साढ़े आठ माह बाद भी अधजले शव की नहीं हुई शिनाख्त, जांच में फिर जुटी पुलिस

शिराला हत्याकांड

* नवंबर 2025 में खेत में मिला था अधजला शव
* पहचान न होने से हत्या की गुत्थी अब भी बरकरार
अमरावती/दि.23 अमरावती जिले के वलगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत शिराला गांव के समीप नवंबर 2025 में मिले अधजले युवक के शव की पहचान साढ़े आठ माह बाद भी नहीं हो सकी है. मृतक की शिनाख्त नहीं होने के कारण हत्या का रहस्य अब तक बरकरार है. मामले की जांच को नई गति देने के लिए स्थानीय अपराध शाखा के नवनियुक्त पुलिस निरीक्षक दिनेश दहातोंडे ने सोमवार को घटनास्थल का दौरा कर जांच का पुनरावलोकन किया.
जानकारी के मुताबिक 6 नवंबर 2025 की सुबह शिराला गांव के पास कुछ मजदूर कपास की फसल तोड़ने खेतों की ओर जा रहे थे. इसी दौरान उन्हें एक खेत से धुआं उठता दिखाई दिया. जब वे मौके पर पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए. खेत में लगभग 20 से 25 वर्षीय अज्ञात युवक का अधजला शव पड़ा हुआ था. युवक के शरीर पर किसी धारदार हथियार से किए गए कई गहरे घावों के निशान पाए गए थे. प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत हुआ था.
* पहचान छिपाने के लिए जलाया गया था शव
घटना की सूचना मिलते ही वलगांव पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. उस समय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया था. पुलिस को आशंका थी कि हत्यारों ने युवक की पहचान छिपाने के उद्देश्य से हत्या के बाद शव को जलाने का प्रयास किया था. शव का चेहरा और कपड़े बुरी तरह जल चुके थे, जिससे उसकी पहचान करना बेहद कठिन हो गया था.
* शिनाख्त के लिए लगाए गए थे पोस्टर
मृतक की पहचान करने के लिए पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर फोटोयुक्त पोस्टर और पंपलेट लगाए थे. साथ ही आसपास के जिलों और पुलिस थानों को भी जानकारी भेजी गई थी. बावजूद इसके अब तक मृतक की पहचान नहीं हो पाई है.
* अपराध शाखा ने फिर शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अपराध शाखा के नवनियुक्त पुलिस निरीक्षक दिनेश दहातोंडे ने सोमवार को शिराला स्थित घटनास्थल का दौरा किया और जांच से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की. पुलिस अब पुराने साक्ष्यों, तकनीकी जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की फिर से जांच कर रही है. अधिकारियों को उम्मीद है कि नए सिरे से की जा रही जांच से मृतक की पहचान और हत्या के कारणों का पता लगाया जा सकेगा.
* अब भी अनसुलझा है हत्याकांड
करीब साढ़े आठ महीने बीत जाने के बावजूद न तो मृतक की पहचान हो सकी है और न ही हत्यारों तक पुलिस पहुंच पाई है. ऐसे में यह मामला अब भी जिले के सबसे रहस्यमय और चुनौतीपूर्ण हत्याकांडों में शामिल बना हुआ है.

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