अब भाजपा विधायक आशिष देशमुख का बड़ा दावा
शरद पवार को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष व उद्धव ठाकरे को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनाने की तैयारी?

* देशमुख बोले – कुछ नेता कांग्रेस में विलय का फार्मूला आगे बढ़ा रहे हैं
* अभी तक किसी दल की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
मुंबई/ दि. 13- महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित राजनीतिक पुनर्संरचना और विपक्षी दलों के भविष्य को लेकर चर्चाओं के बीच भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक आशिष देशमुख ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. देशमुख ने आरोप लगाया है कि कुछ राजनीतिक नेता राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) का कांग्रेस में विलय कराने के लिए प्रयासरत हैं. उन्होंने दावा किया कि इस संभावित राजनीतिक रणनीति के तहत वरिष्ठ नेता शरद पवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद दिलाने तथा उध्दव ठाकरे को महाराष्ट्र कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष बनाने की चर्चा कुछ राजनीतिक हलकों में चल रही है.
एक समाचार चैनल से बातचीत में भाजपा विधायक आशिष देशमुख ने कहा कि कुछ नेताओं की इच्छा है कि शरद पवार का दल कांग्रेस में विलीन हो जाए और उसके बाद उन्हें राज्यसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी सौंपी जाए. उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में दिल्ली स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं. देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ लोग बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की भूमिका निभाते हुए विलय की चर्चा को हवा दे रहे हैं. हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया. इसके साथ ही आशीष देशमुख ने आगे दावा किया कि यदि राष्ट्रवादी कांग्रेस का कांग्रेस में विलय होता है, तो उसके बाद शिवसेना (उद्धव गुट) को भी कांग्रेस में शामिल कराने की योजना बनाई जा सकती है. उनके अनुसार, उद्धव ठाकरे के समर्थक सांसदों और संगठन के कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का फार्मूला भी चर्चा में हो सकता है. हालांकि इन दावों की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित दलों ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
क्यों तेज हुईं विलय की चर्चाएं?
पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के बीच भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. महाविकास आघाड़ी के घटक दलों के बीच सहयोग को लेकर विभिन्न राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग संभावनाएं व्यक्त कर रहे हैं. इसी पृष्ठभूमि में आशिष देशमुख के बयान ने राजनीतिक चर्चा को नया आयाम दे दिया है. उनके दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए भविष्य में कोई बड़ा संगठनात्मक प्रयोग हो सकता है.
* सुप्रिया सुले पहले ही कर चुकी हैं इनकार
कुछ दिनों पहले जब राष्ट्रवादी कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर सवाल पूछा गया था, तब सुप्रिया सुले ने स्पष्ट कहा था कि इस संबंध में उनकी पार्टी से किसी ने कोई संपर्क नहीं किया है. उनके इस बयान के बाद विलय की अटकलों को विराम मिलता दिखाई दिया था.
* आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आशिष देशमुख का बयान फिलहाल एक राजनीतिक दावा है. जब तक संबंधित दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आती, तब तक इसे संभावित राजनीतिक अटकलों और आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा ही माना जाएगा. फिलहाल देशमुख के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और महाविकास आघाड़ी के भविष्य को लेकर अटकलों का दौर फिर शुरू हो गया है.





