शालेय किताबों की खरीददारी के लिए अभिभावकों की भीड
किताबों की कीमतों में बढोत्तरी, नोटबुक और रजिस्टर के भाव हुए कम

* स्टेट बोर्ड की तुलना में इंटरनेशनल बोर्ड के यूनिफार्म महंगे
अमरावती/दि.13– स्कूल की घंटी अब शुरु होने को है. राज्य की इंटरनेशनल व सीबीएसई बोर्ड की स्कूलें 15 जून से शुरु होगी. वहीं स्टेट बोर्ड की स्कूलें 30 जून से शुरु होने जा रही है. इस कारण अभिभावकों की बाजार में किताबें खरीदने का भागमभाग शुरु हो चुकी है. इस बार स्कूल प्रशासन ने किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को विशेष दुकान का नामोल्लेखन नहीं किया है. लेकिन यूनिफॉर्म के मामले में यह सख्ती की है. जिसके कारण अभिभावकों पर भले ही किताबों का बोझ न पडा हो लेकिन यूनिफॉर्म का बोझ अवश्य पडने लगा है. स्कूल शुरु होने से पहले अब अभिभावकों को बच्चों की किताबें, यूनिफॉॅर्म जैसी शैक्षणिक सामग्री पर 40 फीसदी तक अधिक खर्च करना पड रहा है.
बाजार में स्टेट बोर्ड से अधिक सीबीएसई व अन्य इंटरनेशनल बोर्ड के विद्यार्थी व उनके अभिभावकों की खरीददारी के लिए भीड दिखाई देने लगी है. जिसके कारण इन दिनों कुछ प्रतिष्ठानों में विद्यार्थियों की उपस्थिति देखी जा सकती है. जो अपने सालाना पढाई के लिए अभिभावकों से किताबों की मांग करने लगे हैं. ऐसे में अब किताबों का खर्च बढने से अभिभावक भी परेशानी में दिखाई देने लगे हैं. जहां स्टेट बोर्ड की किताबों का खर्च कम है वहीं सीबीएसई व इंटरनेशनल बोर्ड की किताबें 2500 रुपए से 4500 रुपए तक में अभिभावकों को खरीदनी पड रही है. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी स्टेट बोर्ड द्वारा विद्यार्थियों को नि:शुल्क किताबों का वितरण किया जा रहा है. जिसमें कक्षा पहली से 8 वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 11 लाख से अधिक किताबे में जिला परिषद के सर्वशिक्षा अभियान कार्यालय में पहुंच चुकी है. लेकिन फिर भी जो विद्यार्थी इन किताबों से वंचित रहता है, उसके लिए बाजार में स्टेट बोर्ड की किताबें उपलब्ध करवायी हैं. अगर इन किताबों के सेट की बात करें तो इसका सेट कम से कम 130 से 600 तक उपलब्ध हो जाता है. इस साल स्टेट बोर्ड ने कुल चार कक्षाओं के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है. इस कारण पिछले साल जिन विद्यार्थियों को प्रशासन ने किताबों का वितरण किया था, अब उन कक्षा दूसरी, तीसरी, चौथी व छठी की किताबें छात्रों के काम नहीं आयेगी. ऐसे में विद्यार्थियों को अब नये सेट लेने होंगे. हालाकि स्कूल शुरु होने के बाद पहले दिन ही छात्रों को स्कूल द्वारा किताबों का वितरण होता है. लेकिन अगर उसमें किसी किताब की कमी रहेगी तो उन्हें वह किताब बाजार से खरीदनी पड सकती है. इसलिए स्टेट बोर्ड की किताबों का सेट यहां उपलब्ध करवाया है.
तखतमल इस्टेट स्थित द यूनिफार्म हाउस के संचालक आशीष सावरकर ने बताया कि, हमारे यहां विगत 15 सालों से स्कूल यूनिफार्म का काम किया जाता है. पहले हम केवल जिला परिषद की स्कूलों को यूनिफार्म उपलब्ध करवाते थे. लेकिन अब शहर की करीब 25 स्कूलों को यूनिफार्म उपलब्ध करवाया जाता है. जिसमें ज्ञानमाता हाईस्कूल, होलीक्रॉस मराठी हाईस्कूल, होलीक्रॉस इंग्लिश हाईस्कूल, स्कूल ऑफ स्कॉलर, गणेशदास राठी विद्यालय, सेंट झेवियर्स स्कूल जैसी नामचीन स्कूलों के यूनिफार्म की जिम्मेदारी द यूनिफार्म हाउस संभाल रहा है. इस साल अन्य वस्तुओं की कीमतें भले ही बढी हो लेकिन यूनिफार्म की कीमतों पर विशेष असर नहीं पडा है. हमारे यहां ग्राहकों को रिजनेबल तथा होलसेल रेट में यूनिफार्म उपलब्ध होने से इस साल रेट में किसी प्रकार की बढोत्तरी नहीं की गई है. जिसके कारण बच्चों को पिछले साल के रेट अनुसार ही यूनिफार्म उपलब्ध करवाये जा रहे हैं. हालांकि पहले ही स्कूल प्रशासन की ओर से बच्चों को एक से अधिक यूनिफार्म लेने की सख्ती बरती जाती है. जिसके कारण अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढने लगा है. जैसे कि, पोदार स्कूल में विद्यार्थियों को नियमित शिक्षा के दौरान कुल तीन यूनिफार्म अनिवार्य किये हैं. जिसकी कीमत करीब 5 हजार रुपए तक होगी. वहीं अन्य स्कूलों के यूनिफार्म भी 1 हजार रुपए तक आते हैं. जिसमें स्कूल ड्रेस, सॉक्स, टाय, बेल्ट जैसी वस्तुओं का समावेश है.
* नोटबुक, रजिस्टर पर अब 12 फीसदी जीएसटी
राजकमल चौक स्थित लाठिया बुक डेपो के संचालक चेतन लाठिया ने बताया कि, एक तरफ सीबीएसई व इंटरनेशनल बोर्ड की किताबों की कीमत पिछले साल के मुकाबले 30 से 40 फीसदी तक बढी है. वहीं स्टेट बोर्ड के नये पाठ्यक्रम वाली कक्षाओं की किताबों का खर्च भी उतना ही बढा है. लेकिन किताबों की तुलना में नोटबुक व रजिस्टर जैसी शैक्षणिक सामग्री का खर्च कुछ घट है. पहले नोटबुक पर 18 फीसदी तक जीएसटी लगता था, लेकिन नये स्लैब के कारण नोटबुक की कीमतें 12 फीसदी जीएसटी के साथ रहने से अभिभावकों को कुछ राहत मिली है. अब नोटबुक 480 से 600 रुपए डर्जन तक बिक रही है. जो पहले इससे अधिक कीमत की होती थी.
* अभिभावकों की चिंता बढी
किताबों तथा यूनिफार्म की दुकानों में खरीददारी के लिए आने वाले अभिभावकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड रहा है. एक प्रतिष्ठान में उपस्थित अभिभावक ने बताया कि, उनके जुडवा बच्चे हैं, जो सामरा में पढते हैं. उनके लिए किताबें तो खरीद ली है. लेकिन अब यूनिफार्म भी खरीदना होगा. जिसका खर्च 1 हजार रुपए से अधिक होगा, क्योंकि मेरे जुडवां बच्चे जो हैं. बता दें कि, उन अभिभावक ने अभिभावक ने अपने सामरा स्कूल में पढ रहे दोनों बच्चों की किताबें व नोटबुक पर करीब 6 हजार रुपए खर्च किये थे.





