अमरावती के युवक की मॉब लिंचिंग प्रकरण में 14 गौ-रक्षकों को उम्रकैद

नर्मदापुरम जिला व सत्र न्यायालय का फैसला

नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश)/दि.17 – मॉब लिंचिंग के खिलाफ एक अहम और ऐतिहासिक फैसले में नर्मदापुरम की जिला एवं सत्र अदालत ने महाराष्ट्र के अमरावती निवासी नजीर अहमद की हत्या के मामले में 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने कहा कि कानून अपने हाथ में लेकर भीड़ द्वारा की गई हिंसा किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है.
प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान की अदालत ने वर्ष 2022 में गौ-तस्करी के संदेह में नजीर अहमद की पीट-पीटकर हत्या करने तथा दो अन्य लोगों को गंभीर रूप से घायल करने के मामले में आरोपियों को दोषी ठहराया. न्यायालय ने अपने फैसले में हमले को बर्बर और क्रूर बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं. दोषी ठहराए गए आरोपियों में दीपक उर्फ बाबा केवट, अजय उर्फ अज्जू राठौर, प्रकाश कौशल, पवन बाथम, अमर उर्फ भोला बाथम, कन्हैया बाथम और बल्लू उर्फ अनुज रघुवंशी सहित कुल 14 आरोपी शामिल हैं. सभी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2-3 अगस्त 2022 की रात ट्रक चालक शेख लाला अपने साथियों नजीर अहमद और शेख मुश्ताक के साथ मवेशियों को लेकर नंदरवाड़ा से महाराष्ट्र जा रहे थे. इसी दौरान नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा क्षेत्र के बारावाड़ गांव के पास ग्रामीणों की एक भीड़ ने उनके वाहन को रोक लिया. गौ-तस्करी का आरोप लगाते हुए भीड़ ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से तीनों पर हमला कर दिया. हमले में नजीर अहमद गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. वहीं शेख लाला और शेख मुश्ताक को भी गंभीर चोटें आईं. इस फैसले को मॉब लिंचिंग के मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी संदेह के आधार पर कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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