‘कोणार्क’ पर मेहरबान हुई मनपा, 50 फीसद देयक मंजूर !
महापौर व स्थायी समिति सभापति ने लगाई मुहर

* पहले बैठक, फिर निर्णय, हंगामा मचना तय
* आमसभा में तीन माह के देयकों का भुगतान रोकने की बात हुई थी तय
अमरावती/दि.13 – अमरावती महानगरपालिका में कचरा संकलन व कचरा ढुलाई का एकल्प व संयुक्त ठेका प्राप्त रहनेवाली कोणार्क कंपनी के लचर कामकाज पर कार्रवाई करने की बजाय मनपा के सत्ताधारी पदाधिकारियों द्बारा अपेक्षाकृत नर्म भूमिका अपनाई गई है. जिसके चलते ठेका करार के नियमों व शर्तो का उल्लंघन करनेवाली कोणार्क कंपनी के 50 फीसद देयकों को अदा करने को महापोर श्रीचंद तेजवानी एवं स्थायी समिति सभापति सत्तापक्ष के प्रमुख पदाधिकारियों द्बारा मंजूरी दी गई है. जिसके चलते कोणार्क कंपनी को 22 लाख रूपयों का भुगतान अदा किया जायेगा. मनपा के सत्तापक्ष द्बारा लिए गये इस फैसले पर अच्छा खासा आश्चर्य जताया जा रहा है.
विशेष उल्लेखनीय है कि कोणार्क कंपनी द्बारा मनमाने एवं लचर तरीके से किए जानेवाले कामकाज को देखते हुए मनपा की आमसभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि कोणार्क कंपनी के तीन माह के देयकों का भुगतान रोका जायेगा. लेकिन इसके बावजूद भी अपने ही द्बारा दी गई रूलिंग की अनदेखी करते हुए मनपा के सत्तापक्ष द्बारा कोणार्क कंपनी को 22 लाख रूपयों का भुगतान अदा किए जाने को मंजूरी दी गई है. जिसे लेकर अच्छा खासा आश्चर्य जताया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर नियमित वेतन नहीं मिलने से त्रस्त कर्मचारियों द्बारा कामबंद आंदोलन शुरू किए जाने के चलते शहर में कचरे व गंदगी की जबर्दस्त समस्या बनी हुई है.
* कामगारों का आर्थिक शोषण, ईपीएफ बकाया
स्वच्छता कर्मचारियों को समय पर एवं निर्मित वेतन नहीं मिलने के चलते ठेका नियुक्त सफाई कामगारों में कोणार्क कंपनी के खिलाफ तीव्र संताप की लहर है. वेतन के साथ ही कंपनी ने कामगारों के अधिकारपूर्ण ईपीएफ व ईएसआयसी की निधि भी जमा नहीं कराई है. जिसके चलते कामगरों का जबर्दस्त आर्थिक शोषण हो रहा है.
* ंपूरे शहर में कचरे का साम्राज्य, मुख्य क्षेत्रों में काम ठप
शहर के प्रभाग क्रमांक 21-22 में गुरूवार को साफ सफाई के काम पूरी तरह से ठप है. साथ ही साईनगर, अंबापेठ व महेन्द्र कॉलनी परिसरों में कल शुक्रवार को कचरा उठाने का काम पूरी तरह से बंद रहा. आये दिन किस तरह से शहर में साफ सफाई के काम बंद रहने के चलते पूरे शहर में कचरे व गंदगी की समस्या बनी हुई है. साथ ही साथ शहर के लगभग सभी रिहायशी इलाकों सहित प्रमुख व्यापारी क्षेत्रों में हर ओर कचरे व गंदगी के ढेर लगे दिखाई दे रहे है.
* खुद आमसभा ने दी थी कोणार्क का पेमेंट रोकने की रूलिंग
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि अमरावती मनपा में कचरा संकलन व कचरा ढुलाई का ठेका हासिल करने से लेकर अब तक ठेकेदार एजेंसी कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर एजेंसी अपने लचर कामकाज के चलते लगातार चर्चा एवं विवादों में घिरी रही और कोणार्क कंपनी द्बारा साफ सफाई को लेकर सही ढंग से कामकाज नहीं करने के बारे में आम नागरिकों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्बारा ही हमेशा ही रोष व असंतोष व्यक्त किया जाता रहा. यही वजह रही कि अमरावती मनपा के इतिहास में पहली बार साफ सफाई के मुद्दे पर चर्चा करने हेतु मनपा की विशेष आमसभा बुलाई गई. जिसमें लगातार 8 से 9 घंटे तक केवल और केवल साफ सफाई के मुद्दे पर ही चर्चा होती रही. जिसके उपरांत समस्या का आकलन करने एवं समाधान सुझाने हेतु सर्वतलीय पार्षदों का समावेश कर स्वच्छता समिति का गठन किया गया था और समिति ने लगातार दो माह तक अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट मनपा के सदन में रखी थी. जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया थाा कि ठेका एजेंसी कोणार्क द्बारा ठेेके के नियमों व शर्तो के अनुरूप सही ढंग से काम नहीं किया जा रहा. जिसके बाद आमसभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया. ताकि कोणार्क कंपनी के तीन माह के देयकों का भुगतान रोक दिया जाए. लेकिन हैरत की बात यह है कि आमसभा में खुद अपने ही द्बारा रूलिंग दिए जाने के बाद महापौर श्रीचंद तेजवानी ने स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर सहित सत्तापक्ष के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक करते हुए कोणार्क कंपनी को तीन माह के देयकों में से 50 फीसद की राशि का भुगतान करने को मंजूरी दे दी है. ऐसे में अब मनपा के सत्तापक्ष द्बारा लिए गये इस निर्णय पर जबर्दस्त हंगामा मचना तय माना जा रहा है.





