चिरंजीवी टूरिज्म ने पर्यटकों के आरोपों को बताया निराधार
संचालक संदीप पांडे ने जारी किया स्पष्टीकरण

* कहा- पूरी यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई
* हमें नाहक बदनाम करने की हो रही कोशिश
अमरावती / दि. 18- मनाली-धर्मशाला-डलहौजी पर्यटन पैकेज को लेकर कुछ पर्यटकों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब चिरंजीवी टूरिज्म की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया है. संस्था के संचालक संदीप पांडे ने सभी आरोपों को निराधार, भ्रामक और पर्यटन व्यवसाय को बदनाम करने का प्रयास बताया है.
उल्लेखनीय है कि सर्वश्री जितेंद्रसिंह राजकुमार, विवेक मार्कंडेय, रामसिंग येवतीकर, सुजीत देशमुख सहित अन्य पर्यटकों ने हाल ही में पत्रकार परिषद आयोजित कर चिरंजीवी टूरिज्म पर यात्रा के दौरान अव्यवस्था, सुविधाओं की कमी और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए थे. इसके जवाब में संस्था की ओर से विस्तृत पक्ष सामने रखा गया है.
* 23,500 रुपये में दिया गया विस्तृत टूर पैकेज
पर्यटकों द्बारा लगाए गये आरोपों का जवाब देते हुए चिंरजीवी टूरिज्म के संचालक संदीप पांडे ने बताया कि संबंधित पर्यटक समूह ने अत्यंत किफायती दर पर मनाली, रोहतांग पास, धर्मशाला, डलहौजी, खज्जियार और अमृतसर का पर्यटन पैकेज बुक किया था. इस पैकेज में नागपुर से नागपुर तक थर्ड एसी रेल यात्रा, रोहतांग पास परमिट, होटल व्यवस्था और स्थानीय भ्रमण शामिल था. प्रति व्यक्ति 23,500 रुपये की लागत वाले इस पैकेज में ग्राहकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर व्यवस्था की गई थी. उन्होंने कहा कि कई मामलों में पर्यटकों को उनके पैकेज के स्तर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं. पर्यटन सीजन के दौरान सीमित बजट में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना किसी भी टूर ऑपरेटर के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, इसके बावजूद कंपनी ने गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने का प्रयास किया.
* होटल संबंधी आरोपों का किया खंडन
मनाली स्थित होटल न्यू समिता ग्रैंड को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए संदीप पांडे ने कहा कि होटल पूरी तरह संचालित और व्यवस्थित था. इसे निर्माणाधीन बताना तथ्यहीन और भ्रामक है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि होटल का निर्धारित चेक-इन समय दोपहर 2 बजे है और पर्यटकों को नियमानुसार उसी समय कमरे उपलब्ध कराए गए. ऐसे में होटल प्रबंधन पर लगाए गए आरोप उचित नहीं हैं.
* टूर मैनेजर पर्यटकों ने स्वयं नहीं लिया
टूर मैनेजर की अनुपस्थिति संबंधी शिकायत पर चिरंजीवी टूरिज्म ने कहा कि यात्रा के दौरान टूर मैनेजर की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती थी, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता. यह जानकारी पहले ही पर्यटकों को दी गई थी और उन्होंने स्वयं इस सुविधा को लेने से इनकार किया था.
* ड्राइवर द्वारा पैसे मांगने का आरोप खारिज
कंपनी ने कहा कि पूरी यात्रा पूर्व भुगतान के आधार पर आयोजित की गई थी. ऐसे में ड्राइवर द्वारा अतिरिक्त पैसे मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता. उल्टा पर्यटकों ने स्वयं स्वीकार किया है कि वाहन और चालक निर्धारित समय से पहले रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध थे, जिससे कंपनी की व्यवस्था की पुष्टि होती है.
* किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं हुआ
पर्यटकों द्वारा एक लाख रुपये के मुआवजे की मांग को निराधार बताते हुए संदीप पांडे ने कहा कि पूरी यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई. सभी पर्यटक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न पर्यटन स्थलों पर गए, होटल में ठहरे और सुरक्षित अपने गंतव्य तक लौटे. उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान किसी भी होटल या स्थानीय सेवा प्रदाता की ओर से पर्यटकों को कोई गंभीर परेशानी होने की जानकारी नहीं मिली. इसके अलावा सुबह चार बजे नाश्ते की व्यवस्था करना हर होटल के लिए संभव नहीं होता, फिर भी तीन दिनों के लिए पैकेज से अलग लगभग 9 हजार रुपये नाश्ते की व्यवस्था पर खर्च किए गए.
* 20 दिन बाद की गई धनवापसी की मांग
चिरंजीवी टूरिज्म के अनुसार यात्रा समाप्त होने के लगभग 20 दिन बाद अचानक आर्थिक मुआवजे की मांग की गई. संस्था का दावा है कि पत्रकार परिषद आयोजित करने से पहले संबंधित पर्यटक उनके कार्यालय पहुंचे थे और धनवापसी की मांग की थी. कंपनी का कहना है कि यदि यात्रा इतनी खराब होती तो तत्काल शिकायत दर्ज कराई जाती, लेकिन यात्रा पूरी होने और सभी पर्यटकों के सुरक्षित लौट आने के बाद मुआवजे की मांग करना संदेह पैदा करता है.
* ग्राहकों का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी
संचालक संदीप पांडे ने कहा कि चिरंजीवी टूरिज्म पिछले कई वर्षों से हजारों पर्यटकों को सफलतापूर्वक सेवाएं प्रदान कर रहा है. संस्था की पहचान ग्राहकों के विश्वास और संतोषजनक सेवाओं के आधार पर बनी है. उन्होंने कहा, किसी भी ग्राहक के साथ धोखाधड़ी या जानबूझकर असुविधा पैदा करने का प्रश्न ही नहीं उठता. लगाए गए आरोप तथ्यों से परे हैं और हमारी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए प्रतीत होते हैं.
फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के दावे सामने आ चुके हैं. ऐसे में वास्तविक स्थिति का आकलन संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है.





