जिंदा कछुओं की तस्करी गिरोह का आरोपी बरी
एड. नरेंद्र दुबे की सफल पैरवी

अमरावती/दि.13– लगभग दस वर्ष पुराने बहुचर्चित वन्यजीव तस्करी प्रकरण में अदालत ने मोर्शी निवासी मुख्य आरोपी प्रभाकर नामदेव उके को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है. न्यायालय ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत लगाए गए आरोपों को प्रमाणित न मानते हुए यह फैसला सुनाया. आरोपी की तरफ से एड. नरेंद्र दुबे ने सफल पैरवी की.
जानकारी के मुताबिक 30 जुलाई 2016 को वन परिक्षेत्र अधिकारी कोहळे ने दोपहर करीब 2 बजे खोलापुरी गेट क्षेत्र में दो व्यक्तियों को थैली में जिंदा कछुए ले जाते हुए पकड़ा था. पंचों की उपस्थिति में की गई कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई. बाद में उन्हें गिरफ्तार कर वडाली वन परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया, जहां से जिंदा कछुए जब्त किए गए. न्यायालय के आदेश के बाद इन वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया था. जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने कथित रूप से बताया था कि उन्होंने ये कछुए मोर्शी निवासी प्रभाकर उके से खरीदे थे. इस जानकारी के आधार पर वन विभाग ने प्रभाकर उके को आरोपी बनाया तथा उनके घर से मछली पकड़ने का जाल और अन्य सामग्री जब्त कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया.
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से दो पंचों और तीन वन अधिकारियों की गवाही दर्ज कराई गई. वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता नरेंद्र दुबे और श्वेता आचार्य ने पैरवी की. बचाव पक्ष द्वारा की गई जिरह के दौरान पंचों और वन अधिकारियों की गवाही में कई विसंगतियां सामने आईं. साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में पाए गए विरोधाभासों को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति श्री नरडेले ने आरोपी प्रभाकर उके को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया. इस प्रकरण में आरोपी की तरफ से एड. नरेंद्र दुबे व एड. श्वेता आचार्य ने सफल पैरवी की.