मराठा आरक्षण आंदोलन में बड़ा घटनाक्रम

प्रसाद लाड के आश्वासन पर मनोज जरांगे ने खत्म किया अनशन

* दो दिन में सभी स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचेगा शासनादेश
* फीस लेने वालों को राशि लौटाने का भरोसा
मुंबई/अंतरवाली सराटी/दि. 19 – मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब भाजपा विधायक प्रसाद लाड के ठोस आश्वासन के बाद मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटील ने अपना अनशन वापस ले लिया. अंतरवाली सराटी में हुई मुलाकात के दौरान प्रसाद लाड ने घोषणा की कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए आरक्षण एवं शैक्षणिक रियायतों संबंधी शासनादेश (जीआर) अगले दो दिनों में राज्य के सभी स्कूलों और महाविद्यालयों तक पहुंचा दिए जाएंगे. जिन विद्यार्थियों से नियमों के बावजूद फीस वसूल की गई है, उन्हें वह राशि वापस दिलाई जाएगी.
मनोज जरांगे पाटील ने मुलाकात के दौरान सवाल उठाया कि सरकार द्वारा मराठा समाज को शैक्षणिक लाभ देने के लिए आदेश जारी किए जाने के बावजूद अनेक स्कूल और महाविद्यालय छात्रों से शत-प्रतिशत फीस वसूल रहे हैं. उन्होंने पूछा कि यदि शासन ने निर्णय लिया है तो उसकी प्रभावी अमलबजावणी क्यों नहीं हो रही है और विद्यार्थियों को वास्तविक लाभ कब मिलेगा. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने कहा कि जो अधिकारी सरकार के आदेशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री से इस विषय पर चर्चा कर आवश्यक निर्देश जारी कराए जाएंगे तथा सोमवार तक सभी शैक्षणिक संस्थानों को स्पष्ट आदेश भेजे जाएंगे.
* भर चुकी फीस लौटाने का आश्वासन
प्रसाद लाड ने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने पहले ही फीस जमा कर दी है, उन्हें राशि वापस दिलाने के लिए सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. इस विषय को मराठा उपसमिति की बैठक में भी रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार केवल घोषणाएं नहीं कर रही, बल्कि निर्णयों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है.
* मेरे शब्द पर जरांगे ने अनशन तोड़ा
मुलाकात के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रसाद लाड ने कहा कि मनोज जरांगे ने उनके शब्द और भरोसे पर अनशन समाप्त किया है. इसके लिए उन्होंने जरांगे का आभार व्यक्त किया. साथ ही उन्होंने अपील की कि अब आगे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बार-बार आंदोलन और उपोषण का रास्ता नहीं अपनाया जाए. उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों में मराठा समाज से जुड़े जितने शासनादेश जारी हुए हैं, उतनी तेजी पहले कभी देखने को नहीं मिली. सरकार लगातार निर्णय लेकर उन्हें लागू करने की दिशा में काम कर रही है.
* अधिकारियों को दी चेतावनी
प्रसाद लाड ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई अधिकारी मराठा समाज को दिए गए लाभों के क्रियान्वयन में बाधा डालने का प्रयास करेगा या शुक्राचार्य की भूमिका निभाएगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि शिंदे समिति की अवधि बढ़ा दी गई है तथा मराठा समाज से संबंधित 58 लाख दस्तावेजों और रिकॉर्ड के अध्ययन के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है.
* 902 मामले वापस लेने का दावा
लाड ने बताया कि मराठा आंदोलन के दौरान दर्ज 964 मामलों में से 902 मामले वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले अथवा दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मराठा समाज से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं और जल्द ही एक स्वतंत्र मराठा कक्ष स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन के दौरान या समाज के हित में कार्य करते समय उनसे कोई त्रुटि हुई हो तो वे उसके लिए माफी मांगने को भी तैयार हैं.
मराठा आरक्षण आंदोलन के लिहाज से यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार द्वारा किए गए आश्वासनों को कितनी तेजी से अमल में लाया जाता है और मराठा समाज को वास्तविक लाभ कब तक मिल पाता है.

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