से पहले मंदिर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. पंढरपुर स्थित श्री विठ्ठल रूक्मिणी मंदिर संस्थान में 23 और 24 जून को सभी प्रकार के दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे. इस दौरान भगवान विठ्ठल की प्रतिमा पर विशेष संरक्षण एवं संवर्धन कार्य किया जाएगा. मंदिर प्रशासन ने वारकरी, श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इन दो दिनों में पंढरपुर दर्शन के लिए न आने की अपील की है, ताकि संवर्धन कार्य बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके.
* प्रतिमा पर होगा विशेष रासायनिक लेपन
जानकारी के अनुसार भगवान विठ्ठल की प्राचीन प्रतिमा में समय के साथ प्राकृतिक क्षरण (झीज) के संकेत दिखाई दिए हैं. इसे देखते हुए जिला प्रशासन, मंदिर समिति, वारकरी प्रतिनिधियों तथा पुरातत्व विशेषज्ञों की बैठक आयोजित की गई थी. विशेषज्ञों की सलाह के बाद 22 से 24 जून के बीच प्रतिमा पर वैज्ञानिक पद्धति से विशेष संरक्षण लेपन (प्रोटेक्टिव कोटिंग) करने का निर्णय लिया गया. इस प्रक्रिया के तहत प्रतिमा के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की जाएगी तथा उसके दीर्घकालीन संरक्षण के लिए विशेष रासायनिक एवं जैविक तत्वों का उपयोग किया जाएगा.
* प्रतिमा के चरणों के पास दिखी झीज
विशेषज्ञों के निरीक्षण में प्रतिमा के चरणों के समीप कुछ हिस्सों में घिसाव और गड्ढेनुमा संरचना बनने की जानकारी सामने आई है. इसके अलावा प्रतिमा के अन्य कुछ भागों में भी समय के प्रभाव से क्षरण देखा गया है. संवर्धन कार्य के दौरान मूल पत्थर से मेल खाने वाली विशेष दगड़ी पाउडर तथा जैविक रसायनों की सहायता से इन हिस्सों की मरम्मत की जाएगी. साथ ही प्रतिमा को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सुरक्षा परत भी चढ़ाई जाएगी.
* एएसआई और विशेषज्ञ करेंगे निगरानी
पूरी प्रक्रिया केन्द्रीय पुरात्व विभाग, राज्य पुरातत्व विभाग तथा प्रतिमा संरक्षण विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न होगी. मंदिर प्रशासन का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और प्रतिमा की पवित्रता को बनाए रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण कार्य किया जाएगा. भगवान विठ्ठल की प्रतिमा का संरक्षण कार्य इससे पहले भी कई बार किया जा चुका है. वर्ष 1988, 2005, 2012 और 2020 में प्रतिमा पर विशेष लेपन और संरक्षण कार्य किया गया था. लगभग पांच वर्ष बाद एक बार फिर प्रतिमा के संरक्षण की आवश्यकता महसूस होने पर यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
* आषाढ़ी वारी से पहले महत्वपूर्ण तैयारी
हर वर्ष आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर लाखों वारकरी पंढरपुर पहुंचकर भगवान विठ्ठल के दर्शन करते हैं. मंदिर प्रशासन का मानना है कि वारी शुरू होने से पहले प्रतिमा का संरक्षण कार्य पूरा हो जाने से दर्शन व्यवस्था सुचारु रहेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सकेगा. 23 और 24 जून को विठ्ठल मंदिर दर्शन के लिए पूर्णतः बंद रहेगा. इन दोनों दिनों में सामान्य दर्शन, विशेष दर्शन अथवा अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए भी मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.





